स्वस्थ भारत मीडिया
समाचार / News

फेफड़ों पर ही नहीं, हड्डियों पर भी असर डाल रहा Air pollution

फेफड़ों पर ही नहीं, हड्डियों पर भी असर डाल रहा वायु प्रदूषण

डॉ. दीपक अरोड़ा

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण (Air pollution) का स्तर लगातार चिंता का विषय बना हुआ है। 30 नवंबर की सुबह 8 बजे केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार दिल्ली का औसत AQI 335 दर्ज किया गया यानि 400 के करीब दर्ज किया गया। यह ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है और इसे खतरनाक भी माना जाता है। पिछले कई दिनों से हवा की गुणवत्ता गंभीर से बेहद खराब के बीच बनी हुई है।

प्रदूषण: AQI 320 से अधिक

 

Dr.Deepak Arora

इंडिया गेट, आनंद विहार और आया नगर जैसे कई इलाकों में AQI 320 से ऊपर रहा। राजधानी के कई हिस्सों—नरेला, द्वारका, रोहिणी में सुबह वॉक करने वाले लोगों की संख्या बेहद कम हो गई है, क्योंकि उच्च प्रदूषण ने सांस लेने, खांसी और सिरदर्द जैसी समस्याएँ बढ़ाई हैं। उच्च प्रदूषण के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि इसे संसद के शीतकालीन सत्र में भी उठाने की तैयारी है। दिवाली के बाद से लगातार बिगड़ी हवा के बीच भले ही कुछ प्रतिबंधों में ढील दी गई है, लेकिन प्रदूषण का खतरा कम नहीं हुआ है। प्रदूषण सिर्फ फेफड़ों को नहीं, बल्कि हड्डियों और जोड़ों को भी गहराई से नुकसान पहुँचा रहा है।

 

प्रदूषण: हड्डियों—जोड़ों पर ऐसे प्रभाव

Knock knees

 

प्रदूषण में मौजूद सूक्ष्म कण—PM2.5 और PM10—सिर्फ फेफड़ों में जाकर नहीं रुकते। ये रक्त प्रवाह में शामिल होकर पूरे शरीर में सूजन पैदा करते हैं। धीरे-धीरे यह सूजन जोड़ों में दर्द, मांसपेशियों में जकड़न, हड्डियों की कमजोरी, आर्थराइटिस बढ़ने जैसी समस्याओं का कारण बनती है। कई अध्ययनों में पाया गया है कि लगातार खराब हवा में रहने से हड्डियों की density भी कम होती है, यानी हड्डियाँ समय से पहले कमजोर होने लगती हैं। प्रदूषण का सबसे बड़ा दुष्प्रभाव यह है कि लोग बाहर निकल ही नहीं पा रहे। धूप में कम समय बिताने से शरीर को मिलने वाला प्राकृतिक विटामिन D तेजी से कम हो रहा है। बच्चे, युवा, महिलाएँ, बुजुर्ग—हर वर्ग में इसकी कमी तेज़ी से बढ़ रही है। Vitamin D हड्डियों की मजबूती की बुनियाद है। इसकी कमी होने पर बोन मिनरलाइजेशन प्रभावित होता है और हड्डियाँ जल्दी कमजोर हो जाती हैं। कम वॉक, कम मूवमेंट दर्द और भी बढ़ाता है। प्रदूषण के कारण लोग नियमित वॉक करने से बच रहे हैं, जबकि नियमित चलना स्वस्थ जोड़ + बेहतर रक्त संचार + नियंत्रित वजन जब चलना कम होता है, तो जोड़ों पर दबाव बढ़ जाता है तथा कड़ापन व दर्द और ज्यादा हो जाता है।

प्रदूषण: ऐसे निकालें समाधान

प्रदूषण के बीच भी हड्डियों और जोड़ों को स्वस्थ रखना पूरी तरह संभव है—बस दिनचर्या में कुछ बदलाव ज़रूरी हैं: 1. घर के अंदर व्यायाम करें • योग करें • स्ट्रेचिंग करें • घर में टहलना • घर में ही साइकलिंग करें। ये सभी जोड़ों के लिए बेहतरीन हैं। 2. Vitamin D की पूर्ति करें। अगर बाहर धूप नहीं मिल रही तो डॉक्टर की सलाह से Vitamin D supplements, Calcium-rich diet और Multi vitamins लेना अत्यंत आवश्यक है। 3. वजन पर नियंत्रण रखें। अधिक वज़न घुटनों और हिप जॉइंट्स पर सीधा दबाव बढ़ाता है। 4. आहार में सुधार करें। दूध, दही, पनीर, अंडे, मेवे, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, बाजरा, रागी आदि लें।

निष्कर्ष

प्रदूषण सिर्फ फेफड़ों का मुद्दा नहीं है। यह एक साइलेंट ऑर्थोपेडिक खतरा बन चुका है। यह हड्डियों, मांसपेशियों और जोड़ों की सेहत को उतना ही नुकसान पहुँचा रहा है जितना सांस की नलियों को। समय की जरूरत है कि लोग प्रदूषण से बचाव के साथ-साथ अपनी bone health पर भी ध्यान दें।

(लेखक दिल्ली के जाने-माने ऑर्थोपेडिक सर्जन और Max Super Speciality Hospital, Patparganj में Principal Consultant हैं।)

Related posts

MMU की तानाशाही: नर्सिंग की छात्राओं का हुक्का-पानी किया बंद, सैकड़ों छात्राएं हॉस्टल छोड़ निकली अपने घर की ओर…

Ashutosh Kumar Singh

देश भर में उल्लास के साथ योग दिवस संपन्न

admin

एक महीने के आयुर्वेद उत्सव अभियान का हुआ शुभारंभ

admin

Leave a Comment