स्वस्थ भारत मीडिया

Category : मन की बात

काम की बातें मन की बात

चिकित्सक-मरीज के बीच सार्थक संवाद जरूरी

संसद में 2012 में यह कहा गया कि देश की दवा कंपनियां 1100 फीसद तक मुनाफा कमा रही है। इसको लेकर पूरे देश में बहुत हो-हल्ला मचा था। इसी बीच डीपीसीओ-2013 की ड्राफ्ट नेशनल फार्मास्यूटिकल्स प्राइसिंग ऑथोरिटी ने जारी किया था। उस मसौदे में दवाइयों की कीमतों को तय करने
SBA विशेष मन की बात

निपाह से डरे नहीं, समझे इसे

यहां यह ध्यान देने की बात है कि निपाह वायरस कोई नया वायरस नहीं है। आज से 20 वर्ष पूर्व 1998-99 में यह सबसे पहले मलेशिया एवं सिंगापुर में पाया गया था। 2001 में बाग्लादेश एवं भारत के पूर्वी हिस्सों में इसने अपना जाल फैलाया। भारत में सबसे पहले जनवरी-फरवरी-2001
फार्मा सेक्टर मन की बात स्वस्थ भारत अभियान

देश के हर पंचायत में जरूरी है जनऔषधि केन्द्र

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यह हर्ष का विषय है कि प्रधानमंत्री जनऔषधि परियोजना के अंतर्गत लोगों को सस्ती दवाइयां उपलब्ध कराने का काम इधर के वर्षों में तेजी से हुआ है। विपल्व चटर्जी के मार्गदर्शन में काम को गति मिली। हम आशा करते हैं कि विपल्व जी देश के प्रत्येक पंचायत में एक जनऔषधि
दस्तावेज मन की बात

कैंसर संस्थान-अडियार, चेन्नई में प्रधानमंत्री ने क्या कहा आप भी पढ़ें…

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कैंसर संस्थान डब्ल्यूआईए, चेन्नई एक स्वैच्छिक धर्मादा संस्थान है, जिसकी स्थापना स्वर्गीय डॉ. मुथुलक्ष्मी रेड्डी के प्रेरक नेतृत्व में स्वैच्छिक महिला सामाजिक कार्यकर्ताओं के समूह द्वारा की गई थी। इस संस्थान ने एक छोटे कॉटेज अस्पताल के रूप में अपनी शुरूआत की। यह दक्षिण भारत का पहला कैंसर विशेषज्ञता वाला
चौपाल मन की बात

'पीरियड' एक फ़िल्म भर का मुद्दा नहीं है

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जिस बात पर सबसे ध्यान देने की ज़रूरत है, वह यह है कि पीरियड में आप चाहें सेनिटरी पैड इस्तेमाल में ला रही हों, क्लॉथ-पैड का प्रयोग करती हों या फ़िर टैम्पॉन, कप जैसी चीज़ों का इस्तेमाल करती हों, इसे बस औरतों की गुप-चुप बात न बनाए रखें. इसके बारे
women toilet काम की बातें मन की बात विमर्श समाचार स्वस्थ भारत यात्रा

विश्व बालिका दिवस के अवसर पर स्वस्थ भारत ने की मांग, महिलाओं के लिए सार्वजानिक जगहों पर बने शौचालय!

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'स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज' विषय को लेकर 21000 किमी की स्वस्थ भारत यात्रा करने वाले स्वस्थ भारत अभियान के राष्ट्रीय संयोजक आशुतोष कुमार सिंह ने महिलाओं के लिए सार्वजानिक जगहों पर अलग शौचालय बनाएं जाने कीय मांग की है। अपनी यात्रा के अनुभवों एवं बालिकाओं से हुई बातचीत का हवाला
मन की बात

लंबा है स्वास्थ्य का डगर

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स्थिति यह है कि अगर कोई गंभीर बीमारी से पीड़ित भी है तो उसे अपनी मौत आने तक पता तक नहीं चलता है कि उसे सही मायने में कौन-सी बीमारी हुई है। देर-सबेर किसी मरीज को सद्बुद्धि आ भी जाए तो वो दौड़ता है जिला अस्पताल या फिर एम्स की
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