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प्रिस्क्रिप्सन के अधिकार को लेकर फार्मासिस्ट एकजुट

भोपाल/इंदौर/जयपुर :

देश में डॉक्टरों की कमी कमी को देखते हुवे सरकार जहाँ एक तरफ आयुष चिकित्सकों को प्रिस्क्रिप्सन लिखने के अधिकार देने पर विचार कर रही है, वही दूसरी तरफ फार्मासिस्ट अपने आप को चिकित्सक का दूसरा विकल्प होने का दावा कर रहे है। अपने आंदोलन को आगे बढ़ाते हुवे कई राज्यों के फार्मासिस्टों ने सरकारों को घेरना शुरू कर दिया है ।

फार्मासिस्ट कर रहे प्रिस्क्रिप्सन लिखने की मांग
फार्मासिस्ट कर रहे प्रिस्क्रिप्सन लिखने की मांग

 
इसी क्रम में मध्य प्रदेश के प्रांतीय फार्मासिस्ट एसोसिएशन के प्रवक्ता विवेक मौर्य ने बिगत दिनों जबलपुर में आयोजित मंथन बैठक में अपने विचार रखते हुवे कहा की आयुर्वेदिक, होमिओपैथी और यूनानी चिकित्सकों को एलोपैथी दवा की जानकारी नाम मात्र होती है। जबकि एक फार्मासिस्ट दवा की रासायनिक संरचना, दुष्प्रभाव, मात्रा समेत फार्माकोलॉजी का गहन अध्ययन करता है। ऐसे में फार्मासिस्ट  को चिकित्सक का वेहतर विकल्प माना जाना चाहिए। विवेक ने कहा कि सरकारों को सोचना चाहिए आखिर होमिओपैथिक, आयुर्वेदाचार्य या यूनानी डॉक्टर भला एलोपैथिक दवाइयाँ कैसे लिख सकता है, जबकि आयुष के पाठ्यक्रम और फार्मेसी में जमीन आसमान का अंतर है।
सरकारी अस्पतालों में आयुष डॉक्टर लिखते है अंग्रेजी दवाई
एक तरफ सरकारें क्रॉसपैथी को लेकर गंभीर दिखती है। एलोपैथी दवा लिख रहे आयुष डॉक्टरों पर क़ानूनी शिकंजा कसती रही है। पर दूसरी तरफ मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखण्ड, महाराष्ट्र, असम समेत कई राज्यों में सरकार खुद ही सरकारी अस्पतालों में इनकी पदस्थापना करती है। सरकारी अस्पतालों में धड़ल्ले से आयुर्वेदिक, होमिओपैथी और यूनानी डॉक्टर अंग्रेजी दवाई लिखते है। इनके पीछे तर्क दिया जाता रहा है की डॉक्टरों की कमी की वज़ह से आयुष चिकित्सकों से काम लिया जाता है।
बढ़ रहा है ड्रग रेसिस्टैन्सी का खतरा
फार्मा रिसर्चर देवेन सिंह बताते है की अनावश्यक एंटीबीटोटिक के सेवन से ड्रग रेसिस्टैन्सी का खतरा कई गुना बढ़ जाता है हालिया दिनों में कई ऐसे मामले देखने को मिले है की मरीज़ वीमारी से ज्यादा अत्यधिक व अनावश्यक दवाओं के सेवन के कारन खतरे में आ रहे है। देश में जिस तरह मरीज़ पर एंटीबायोटिक का हमला हो रहा है अगर नहीं रोका गया तो आनेवाले समय में विकट स्थिति आ जायेगी। जिससे निपटना चिकित्सा जगत के लिए एक बड़ी चुनौती होगा ।
फार्मासिस्ट प्रक्टिक्स रेगुलेशन में सुधार की जरुरत 
राजस्थान के फार्मा व आरटीआई एक्टिविस्ट सीताराम कुमावत बिगत कई सालों से प्रिस्क्रिप्सन लिखने के अधिकार को लेकर संघर्ष कर रहे है । कुमावत कहते है की फार्मेसी कॉउंसिल ऑफ़ इंडिया को खुद पहल करने की जरुरत है ।फार्मेसी प्रैक्टिस रेगुलेशन फार्मसिस्टों को प्रैक्टिस करने का अधिकार देती है पर इसमें कई कमियां अब भी है उन्होंने कहा की पीपीआर में सुधार की जरुरत है । प्रिस्क्रिप्सन लिखने के अधिकार को लेकर लगातार संघर्ष करने की आवश्यकता है।
 
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