स्वस्थ भारत मीडिया

Category : मन की बात

स्वस्थ भारत के इस स्तंभ में देश के बड़े-बड़े लेखकों के विचार को हम प्रमुखता से प्रकाशित करते हैं। देश के ज्यादातर लेखक अपने मन की बात से इसे मजबूत कर रहे हैंं।

मन की बात

कोरोना काल: वाचिक परंपरा की ओर वापसी

कोरोना काल में साहित्यकार कैसे अपने को ढाल पा रहे हैं। कैसे अपने पाठकों तक पहुंच रहे हैं। इन्हीं बिन्दुओं को शब्द-चित्र दिए हैं वरिष्ठ...
चिंतन मन की बात

देश बनाता कौन महान्! कारीगर, मजदूर और किसान

देश के 45 करोड़ मजदूरों की आवाज को शब्द दे रहे हैं वरिष्ठ सामाजिक एवं राजनीतिक चिंतक के.एन गोविंदाचार्य एसबीएम विशेष प्रवासी मजदूरों और असंगठित...
चिंतन मन की बात

कोरोना की मार: घर लौटे मजदूरों का सपना पूरा करना होगा

इंसानियत की बेरूखी से बेजार मजदूर अपने घर की ओर कूच कर गए हैं...उनके दर्द  को शब्द दे रहे हैं वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक एवं स्वतंत्र...
मन की बात चिंतन

प्रवासी मजदूरों की मौत का जिम्मेदार कौन?  

प्रवासी मजदूर भूखे-प्यासे अपने मूल निवास की ओर पैदल ही भागे जा रहे हैं। मौत के गाल में समा रहे हैं। इन्हीं बिन्दुओं को रेखांकित...
मन की बात चौपाल

आत्मनिर्भर भारत अभियान: लोकल से वोकल तक

पीएम मोदी ने चुनौती को अवसर में बदलने की राह सुझाया है। लोकल से वोकल का मंत्र दिया। इसी विषय को रेखांकित कर रहे हैं...
मन की बात विमर्श

कोरोना नहीं, यह है चीन का आर्थिक विश्वयुद्ध !

Amit Tyagi
चीन ने कोरोना वाइरस को आर्थिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया है। इसी विषय को रेखांकित कर रहे हैं वरिष्ठ स्तंभकार व स्वस्थ भारत...
विमर्श मन की बात

कोरोना योद्धाओं पर शराबी पड़ने वाले हैं भारी

शराब पिलाकर अर्थव्यवस्था सुधारने की चाह रखने वाली सरकार की कोरोना-रणनीति को अपरिपक्व बता रहे हैं वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ.ए.के.गुप्ता...
मन की बात कोविड-19

मद्य की महिमा

मद्य और राजनीति का संबंध दारू और बोतल की तरह है। भारत सहित दुनिया में शराब की राजनीतिक-महिमा को रेखांकित कर रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार...
मन की बात चिंतन

देश के असली नायकों को अब नहीं तो कब पहचानेंगे हम

कोरोना काल में देश भर में एक से बढ़कर एक नायक सामने आ रहे हैं। देश के ऐसे ही असली नायकों को पहचानने की अपील...
मन की बात कोविड-19 विमर्श

‘सोशल डिस्टेंशिंग’ के कु-अर्थ का परिणाम, बह रही है संक्रमणमुक्त मरीजों से नफरत की बयार

एक शब्द का गलत अर्थबोध कितनी बड़ी मुसिबत खड़ा कर सकता है, इसका उदाहरण है 'सोशल डिस्टेंशिंग' शब्द का कु-प्रभाव। वरिष्ठ पत्रकार अजय वर्मा की...