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Neurological diseases : हर साल 1.1 करोड़ लोगों की मौत-WHO

Neurological diseases : हर साल 1.1 करोड़ लोगों की मौत-WHO

नयी दिल्ली। दिमाग सिर्फ सोचने का काम नहीं करता, यह पूरे शरीर का कंट्रोल रूम होता है। सांस लेने से लेकर चलने तक और यादें संजोने से लेकर रिकवरी के लिए शरीर को नींद में लाने तक, शरीर का हर फंक्शन इसी अंग पर निर्भर करता है। अगर दिमाग ठीक से काम न करे, तो जिंदगी आसान नहीं होगी। लेकिन यह जानकर हैरानी होगी कि WHO की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया की एक बहुत बड़ी आबादी इन दिनों न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से गुजर रही है। यही नहीं, न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के कारण हर साल 1.1 करोड़ लोग अपनी जान गंवा देते हैं। ये संख्या बहुत बड़ी है इसलिए चिंता का विषय है।

Neurological diseases: 40 फीसद आबादी रोगग्रस्त

Neurological diseases : WHO की इस रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया की लगभग 40 फीसद आबादी यानी करीब 3.3 अरब लोग किसी न किसी न्यूरोलॉजिकल बीमारी से प्रभावित हैं। यह साल 2021 से 2023 के बीच सबसे तेजी से बढ़ने वाली बीमारी समूहों में शामिल हो चुका है। इन बीमारियों में स्ट्रोक, डिमेंशिया, अल्जाइमर, मिर्गी (Epilepsy), माइग्रेन आदि शामिल हैं। सिर्फ स्ट्रोक ही विश्व स्तर पर मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण बन चुका है। डिमेंशिया बुजुर्गों में डिसेबिलिटी का प्रमुख कारण है। वहीं माइग्रेन अब दुनिया में कामकाजी अक्षमता का बड़ा कारण बन चुका है।

न्यूरोलॉजिकल हेल्थ केयर की कमी

Neurological diseases : रिपोर्ट बताती है कि दुनिया में इस समय न्यूरोलॉजिकल हेल्थ केयर की भारी कमी है। आंकड़े चिंताजनक हैं। कम आय वाले देशों में अमीर देशों की तुलना में न्यूरोलॉजिस्ट (मस्तिष्क रोग विशेषज्ञ) की संख्या 80 गुना से भी कम है, जबकि इन देशों में दिमाग से जुड़ी बीमारियों का बोझ बहुत अधिक है। WHO का साफ कहना है कि दुनिया मानसिक बीमारियों के बोझ को समझ ही नहीं पा रही है और इसे लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।

Neurological diseases: इलाज के साथ पुनर्वास भी जरूरी

Neurological diseases : WHO ने यह भी बताया कि न्यूरोलॉजिकल बीमारी का इलाज सिर्फ दवा नहीं होता। इसके लिए कई तरह की थेरेपीज, पुनर्वास, मानसिक सहयोग और परिवार का साथ आदि भी जरूरी है। लेकिन दुनिया की स्वास्थ्य नीतियां अब भी इसे Short-term इलाज की तरह देखती है। यही कारण है कि लाखों परिवार आर्थिक और भावनात्मक संकट में घिर जाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार बढ़ते मामलों के पीछे कई वजहें हैं, जैसे- बढ़ती उम्र के साथ न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का बढ़ना, स्ट्रोक और डिमेंशिया का बढ़ता खतरा, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों से नसों को होने वाला नुकसान, प्रदूषण और स्मोकिंग जैसे पर्यावरणीय कारण, सिर और रीढ़ की चोटों में वृद्धि, हेल्थ सिस्टम की कमी से देर से इलाज आदि।

Neurological diseases : WHO की अपील

Neurological diseases : WHO ने दुनिया के सभी देशों से अपील की है कि वो राष्ट्रीय न्यूरोलॉजी नीति बनाएं। साथ ही सस्ती और सुलभ न्यूरोलॉजी सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाई जाए।। इसके अलावा डायग्नोसिस और ट्रीटमेंट सेंटर्स की संख्या बढ़े और पुनर्वास और सामुदायिक सहायता को स्वास्थ्य योजना में जोड़ा जाए। WHO ने चेतावनी भी दी है कि अगर अभी भी देरी हुई, तो अगला वैश्विक स्वास्थ्य संकट न्यूरोलॉजी के क्षेत्र से आएगा।

साभार

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