स्वस्थ भारत मीडिया
समाचार / News

निजी अस्पतालों के महंगे सामानों पर नड्डा सख्त

निजी अस्पतालों के महंगे सामानों पर नड्डा सख्त

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली चीजों की ऊंची कीमत और ज्यादा मुनाफे का मुद्दा स्वास्थ्य मंत्रालय तक पहुंच गया है। इसे महाराष्ट्र एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने उठाया था। अब स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने फार्मास्यूटिकल्स विभाग को मेडिकल क्षेत्र और अस्पतालों के साथ बैठक कर समाधान निकालने का निर्देश दिया है। यह निर्देश फार्मास्यूटिकल्स विभाग के सचिव के साथ हुई एक अहम बैठक के बाद दिया गया।

महाराष्ट्र से उठा था मामला

मालूम हो कि अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले सामानों की खरीद कीमत और एमआरपी में बड़ा अंतर सामने आया है। मसलन करीब 11 रुपये में खरीदे गए एक आईवी सेट की एमआरपी करीब 325 रुपये बताई गई। कुछ उत्पादों में 150 से 2800 प्रतिशत तक का अंतर पाया गया। इसी को लेकर नड्डा ने बैठक के लिए कहा है। मुंढे ने कहा था कि अस्पतालों पर 24 घंटे नर्सिंग, सुविधाओं के रखरखाव और दूसरी जरूरी सेवाओं का खर्च होता है। इसलिए किसी भी बदलाव पर अस्पतालों और दवा उद्योग से चर्चा जरूरी होगी। उनका कहना था कि फैसला एकतरफा या मनमाने तरीके से नहीं होना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह सवाल भी उठाया था कि अगर कोई उत्पाद अस्पताल को 11 रुपये में मिल रहा है और उसकी एमआरपी 325 रुपये है, तो दोनों कीमतों के बीच का अंतर आखिर कहां जा रहा है। उनका जोर इस बात पर था कि निर्माता, अस्पताल और उपभोक्ता सभी के हितों को ध्यान में रखते हुए व्यवस्था पारदर्शी होनी चाहिए।

अन्य जिलों में भी ऐसी हालत

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मुंढे के खुलासे के बाद देश के कई हिस्सों से भी इस तरह की खबर सामने आने लगी है। यूपी के शाहजहांपुर की खबर है कि वहां के कुछ निजी अस्पतालों के मेडिकल स्टोर्स में सर्जिकल और मेडिकल उत्पादों की कीमतों को लेकर सवाल उठे हैं। पड़ताल में अस्पतालों और बाहर के मेडिकल स्टोर्स में कई उत्पादों की कीमतों में बड़ा अंतर सामने आने का दावा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक ₹80 के यूरिन बैग की कीमत अलग-अलग अस्पतालों में ₹100 से ₹600 तक बताई गई। सर्जिकल ग्लव्ज की कीमत बाहर ₹25 बताई गई, जबकि कुछ अस्पतालों में ₹100 से ₹150 तक लिए जाने का दावा है। ग्लूकोज की बोतल के लिए भी ₹25 के मुकाबले कुछ अस्पतालों में ₹70 से ₹94 तक लिए जाने की बात सामने आई। एक तीमारदार ने चार दिन की दवा बाहर ₹150 में मिलने की बात कही, जबकि अस्पताल के मेडिकल स्टोर पर वही दवा ₹240 में मिली। कुछ मरीजों और तीमारदारों ने बिल न मिलने और कीमत पूछने पर परेशानी होने की भी शिकायत की।

Related posts

17 खतरनाक दवाओं को टॉयलेट में फ्लश करने की सलाह

admin

उपलब्धि: देश के 108 जिलों में पहुंचा हर घर जल

admin

गुणवत्ता जांच में दवाओं के कई सैंपल फेल

admin

Leave a Comment