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भारतीय फार्माकोपिया आयोग को WHO की मान्यता

भारतीय फार्माकोपिया आयोग को WHO की मान्यता

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। भारतीय फार्माकोपिया आयोग (IPC) को नेपाल के काठमांडू में आयोजित दक्षिण-पूर्व एशिया नियामक नेटवर्क (SEARN) की बैठक में WHO-SEARN क्षेत्रीय फार्माकोविजिलेंस उत्कृष्टता केंद्र और गुणवत्ता तकनीकी केंद्र के रूप में मान्यता मिली। यह प्रतिष्ठित मान्यता डब्ल्यूएचओ दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में फार्माकोविजिलेंस प्रणालियों को मजबूत करने, फार्मास्युटिकल गुणवत्ता मानकों को आगे बढ़ाने और नियामक क्षमता निर्माण में आईपीसी के निरंतर योगदान को स्वीकार करती है। यह पदनाम फार्माकोपियल विज्ञान और मानकों में एक अग्रणी के रूप में आईपीसी की भूमिका और सदस्य देशों के बीच सहयोग, ज्ञान साझाकरण और सामंजस्य को बढ़ावा देने की इसकी प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है।

10वीं वर्षगांठ पर तोहफा

यह बैठक वैज्ञानिक ज्ञान के आदान-प्रदान, नियामकीय अनुभवों को साझा करने और गुणवत्ता आश्वासन, सुरक्षा, नियामकीय निर्भरता, डिजिटल परिवर्तन और क्षेत्रीय सहयोग सहित फार्मास्युटिकल विनियमन में उभरती चुनौतियों पर चर्चा करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुई। आईपीसी ने दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में नियामकीय प्रणालियों को मजबूत करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणामों में सुधार लाने वाली सहयोगी पहलों का समर्थन करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। आईपीसी डब्ल्यूएचओ एसईआरएएन की पहलों का समर्थन करने, नियामक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने और दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के लोगों के लिए सुरक्षित, प्रभावी और गुणवत्ता-सुनिश्चित चिकित्सा उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस बैठक में दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के राष्ट्रीय नियामक प्राधिकरणों (एनआरए), फार्माकोपिया और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में क्षेत्रीय सहयोग के एक दशक पूरे होने का जश्न मनाने के साथ-साथ चिकित्सीय उत्पादों की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावकारिता सुनिश्चित करने के लिए नियामक प्रणालियों को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

दवा गुणवत्ता पर फोकस

एसईएआरएन विश्व स्वास्थ्य संगठन के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्यालय (SEARO) द्वारा सदस्य देशों में नियामक प्रणालियों को सुदृढ़ करने के लिए स्थापित एक सहयोगात्मक मंच है। 2016 में अपनी स्थापना के बाद से एसईएआरएन ने ज्ञान साझा करने, नियामक प्रक्रियाओं में सामंजस्य, क्षमता निर्माण और नियामक निर्भरता तंत्र के माध्यम से राष्ट्रीय नियामक प्राधिकरणों के बीच सहयोग को बढ़ावा दिया है। यह नेटवर्क गुणवत्ता आश्वासन, फार्माकोविजिलेंस, क्लिनिकल परीक्षणों की निगरानी, नियामक तैयारियों और चिकित्सा उपकरणों के नियमन जैसे प्रमुख नियामक कार्यों पर केंद्रित विषयगत कार्य समूहों के माध्यम से संचालित होता है। इसका साझा उद्देश्य पूरे क्षेत्र में सुरक्षित, प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा उत्पादों की उपलब्धता में सुधार करना है। आईपीसी प्रतिनिधिमंडल में सचिव-सह-वैज्ञानिक निदेशक डॉ. वी. कलैसेल्वन, वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. जय प्रकाश, वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. रॉबिन कुमार और वैज्ञानिक अधिकारी अरविंद कुमार शर्मा शामिल थे।

भारत की प्रतिबद्धता जाहिर

बैठक के दौरान आईपीसी ने दवा नियामक प्रणाली को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामंजस्यपूर्ण मानकों के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण दवाओं की उपलब्धता को बढ़ावा देने के लिए भारत की निरंतर प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय फार्माकोपिया के विकास और प्रकाशन, भारतीय फार्माकोपिया संदर्भ पदार्थ (IPRS) और अशुद्धि संदर्भ मानकों (IMPRS) की स्थापना, भारत के फार्माकोविजिलेंस कार्यक्रम (PVPI) और भारत के मैटेरियोविजिलेंस कार्यक्रम (MVPI) के तहत फार्माकोविजिलेंस एवं मैटेरियोविजिलेंस गतिविधियों, क्षमता निर्माण कार्यक्रमों तथा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय हितधारकों के साथ सहयोगात्मक प्रयासों में आईपीसी की प्रमुख पहलों को प्रस्तुत किया।

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