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कब जागेगी पीसीआई!

कब सुधरेगी पीसीआई!
कब सुधरेगी पीसीआई!

हम सब को मालूम है कि फार्मासिस्टों के हितो की रक्षा करने के लिए एक सरकारी संस्था काम करती है। जिसका नाम है फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया। लेकिन जब से मैं फार्मेसी काउंसिल के कार्यों को जानने-समझने लगा हूं मुझे लगता है कि यह संस्थान केवल कागजों पर ही पहाड़ खड़ा करती रही है। हम फार्मासिस्टों की दशा व दिशा से इसे शायद ही कुछ लेना-देना रहा हो। केमिस्ट एसोसिएशनों की गोद में बैठी यह संस्था आज अपना वजूद खो चुकी है। इसे जगाने की जरूरत है। दिल्ली में हमलोगों ने पिछले दिनों इस कॉउंसिल को उसके मूल काम को याद दिलाने की कोशिश की थी…लेकिन अभी बहुत कुछ  करना बाकी है।
दरअसल फार्मेसी कौंसिल ऑफ़ इंडिया का काम केवल एक्ट बनाना और कॉलेजों का अप्रूवल करना मात्र नहीं है बल्कि इसे फार्मेसी की बदहाली व गिरती सेहत के लिए ज़िम्मेदारी लेते हुए सुधार की दिशा में कदम भी उठाना पड़ेगा।  यही बात पीसीआई के घेराव के समय भी बताने की कोशिश की गई थी । चिकित्सकों की संस्था मेडिकल कौंसिल ऑफ़ इंडिया, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन समय-समय पर केंद्र और राज्य सरकारों पर अपने हितों की रक्षा के लिए दबाब डालते रहते हैं। चूकि वे एकजुट होकर जोरदार तरीके से एक सुर में अपनी बात रखते हैं जिसका परिणाम यह होता है कि सरकार उनकी हरेक बात को गंभीरता से सुनती है और जायज मांगो को तुरंत मान भी लेती है। वहीं दूसरी तरफ हमलोग हैं कि अपने अधिकारों के प्रति जागरूक ही नहीं हैं…यदि हम सच में जागरूक हो जाएं तो पीसीआई व सरकारों की हिम्मत नहीं है कि वो हमारी मांगो को अऩसुनी कर दे।
विगत कुछ महीने में तेज़ी से बदलाव दिखे हैं। लेकिन इतना ही काफी नहीं है। हाथ पर हाथ रखकर हम बैठ भी नहीं सकते। हमें देश के सभी फार्मासिस्टों को जागरूक करना होगा। उन्हें जगाना होगा उनके अधिकारों के प्रति, उनके कर्तव्यों के प्रति। जैसा कि दिल्ली में हुए फार्मासिस्ट सम्मेलन में वक्ताओं ने सुझाया है कि सभी फार्मासिस्टों को एकजुट होना चाहिए। मुझे भी लगता है कि अब समय आ गया है कि हम सब एकजुट होकर देश हित में फार्मा इंडस्ट्री में एक नई बहार लेकर आएं और देश की जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने में अपनी भूमिका सुनिश्चित करें। फिलहाल इतना ही।

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