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जब शासक भ्रष्ट हो जाए तो महामारी फैलती है…

 
maleriaकिसी भी राष्ट्र अथवा राज्य के विकास की जब हम बात करते हैं तो सबसे पहला सवाल यह आता है कि उस राज्य का आम आदमी कितना स्वस्थ है? अपनी उत्पादकता का कितना फीसद दे पा रहा है? लेकिन आजकल पूरे देश में स्वास्थ्य की जो तस्वीर दिख रही है वो पूरी तरह से डराने वाली है। मलेरिया, चिकनगुनिया, डेंगू सहित तमाम तरह की बीमारियां अपना पैर पसारने में सफल हो रही हैं। एक तरफ तो हम विकास की धारा को गति देने की बात कर रहे हैं, सरकारे स्मार्ट सिटी बनाने की वकालत कर रही हैं और अरबों रूपये का बजट आवंटित किए जा रहे हैं। यहां पर अहम सवाल यह उठता है कि क्या कंक्रीट के जंगल फैला लेना ही विकास की कसौटी है या इससे इतर भी विकास के कुछ मानक हैं?
पिछले दिनों एक टीवी डिवेट में गया था। दिल्ली में बढ़ रहे डेंगू और चिकनगुनिया के मामले पर चर्चा हो रही थी। राजनीतिक दलों के नेता भी उसमें शामिल थे और चिकित्सक भी। चिकित्सक तो विषय पर बात कर रहे थे लेकिन राजनेता एक दूसरे पर आरोप लगाने के सिवाय कोई और बात करने के लिए तैयार नहीं थे। कहने का मतलब यह है कि हमारा राजनीतिक तंत्र स्वास्थ्य मसलों पर पूरी तरह से उदासीन है। देश की सरकारों के पास स्वास्थ्य चिंतन की धारा न के बराबर हैं। उनका पूरा ध्यान मरीज को ठीक करने पर रहता है, जबकि असल में ध्यान मर्ज को को खत्म करने में होना चाहिए था। मलेरिया का प्रकोप आज भी जारी है। भारत जो अपने आप को दुनिया का सबसे तेज गति से विकास के दौड़ लगाने वाला देश समझ रहा है, क्या उसके विकास की गति यही है?
झाबुआ में दो वर्ष पूर्व स्वास्थ्य विषयक एक परिचर्चा में जन स्वास्थ्य अभियान से जुड़े डॉ. अमित सेन गुप्ता ने कहा था कि जब शासक भ्रष्ट होता है तो महामारी फैलती है। डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया महामारी का रूप ले चुका है, इसका सीधा सा अर्थ है कि शासक भ्रष्ट हो चुका है।

डॉ. अमित सेन गुप्ता का संबोधन