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सिंगल यूज़ मेडिकल डिवाइस के दोबारा इस्तेमाल पर बैन

सिंगल यूज़ मेडिकल डिवाइस के दोबारा इस्तेमाल पर बैन

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। सरकार ने अस्पतालों में एक बार इस्तेमाल होने वाले मेडिकल डिवाइस के लगातार दोबारा इस्तेमाल पर बैन लगा दिया है। स​रकार इसे पैसा बनाने के लिए स्वास्थ्य से खिलवाड़ माना है। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ हेल्थ सर्विसेज़ (DGHS) ने यह आदेश जारी किया है। डीजीएचएस निदेशक लवनीश जी कृष्णा ने पत्र में कहा कि ऐसे उपकरणों का कुछ निजी और कॉर्पोरेट अस्पतालों में, विशेष रूप से कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, ऑन्कोलॉजी, कार्डियोथोरेसिक और वैस्कुलर सर्जरी और न्यूरोसर्जरी में पुन: उपयोग किया जा रहा है।

मरीजों पर खर्च का भार

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दोबारा इस्तेमाल होने वाले डिवाइस में कार्डियक कैथेटर, गाइडवायर, बैलून और एब्लेशन कैथेटर और इंट्रोड्यूसर शीथ शामिल हैं। डायलिसिस इक्विपमेंट जैसे डायलाइज़र और ब्लड ट्यूबिंग; और सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट जैसे स्टेपलर, लैप्रोस्कोपिक ट्रोकार और ऑर्थोपेडिक ड्रिल बिट। सिरिंज और सुई भी उन चीज़ों में से हैं जिन्हें एसोसिएशन ऑफ़ इंडियन मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री (AiMeD) ने सबसे ज़्यादा दोबारा इस्तेमाल होने वाली चीज़ों के तौर पर पहचाना है, जो घरेलू मेडिकल डिवाइस बनाने वालों को रिप्रेजेंट करती है। पत्र में कहा गया है कि यह देखा गया है कि ऐसे डिवाइस और डिस्पोजेबल सर्जिकल आइटम, एक प्रोसीजर के लिए इस्तेमाल होने के बाद, स्टेरिलाइज़ किए जा रहे हैं और बाद में दोबारा इस्तेमाल किए जा रहे हैं, जबकि वे सिर्फ़ एक बार इस्तेमाल के लिए बने हैं। इसमें यह भी कहा गया कि कुछ मामलों में इन आइटम की पूरी कीमत अभी भी मरीज़ों से ली जा रही है या संबंधित सरकारी अधिकारी उन्हें रीइंबर्स कर रहे हैं।

संक्रमण का खतरा भी

सिंगल यूज डिवाइस को साफ़ और स्टेरिलाइज़ करने के बाद भी वे दोबारा इस्तेमाल के लिए सुरक्षित नहीं हो सकते हैं। एक बार इस्तेमाल के लिए डिज़ाइन किए गए डिवाइस खराब हो सकते हैं, उनकी परफॉर्मेंस कम हो सकती है या अगर रीप्रोसेसिंग ठीक से न हो, तो उनमें बायोलॉजिकल तत्व रह सकता है जिससे मरीज़ों को हेपेटाइटिस B और C, HIV और बैक्टीरियल इन्फेक्शन जैसे इन्फेक्शन हो सकते हैं। इसके साथ ही डिवाइस फेलियर और दूसरी दिक्कतें भी हो सकती हैं। DGHS ने कहा कि इससे मरीज़ की सुरक्षा, इन्फेक्शन से बचाव, रेगुलेटरी कम्प्लायंस और हेल्थकेयर खर्च को लेकर चिंताएँ पैदा हुई हैं। उसने चेतावनी दी कि दोबारा इस्तेमाल करने से मरीज़ों को क्रॉस-इंफेक्शन, डिवाइस में खराबी, परफॉर्मेंस में कमी और प्रोसीजर से जुड़ी दूसरी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

महाराष्ट्र में मिले थे कई मामले

रिपोर्ट कहती है कि 2017 में महाराष्ट्र के फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने कथित तौर पर पाया कि आठ प्राइवेट अस्पतालों ने एक हजार से ज़्यादा मरीज़ों के 1,306 कैथेटर दोबारा इस्तेमाल किए थे। 2018 में उत्तर प्रदेश के बांगरमऊ में कम से कम 33 लोग HIV पॉज़िटिव पाए गए, जब एक अयोग्य डॉक्टर ने उनमें से कुछ को इन्फेक्टेड सिरिंज से इंजेक्शन लगाया। यह ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940, मेडिकल डिवाइसेस रूल्स, 2017, क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स एक्ट, 2010, इन्फेक्शन प्रिवेंशन प्रोटोकॉल और बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट प्रोविज़न्स का उल्लंघन भी है। DGHS ने राज्यों के स्वास्थ्य सचिव और स्वास्थ्य सेवा के डायरेक्टर, ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ़ इंडिया (DCGI) और राज्य ड्रग कंट्रोलर से इसे असरदार तरीके से लागू करने को कहा है।

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