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The Thermometer-सर्वाइकल कैंसर का उपचार आसान: डॉ. गगन सैनी

The Thermometer-सर्वाइकल कैंसर का उपचार आसान: डॉ. गगन सैनी

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। एक बीमारी है कैंसर। इसे सबसे अधिक जानलेवा माना जाता है। इससे मुक्त होने की न तो सटीक दवा न वैक्सीन। The thermometer कार्यक्रम में कैंसर एक्सपर्ट डॉ. गगन सैनी से बातचीत की गई और इसके विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। वे रेडिएशन ओकोलॉजी के एक्सपर्ट हैं और गाजियाबाद के यशोदा अस्पताल में इस विभाग को लीड करते हैं। उनसे बातचीत की थी समूह संपादक आशुतोष कुमार सिंह ने। प्रस्तुत है बातचीत की पहली कड़ी—

आशुतोष: आज सर्वाइकल कैंसर की चर्चा आम है। इसके प्रिवेंशन से लेकर ट्रीटमेंट तक के बारे में जानकारी दें क्योंकि यह आधी आबादी से जुड़ा विषय है।
डॉ. सैनी: सर्वाइकल कैंसर हुआ बच्चेदानी का कैंसर। अब बच्चेदानी का कैंसर के भी दो पार्ट हो गए। एक तो हो गया बच्चेदानी का जहां बच्चा होता है। एक होता है बच्चेदानी का मुंह। बच्चेदानी के मुंह को सर्विक्स बोलते हैं और वहीं का कैंसर सबसे कॉमन है। सर्विक्स का जो प्रिवेंशन है वो आज की डेट में वैक्सीन से किया जा सकता है। ये एक कमाल की बात है कि यही एक ऐसा कैंसर है जिसको वैक्सीन से प्रिवेंट कर सकते हैं। इस कैंसर का सबसे महत्वपूर्ण कारण होता है इंफेक्शन। यही इंफेक्शन कैंसर में बदल सकता है। वैक्सीन उस इंफेक्शन के खिलाफ काम करती है। अगर युवावस्था में वैक्सीन लगा दी जाए तो मानकर चलिए कि उसे यह कैंसर नहीं होगा। 12 की उम्र तक यह वैक्सीन लग जाए तो बेस्ट है। 30 के आसपास भी लग सकता है। जब जागो तभी सवेरा। ये है सर्वाइकल कैंसर का प्रिवेंशन। इसमें लाइफ स्टाइल का कोई ज्यादा लिंक नहीं देखा गया है। इसकी स्क्रीनिंग होती है। एक हुआ कि मैंने इसे विकसित ही नहीं होने दिया। दूसरा ये विकसित हुआ लेकिन जल्दी पकड़ में आ गया तो उसे कहते हैं स्क्रीनिंग।

आशुतोष: तो स्क्रीनिंग कैसे होगी?
डॉ.सैनी: एक खास उम्र के बाद अपना पेप्सियर करवाना पड़ेगा। गाइनोकोलॉजिस्ट बच्चेदानी के मुंह से हल्का सा उसका स्क्रैप ले लेती हैं। देखने में वो पता भी नहीं लगेगा। उसे स्लाइड पर लगा कर देख लिया। यह बहुत जरूरी टेस्ट है। 5 मिनट में हो जाता है। इसकी मामूली कीमत होती है। सरकारी अस्पताल में तो यह फ्री होता है। कई राज्यों में तो बड़े अच्छे प्रोग्राम्स हैं जहां पैथोलॉजिस्ट एक बार नहीं, चार बार देखता है। चार पैथोलॉजिस्ट देखते हैं। उसके बाद फोटो माइक्रोग्राफ बन जाता है। फिर वो सेंट्रल डेटाबेस में जाता है। उसमें चार लोग राय देते हैं। अगर यह इसमें कैंसर आ जाए तो कई बार तो बच्चेदानी निकालनी भी नहीं पड़ती। कई बार उसी एरिया को थोड़ा सा छील कर निकाल दीजिए। उसी से ठीक हो जाता है। काफी छोटा होता है। अगर बड़ा भी होगा तो बच्चेदानी निकाल कर ठीक हो जाएगा। थोड़ा और बड़ा होगा तो बच्चेदानी निकाल के थोड़ी रेडिएशन दे देंगे। अगर वो पहले से दिख रहा है तो फिर बच्चेदानी निकालने की भी जरूरत नहीं। सीधा रेडिएशन और कीमोथेरेपी से ठीक हो जाता है। ये कैंसर बहुत क्यरेबल है। स्टेज तीन में भी, जो एडवांस स्टेज होती है, ठीक किया जा सकता है। अगर लग रहा है कि आपको कुछ है या कोई सिम्टम है जो ठीक नहीं हो रहा तो आप डॉक्टर के पास जाएं। स्पेशलिस्ट के पास जाना काफी जरूरी है क्योंकि वह हर चीज सोच कर देखते हैं। उनका डायमेंशंस सही रहता है।

आशुतोष: इसके क्या लक्षण होते हैं?
डॉ.सैनी: जो सबसे महत्वपूर्ण लक्षण होता है, उसे कहते हैं पोस्ट क्वाइटल ब्लीडिंग। मतलब संबंध के बाद ब्लीडिंग होना और वो जब लगातार हो तो आपको जरूर स्त्री रोग विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए। इसके अलावा और चीजें हैं। जब ट्यूमर बहुत एडवांस हो जाता है तो फिर दर्द होता है। एक बड़ी मजेदार चीज है सर्वाइकल कैंसर में कि ट्यूमर जब वेरी अर्ली स्टेज में है तो उसको छील कर निकाल दिया या बच्चेदारी निकाल दी लेकिन जब एडवांस से ठीक पहले के स्टेज में है तब सर्जरी करके रेडिएशन करें या सिर्फ रेडिएशन के साथ हल्की कीमोथेरेपी दे दें। नतीजा एक समान ही मिलेगा। सर्जरी के बाद रेडिएशन करना भारी इलाज है। एक एरिया में से आप एक टिश्यू को निकालते हो, फिर उसे रिपेयर करते हो। फिर रिपेयरिंग हील होती है। फिर बाद में बोलते हैं कि अब रेडिएशन भी होगी। इसलिए रेडिएशन और कीमोथेरेपी ज्यादा सुरक्षित ट्रीटमेंट है।

(जारी)

प्रस्तुति: अजय वर्मा

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