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झुग्गी झोपड़ी में चलती है दवा की दुकानें…

असम समेत पूर्वोत्तर राज्यों में हज़ारों की संख्या में अवैध मेडिकल दुकानें चल रही हैं। एक आकंड़े के मुताबिक असम में करीब अट्ठारह हज़ार से ज्यादा दवा दुकान हैं। दवा दुकानों में आठवी दसवीं पास फेल लोग दवा बाँटते नज़र आते है। मेडिकल स्टोर में फार्मासिस्ट की मौजूदगी ना के बराबर है, वही हज़ारों की संख्या में ऐसी भी दवा दुकाने हैं, जो बगैर किसी लाइसेंस के चल रही हैं। इतने व्यापक पैमाने पर धांधली से एक बात तो स्पस्ट है कि दवा बाजार पर दवा माफियाओं का राज चल रहा है। औषधी नियंत्रण प्रशासन बौना बना हुवा है या फिर अपराधियों को संरक्षण दे रहा है। शिकायत के बावजूद भी कारवाही का ना होना असम सरकार की नाकामी दर्शाता है …
 

असम में ऐसे कई मेडिकल स्टोर है जो बगैर ड्रग लाइसेंस धड़ल्ले से चलती है
असम में ऐसे कई मेडिकल स्टोर है जो बगैर ड्रग लाइसेंस धड़ल्ले से चलती है

गुवाहाटी/25.10.15
दिल्ली में बैठकर देश के स्वास्थ्य पर नीतियां बनाने वालों को शायद ही पता हो कि पूर्वोत्तर राज्यों में स्वास्थ्य की स्थिति कितनी बदतर है। असम के कुछ शहरी ईलाकों को छोड़ दे तो बाकि जगहों की स्थिति इस कदर बदहाल है कि मरीज़ो को उपलब्ध कराई जा रही दवा का कोई भरोषा नहीं। दवा दुकानों की स्थिति यह है कि झुग्गी झोपड़ियों से लेकर पान ठेले पर दवा धड़ल्ले से बेचीं जा रही है। खबर के साथ लगी फोटो से अंदाजा सहज लगाया जा सकता है किस तरह से दवा दुकान चलाई जा रही है। ऐसे में ड्रग एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, फार्मेसी एक्ट और फार्मेसी प्रैक्टिस रेगुलेशन के अनुपालन की उम्मीद करना बेमानी ही है । असम रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट एसोसिएशन के प्रवक्ता जाकिर सिकदर बताते है कि असम का औषधी नियंत्रण प्रशासन पूरी तरह भ्रष्टाचार में लिप्त है। रिस्वत लेकर ड्रग इंस्पेक्टर बगैर छानबीन किये किसी का भी लाइसेंस बना देते है।
फार्मासिस्ट कम और मेडिकल स्टोर ज्यादा 
जाकिर सिकदर बतातें है कि असम में ड्रग लाइसेंस बनाने में बड़े पैमाने पर घोटाला हुवा है। असम में मेडिकल स्टोर के संख्या और असम फार्मेसी काउंसिल में रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट की संख्या में दुगुने से ज्यादा का अंतर है। यह एक बड़े घोटाले का संकेत है। इसकी शिकायत असम से लेकर दिल्ली तक की जा चुकी है पर अबतक कोई करवाई नहीं हुई है। जाकिर ने बताया की उन्होंने हाईकोर्ट में दस्तक दी है। हाई कोर्ट ने जांच के आदेश दिए है, पर ना तो असम फार्मेसी काउंसिल सुन रही है ना ही औषधी नियंत्रण प्रशासन ।
काउंसिल करेगी कार्रवाई

असम फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार प्रसन्ना शर्मा ने स्वस्थ भारत डॉट इन को बताया की असम की ज्यादातर दवा दुकान में किराये पर फार्मासिस्ट के सर्टिफिकेट लगे हैं । असम में कई ऐसे फार्मासिस्ट हैं, जो अपने रजिस्ट्रेशन का दुरूपयोग कर रहे है। ऐसे फार्मासिस्टों की संख्या हज़ारों में है, जो कार्यरत कहीं और है और अपना रजिस्ट्रेशन गैर क़ानूनी रूप से दवा दुकानों को दे रखा है। काउंसिल द्वारा ऐसे लोगों को चेतावनी दी गई है है। अगर वे नहीं माने तो जल्द ही कार्रवाई करते हुवे उनका रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया जाएगा। फ़र्ज़ी फार्मसिस्ट के बारे में जब पूछा गया तो रजिस्ट्रार ने बताया कि काउंसिल में रजिस्टर्ड फ़र्ज़ी फार्मासिस्टों को चिन्हित कर लिया गया है। फार्मेसी काउंसिल ऑफ़ इंडिया को सुचना दे दी गई है। कार्रवाई जारी है, दोषियों की किसी सूरत में नहीं बक्शा जाएगा।
असम फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार प्रसन्ना कुमार शर्मा
असम फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार प्रसन्ना कुमार शर्मा

 
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