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बिलासपुर नसबंदी मामलाः सड़क पर डॉक्टर, आफत में मरीज

डॉक्टरों को पृथ्वीवासियों ने भगवान का दर्जा दिया है। बिलासपुर नसबंदी मामले में प्रथम दृष्टया डॉकटर की गलती भी स्पष्ट रूप से दिख रही है, इसको लेकर जाँच भी चल रहा है। इस बीच आईएमए का हड़ताल अचरज पैदा करता है। क्या आईएमए सिर्फ डॉक्टरों के प्रति जिम्मेवार है, क्या उसकी मरीजों के प्रति कोई जिम्मेदारी नहीं है! आईएमए को यह नहीं भूलना चाहिए की आपको व आपके डॉक्टर को भगवान बनाने वाले मरीज ही हैं। अतः आईएमए को मरीज के प्रति अपनी जिम्मेदारी सुनिश्चित करते हुए दोषी डॉक्टरों-अधिकारियों को बचाने का प्रयास नहीं करना चाहिए! संपादक

मरीजों के साथ न्याय की बात करें आईएमए
मरीजों के साथ न्याय की बात करें आईएमए

एसबीए टीम
रायपुर। बिलासपुर नसबंदी कांड के बाद चिकित्सकों के खिलाफ की गई कार्रवाई के विरोध में आईएमए सड़क पर उतर आया है। आईएमए का कहना है, यदि सरकार इसके लिए डॉक्टर्स से माफी नहीं मांगेगी, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे। इसे लेकर आईएमए रविवार को बैठक लिया। बैठक के बाद आईएमए का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मिला और मामले में निलंबित डॉक्टर गुप्ता का निलंबन वापस लेने की मांग की। ज्ञात हो कि नसबंदी प्रकरण में प्रारंभिक कार्रवाई करते हुए शासन ने चिकित्सकों के विरुद्ध कार्रवाई की, जिसमें सर्जन डॉ. आरके गुप्ता को बर्खास्त कर दिया गया। आईएमए ने इसके विरोध में शनिवार को आंबेडकर अस्पताल से विशाल रैली निकाली, जो कलेक्टोरेट कार्यालय में जाकर समाप्त हुई। इस दौरान कलेक्टर के नाम मुख्यमंत्री को पत्र दिया गया है। विरोध प्रदर्शन में 150 से 200 चिकित्सक शामिल हुए और सरकार के फैसले पर आपत्ति दर्ज कराई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार चिकित्सक  को  प्रकरण में बिना किसी पुख्ता सबूत और जांच किए ही फंसा रही है। यह सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का उल्लंघन है।
कलेक्टोरेट में हंगामा करने के बाद आवेदन लेने पहुंचे अफसर आईएमए को ज्ञापन देने में भी मशक्कत करनी पड़ी। शनिवार होने की वजह से कलेक्टोरेट कार्यालय में छुट्टी का माहौल था। जब डॉक्टर्स प्रदर्शन करते हुए परिसर में दाखिल हुए, तो उनकी समस्या सुनने और मांगपत्र लेने के लिए कोई भी जिम्मेदार अफसर कार्यालय में दिखाई नहीं दिया। इसके बाद चिकित्सकों ने शासन के विरुद्ध नारेबाजी शुरू कर दी। हंगामा बढ़ता देख विभाग के अफसरों को किसी ने सूचना दी। इसके बाद कहीं जाकर आईएमए का ज्ञापन लिया गया। आईएमए से जुड़े करीब 200 हॉस्पिटल में आज ओपीडी और रूटीन में मरीजों की जांच नहीं की गई। इसके कारण सरकारी अस्पतालों में मरीजों की भीड़ में इजाफा हुआ। जिला और आंबेडकर अस्पताल में शनिवार को मेडिसिन ओपीडी में मरीजों की सर्वाधिक भीड़ नजर आई। आईएमए से संबंधित सभी अस्पतालों में शनिवार को केवल आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को ही संचालित किया गया।
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