न्यू (स्वस्थ भारत मीडिया)। बच्चों में सिकल सेल बीमारी को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने बच्चों और बच्चों में सिकल सेल बीमारी के इलाज के लिए नए पौधे और बेहतर औषधियों के मसाले बढ़ाने की दिशा में कदम तेज किए हैं। इस बीमारी के साथ जन्म लेने वाले हर 6 बच्चों में से एक का जन्म भारत में होता है। उप-सहारा अफ्रीका में तो सिकल सेल के करीब 80 प्रतिशत मामले हैं, इसलिए यहां इलाज और दवाओं की पहुंच बेहद जरूरी है। अलग-अलग हो सकता है कि 2021 में पांच साल से कम उम्र में करीब 81 हजार बच्चों की मौत हो गई। वैसे तो इसकी दवाइयां उपलब्ध हैं, लेकिन हर बच्चे तक इन तक पहुंचना अब भी बड़ी समस्या है।
हाइड्रॉक्सीयूरिया औषधि पर फोकस
इसी साल मई में 19 साल तक के बच्चों और व्यापारियों में सिकल सेल बीमारी के निदान, अवसाद और इलाज के लिए पहली बार विशेष रूप से ग्लोबल स्टॉक मार्केट जारी किया गया। इसमें सात प्रमुख क्षेत्रों के अंतर्गत 15 भिक्षुओं को शामिल किया गया है। इनमें से हाइड्रॉक्सीयूरिया (हाइड्रोक्सीयूरिया) दवा का उपयोग महत्वपूर्ण है। उन्होंने इस दवा के इस्तेमाल की मजबूती की सलाह देते हुए कहा है कि यह गंभीर बीमारी से होने वाली गंभीर जटिलताओं को कम करने में मदद कर सकती है। उनका कहना है कि केवल प्रभावशाली औषधि उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है। दवा ऐसी भी होनी चाहिए जो छोटे बच्चों को आसानी से ले जाए और आवश्यक मात्रा में आसानी से हो जाए। इसी उद्देश्य से सितंबर 2025 में पीडियाट्रिक फॉर्मूलेशन (जीआईपी-एफ) के लिए मैकेनिकल एक्सेलेरेटर ने सिकल सेल के लिए पहली पेडियाट्रिक फैक्ट्री फार्मास्युटिकल प्रैक्टिस शुरू की। इसमें विशेषज्ञ ने बच्चों के लिए आवश्यक औषधियां और उनके सर्वोत्तम सिद्धांतों की पहचान बताई है। हाइड्रॉक्सीयूरिया को संस्थागत वाली औषधि माना जाता है।
आसानी से दी जा सकने वाली दवा
दयानिधि की रिपोर्ट के मुताबिक इस साल जुलाई में बच्चों के लिए हाइड्रॉक्सीयूरिया की दवा का प्रोडक्शन प्रोडक्ट प्रोफाइल जारी किया गया। इसमें बताया गया है कि बच्चों के लिए दवा किस तरह की होनी चाहिए। इसमें सही मात्रा देना आसान हो, वजन के अनुसार खुराक बदली जा सके और छोटे बच्चों की दवा आसानी से आसानी से ली जा सके, इस पर ज़ोर दिया गया है। ऐसी दवा पर भी जोर दिया गया है जो कि प्रतिबंधित देशों में सुरक्षित तरीके से बेचा और इस्तेमाल किया जा सकता है। दवा की गुणवत्ता, स्थिरता, स्थिरता और कीमत को भी महत्वपूर्ण माना गया है। कॉक ने सिकल सेल की दवाओं के लिए पहली बार प्रीक्वाल एसेसरीज एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट भी जारी किया है। इसका उद्देश्य ऐसी औषधियों के विकास और दृश्यों को बढ़ावा देना है, गुणवत्ता सुनिश्चित हो। इसमें सबसे पहले बच्चों के लिए 500 अल्कोहल की हाइड्रॉक्सीयूरिया कैप्सूल भी शामिल हैं। दवा बनाने वाली कंपनी से इस प्रक्रिया में भाग लेने की अपील की जाती है।
समान स्वास्थ्य सुविधा की आवश्यकता है
सिकल सेल बीमारी से लड़ाई में सबसे बड़ी जरूरत समान स्वास्थ्य सुविधा की है। अफ़्रीका में निम्न और मध्यम आय वाले कई देशों में आज भी बीमारी की शीघ्र पहचान, नियमित उपचार और आवश्यक औषधियों तक पहुँच सीमित है। अचूक का लक्ष्य है कि किसी बच्चे का जन्म किस देश या क्षेत्र में हुआ है, यह उसका इलाज पाने की संभावना तय नहीं है। नई फ़्लोरिडा, बच्चों के लिए उपयुक्त औषधियाँ और गुणवत्तापूर्ण सुरक्षा करने की पहल, ऑर्गनाइज़ेशन सिकल सेल बीमारी से होने वाली के माध्यम से, मच्छरों को कम करना चाहती है। विशेषज्ञ के अनुसार अगर समय पर बीमारी की पहचान हो, देखभाल मिले और हाइड्रॉक्सीयूरिया जैसी प्रभावी दवा बच्चों तक नियमित रूप से पहुंचे, तो सिकल सेल बीमारी की गंभीर जटिलताओं को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
व्यावसायिक बीमारी
जानकारी हो कि सिकल सेल एक आनुवांशिक बीमारी है जिसमें शरीर में बनने वाली लाल रक्त कोशिकाओं का आकार सामान्य नहीं रहता है। वे मुड़कर हंसिए या दरांती जैसे शीर्ष पर ले जा सकते हैं। ऐसी विचित्र छोटी रक्त नलिकाओं में फॉल्कन रक्त के प्रवाह को रोका जा सकता है। इसके कारण बच्चों को तेज दर्द, खून की कमी, सूजन, फेफड़े से जुड़ी गंभीर परेशानियां और स्ट्रोक जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। बीमारी गंभीर होने पर बच्चे की जान भी जा सकती है। इसलिए समय पर बीमारी की पहचान और नियमित इलाज बेहद जरूरी है।
