स्वस्थ भारत मीडिया
समाचार / News

WHO: कालाजार के इलाज के लिए नई गाइडलाइन जारी

WHO: कालाजार के इलाज के लिए नई गाइडलाइन जारी

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कालाजार और पोस्ट कालाजार डर्मल लीशमैनियासिस (PKLD) के इलाज को लेकर नई गाइडलाइन जारी जारी की है। इन नए दिशा-निर्देशों में मरीजों के लिए पहले से अधिक सुरक्षित, कम समय वाला और आसान इलाज सुझाया गया है। खासतौर पर पूर्वी अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में रहने वाले मरीजों को इसका बड़ा फायदा मिलेगा। कालाजार को ‘काला बुखार’ भी कहा जाता है। यह बीमारी संक्रमित सैंडफ्लाई (बालू मक्खी) के काटने से फैलती है। यह दुनिया की सबसे खतरनाक परजीवी बीमारियों में से एक है। मलेरिया के बाद यह सबसे ज्यादा जान लेने वाली परजीवी बीमारियों में शामिल है।

कालाजार के लक्षण

कालाजार होने पर मरीज को तेज बुखार, वजन कम होना, खून की कमी, शरीर में कमजोरी और तिल्ली व लीवर के बढ़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। समय पर इलाज न मिलने पर यह बीमारी जानलेवा भी साबित हो सकती है। यह बीमारी दुनिया के करीब 80 देशों में पाई जाती है। हर साल लगभग 50 हजार से 90 हजार लोग इससे प्रभावित होते हैं, हालांकि कई मामले स्वास्थ्य संस्थाओं तक पहुंच नहीं पाते। कालाजार के इलाज के बाद कुछ मरीजों में पोस्ट-काला-आजारा डर्मल लीशमैनियासिस (PKLD) नाम की त्वचा संबंधी समस्या हो सकती है। इसमें त्वचा पर दाने या निशान दिखाई देते हैं। हालांकि पीकेएलडी जानलेवा नहीं होती, लेकिन यह संक्रमण फैलाने का एक स्रोत बन सकती है। इसके अलावा त्वचा पर दिखने वाले बदलावों के कारण कई मरीजों को समाज में भेदभाव, अकेलापन और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।

नए विकल्प से उपचार

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पहले खासतौर पर अफ्रीका में कालाजार के इलाज के लिए सोडियम स्टिबोग्लुकोनेट (SSG) नाम की दवा का इस्तेमाल किया जाता था। इस दवा के लिए कई दिनों तक रोजाना इंजेक्शन लगवाने पड़ते थे और इसके गंभीर दुष्प्रभाव भी हो सकते थे। नई गाइडलाइन में पहली बार उन मरीजों के लिए एसएसजी से मुक्त इलाज की सिफारिश की गई है, जो नए उपचार विकल्पों के लिए योग्य हैं। पूर्वी अफ्रीका में अब मिल्टेफोसिन नाम की मुंह से ली जाने वाली दवा को पैरामोमाइसिन इंजेक्शन के साथ इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। नया इलाज पहले की तुलना में कम समय में पूरा होगा। पूर्वी अफ्रीका में कालाजार का नया उपचार करीब 14 दिनों में पूरा किया जा सकेगा और इसमें पुराने इलाज की तुलना में कम इंजेक्शन और कम विषाक्त प्रभाव होंगे।

PKLD मरीजों के लिए भी राहत

गाइडलाइन में पीकेएलडी मरीजों के लिए भी छोटे और सुरक्षित इलाज की सलाह दी गई है। दक्षिण-पूर्व एशिया में लिपोसोमल एम्फोटेरिसिन बी और मिल्टेफोसिन जैसी दवाओं के इस्तेमाल को शामिल किया गया है। पहले पीकेएलडी का इलाज कई हफ्तों तक चलता था, जिससे मरीजों को लंबे समय तक अस्पताल और दवाओं की परेशानी झेलनी पड़ती थी। नए उपचार से मरीजों को कम समय में बेहतर सुविधा मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि नई दवाओं और बेहतर इलाज के तरीकों से कालाजार को खत्म करने के अभियान को मजबूती मिलेगी। इन नए उपचारों से बड़ी संख्या में मरीजों को लाभ मिलने की उम्मीद है। इन उपचारों के विकास में ड्रग्स फॉर नेग्लेक्टेड डिजीजेज इनिशिएटिव (DNDI) और कई अन्य संस्थाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब प्रभावित देशों से उम्मीद की जा रही है कि वे अपनी राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीतियों में इन नई सिफारिशों को शामिल करेंगे। नई गाइडलाइन कालाजार से लड़ाई में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे मरीजों को कम तकलीफ वाला इलाज मिलेगा और दुनिया को इस गंभीर बीमारी के उन्मूलन के लक्ष्य के करीब पहुंचने में मदद मिलेगी।

Related posts

आत्मनिर्भर भारत और खेलों में कौशल आधारित शिक्षा पर राष्ट्रीय कांफ्रेंस 28 से नांदेड में

admin

Cancer: हॉटस्पॉट की पहचान होगी आसान, निगरानी बढ़ाने पर जोर

admin

"विलासपूर (छत्तीसगढ) दुर्घटना ड्रग डिपार्टमेंट की लापरवाही का नतीजा" – युनियन ऑफ रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट्स

Ashutosh Kumar Singh

Leave a Comment