पटना (स्वस्थ भारत मीडिया)। बिहार सरकार राज्य के ज्यादातर सरकारी मेडिकल कॉलेजों (Medical College) का प्रबंधन निजी हाथों में देने की तैयारी में है। इस बारे में सक्रिय होते हुए सरकार ने 33 मेडिकल कॉलेजों को पीपीपी मोड पर चलाने के लिए प्राइवेट कंपनियों से प्रस्ताव मांगे हैं। इसका कंसल्टेशन हो भी चुका है हालांकि विवरण सार्वजनिक नहीं हुआ है।
16 कॉलेज सूची में
हाल ही स्वास्थ्य सचिव कुमार रवि ने कहा था कि इन 33 में से 17 नए और 16 ब्राउनफील्ड होंगे। ब्राउनफील्ड से उनका आशय ऐसे सरकारी मेडिकल कॉलेज से है जो या तो चल रहे हैं या निर्माणाधीन हैं। इस वक्त राज्य में 12 सरकारी मेडिकल कॉलेज हैं और आठ निर्माणाधीन यानी कुल 20 हैं। सरकार इनमें से 16 को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी में है यानी सिर्फ चार बचेंगे IGIMS, Aiims, PMCH और NMCH। बाकी सब निजी हाथों में जा सकते हैं। अब तक इनके जो मेडिकल कॉलेज हैं वे गरीबों के इलाज के बड़े ठिकाने हैं। चाहे SKMCH हो या JLNCH भागलपुर या अनुग्रह नारायण मेडिकल कॉलेज, गया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ऐसी स्थिति में फीस निजी संचालक तय करेंगे, सरकार अपनी तरफ से गरीबों को सब्सिडी देगी। इससे पहले बिहार सरकार जयप्रभा अस्पताल को मेदांता समूह को दे चुकी है। अब वहां गरीबों के लिए झांकना भी मुश्किल है। इनके अलावा 17 ग्रीनफील्ड मेडिकल कॉलेज के लिए भी सरकार 60 साल की लीज पर इन्हें जमीन देगी।
हेल्थ महकमा खुद बीमार
सवाल यह है कि क्या निजी हाथों में जाने के बाद बिहार के हेल्थ सेक्टर में सुधार हो सकेगा? अभी व्यव्स्था तो चिंतित करने वाली है। आंकड़े खुद इसकी गवाही देते हैं। मसलन बड़े अस्पताल से लेकर गांवों तक फैले अस्पतालों की कुल संख्या 13150 है जबकि कार्यरत डॉक्टरों की संख्या 9658 यानी एक अस्पताल पर एक डॉक्टर भी नहीं। नियमित डॉक्टरों के 17070 स्वीकृत पदों में 8320 और संविदा डॉक्टरों के 4751 स्वीकृत पदों में 1338 ही कार्यरत हैं। यानी 56 फीसद पद खाली हैं। इसी तरह ग्रेड ए नर्स और एएनएम मिलाकर कुल 67530 पद स्वीकृत हैं परन्तु 40519 ही कार्यरत हैं यानी इनके 40 फीसद पद खाली हैं। जहां तक हेल्थ सेक्टर पर खर्च का सवाल है, बिहार में प्रति व्यक्ति 1320 रुपए खर्च किए जाते हैं जो देश में सबसे कम है। याद रहे कि प्रति व्यक्ति खर्च का राष्ट्रीय औसत 3169 रुपए का है। देखना होगा कि इस सूरत में अस्पतालों को निजी क्षेत्र में सौंपने पर कितना सुधार हो पाता है।
