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भारत भविष्योन्मुखी स्वास्थ्य सेवा के चरण में: डॉ. जितेंद्र सिंह

भारत भविष्योन्मुखी स्वास्थ्य सेवा के चरण में: डॉ. जितेंद्र सिंह

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। आनुवंशिक और दुर्लभ रोगों से निपटने में पहले रोगों की प्रारंभिक पहचान करने और किफायतीपन दो सबसे बड़ी चुनौतियाँ रही हैं। लेकिन अब जीनोमिक्स, जैव प्रौद्योगिकी और निवारक स्वास्थ्य सेवा के माध्यम से जटिल स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना करने के लिए वैज्ञानिक और आर्थिक रूप से देश सक्षम है। यह बात विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने हैदराबाद में कही। वे डीबीटी-ब्रिक डीएनए फिंगरप्रिंटिंग एंड डायग्नोस्टिक्स सेंटर (CDFD) के अपने दौरे के दौरान बोल रहे थे। उन्होंने नेशनल स्किल डेवलपमेंट सेंटर, समर्थ का शिलान्यास और आईडिया-एनए ब्रिक-सीडीएफडी टेक्नोलॉजी इंक्यूबेटर का भी उद्घाटन किया।

स्वास्थ्य को मिली प्राथमिकता

डॉ. सिंह ने कहा कि पूर्व के दशकों में भारत मुख्य रूप से संक्रामक रोगों से जूझ रहा था, पर अब देश स्वास्थ्य रक्षा के भविष्योन्मुखी चरण में प्रवेश कर चुका है जहाँ आणविक निदान, जीनोम सीक्वेंसिंग और व्यक्तिगत चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा का केंद्र बन रही हैं। उन्होंने नोट किया कि CDFD जैसे संस्थान प्रयोगशाला अनुसंधान के वास्तविक जीवन की नैदानिक परिणामों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सरकार की नीतिगत दिशा को रेखांकित करते हुए मंत्री ने कहा कि जैव प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य को अभूतपूर्व प्राथमिकता मिली है। उन्होंने प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस संबोधन के दौरान बायो-ई3 नीति की घोषणा का स्मरण किया, जिसे उन्होंने देश भर के वैज्ञानिकों, स्टार्टअप्स और युवा नवोन्मेषकों में व्यापक रुचि जगाने वाले उत्प्रेरक के रूप में वर्णित किया। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत जीनोमिक्स-नेतृत्व वाले प्रयासों में तेजी से प्रगति कर रहा है जिसमें बड़े पैमाने पर जीनोम सीक्वेंसिंग, बाल चिकित्सा आनुवंशिक रोग कार्यक्रम और हेमोफीलिया जैसे क्षेत्रों में अग्रणी कार्य शामिल हैं।

स्वास्थ्य: दुर्लभ रोगों पर भी फोकस

उन्होंने कहा कि ये प्रयास स्वास्थ्य प्रणाली को व्यक्तिगत उपचार के युग के लिए तैयार कर रहे हैं जहाँ समान स्थितियों वाले रोगी अलग-अलग चिकित्सकीय दृष्टिकोणों की आवश्यकता रख सकते हैं। दुर्लभ रोगों के मुद्दे का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि 2021 में भारत की पहली राष्ट्रीय दुर्लभ रोग नीति का परिचय सरकार के दृष्टिकोण में बड़ा बदलाव था। उन्होंने जोर दिया कि पहचान केवल पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रभावित परिवारों के लिए निरंतर उपचार को भी किफायती बनाना चाहिए। मंत्री ने सरकार द्वारा प्रोत्साहित एकीकृत स्वास्थ्य मॉडल के बारे में भी बात की जिसमें आयुष मंत्रालय के माध्यम से पारंपरिक प्रणालियों का संस्थाकरण और योग को निवारक स्वास्थ्य उपकरण के रूप में वैश्विक मान्यता शामिल है। उन्होंने कहा कि कल्याणकारी प्रथाओं का आधुनिक चिकित्सा के साथ साक्ष्य-आधारित एकीकरण जीवनशैली और चयापचय विकारों के प्रबंधन में सकारात्मक परिणाम दिखा चुका है।

स्वास्थ्य: अनुसंधानों की समीक्षा

अपने दौरे के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने सीडीएफडी में चल रहे अनुसंधान और नवाचार गतिविधियों की समीक्षा की और जीनोम सीक्वेंसिंग कार्यक्रमों तथा जन जागरूकता के उद्देश्य से आउटरीच प्रयासों जैसे पहल की सराहना की। मंत्री ने कहा कि विज्ञान को नागरिकों, विशेष रूप से युवाओं के लिए सुलभ भाषा में संप्रेषित करना जैव प्रौद्योगिकी में विश्वास और रुचि निर्माण के लिए आवश्यक है। भारत की बढ़ती जैव-आर्थिक स्थिति को रेखांकित करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि वर्षों में बायोटेक स्टार्टअप्स की संख्या कई गुना बढ़ गई है जबकि इस क्षेत्र का अर्थव्यवस्था में योगदान भी तेजी से बढ़ा बढ़ा है। उन्होंने जोड़ा कि बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च एंड इनोवेशन काउंसिल (ब्रिक) के गठन ने संस्थानों के बीच समन्वय को मजबूत किया है जिससे उच्च प्रभाव वाले अनुसंधान और उद्योग सहयोग को बढ़ावा मिला है।

स्वास्थ्य: ग्लोबल भूमिका भी

मंत्री ने टीकों और निवारक स्वास्थ्य सेवा में भारत के नेतृत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि स्वदेशी नवाचार अब राष्ट्रीय स्तर पर तैनात किए जा रहे हैं और वैश्विक रूप से साझा किए जा रहे हैं, जो देश की वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा में भूमिका को मजबूत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत की लगभग 70 प्रतिशत आबादी 40 वर्ष से कम आयु की होने के साथ प्रारंभिक निदान और रोकथाम के माध्यम से स्वास्थ्य में निवेश एक राष्ट्रीय अनिवार्यता है। उन्होंने सीडीएफडी पर हो रहे कार्य पर संतुष्टि व्यक्त की और कहा कि ऐसे संस्थान एक स्वस्थ, मजबूत और भविष्य के लिए तैयार भारत का निर्माण करने में सार्थक योगदान दे रहे हैं।

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