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'क्रॉसपथी' रोक सकती है इंडिया का मेडिकल टूरिज्म

हाल ही में स्वास्थ्य मंत्रालय ने मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) एक्ट में बदलाव की बात की जिसके तहत आयुर्वेदिक और होम्योपथी डॉक्टर भी एमटीपी कर पाएंगे। पिछले कुछ समय में महाराष्ट्र समेत भारत में कई क्षेत्रों में आयुर्वेदिक और होम्योपथिक डॉक्टरों को अलोपथी करने की परमिशन देने की बात हुई है। लेकिन राज्य और केंद्र सरकार द्वारा ‘क्रॉसपथी’ करने की इजाजत देने का फैसला, भारत के मेडिकल टूरिज्म के लिए मुसीबत खड़ी कर सकता है। दुनिया भर में अस्पतालों को मान्यता देने वाली संस्थ्ज्ञा, जॉइंट कमिशन इंटरनैशनल (जेसीआई) ने भारत में क्रॉसपथी की इजाजत देने वाले अस्पतालों को अपनी मान्यता देने से मना कर दिया है। जेसीआई के इस फैसले से भारत में मेडिकल टूरिज्म की रफ्तार पर ब्रेक लग सकता है।
क्रॉसपैथी: नहीं है सही

फोट क्रेडिट chicagolandhomeopathy.com
फोट क्रेडिट chicagolandhomeopathy.com

जेसीआई की अध्यक्ष और चीफ एग्जेक्युटिव, पॉला विलसन ने मुंबई में आयोजित एक हेल्थ सेमिनार में यह बताया कि भारत में कई मामलों में आयुर्वेदिक या होम्योपथिक डॉक्टरों को, एक डिप्लोमा या किसी छोटे कोर्स के बाद अलोपथी में प्रैक्टिस किए जाने की जो बात हो रही है, जेसीआई उसे मान्यता नहीं देगा। इंडियन मेडिकल असोसिएशन के सेक्रेटरी जनरल, डॉ़  के.के अग्रवाल ने बताया कि जेसीआई के इस फैसला का बहुत ही बुरा असर हो सकता है।
जेसीआई, अंतराष्ट्रीय स्तर पर मरीजों की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए और अस्पतालों को मान्यता देने वाली सबसे बड़ी संस्था है। डॉ़ अग्रवाल ने बताया कि जेसीआई ने यह फैसला मरीजों की सुरक्षा और वैश्विक स्तर पर स्थापित किए स्वास्थ्य सेवाओं के मानकों के आधार पर लिया है। जेसीआई का मानना है कि सिर्फ 6 महीने या साल भर के किसी डिप्लोमा या ट्रेनिंग के आधार पर एक पद्धति में डॉक्टरी करने वाले व्यक्ति को दूसरी पद्धति में प्रैक्टिस करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। डॉ़ अग्रवाल का कहना है कि जेसीआई के इस फैसले से भारत में आने वाले विदेशी मरीजों के आने में काफी ज्यादा नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि विदेशी लोगों के लिए जेसीआई की मान्यता बहुत मायने रखती है।

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