‘एक राष्ट्र, एक पाठ्यक्रम’ के तहत स्वास्थ्य सेवा पाठ्यक्रमों में एकरूपता लाने के लिए यूजीसी की अधिसूचना जारी
नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय देश के लिए कुशल, सक्षम और भविष्य के लिए तैयार स्वास्थ्य सेवा कार्यबल के निर्माण हेतु संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा व्यवसायों की शिक्षा, प्रशिक्षण और व्यावसायिक मानकों को सुदृढ़ कर रहा है। इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने राष्ट्रीय संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा आयोग (NCAHP) के नियामक दायरे में 33 नए तथा 21 पुनर्गठित/अद्यतन संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा अवर स्नातक (UG) एवं स्नातकोत्तर (PG) डिग्री पाठ्यक्रमों को अधिसूचित किया है। यह राजपत्र अधिसूचना 31 अगस्त, 2026 को प्रकाशित हुई थी जो देश भर में संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा शिक्षा में अधिक एकरूपता लाने और इन महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवा विषयों में शैक्षणिक और व्यावसायिक मार्गों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
ये हैं प्रभावित कोर्स
अधिसूचित डिग्रियों में फिजियोथेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी, ऑप्टोमेट्री, मेडिकल लेबोरेटरी साइंसेज, इमरजेंसी मेडिकल टेक्नोलॉजी, एनेस्थीसिया और ऑपरेशन थिएटर टेक्नोलॉजी, न्यूट्रिशन और डायटेटिक्स, साइकोलॉजी, मेडिकल और सोशल साइकियाट्रिक सोशल वर्क, मेडिकल रेडियोलॉजी, इमेजिंग और थेरेप्यूटिक टेक्नोलॉजी, फिजिशियन एसोसिएट, रेस्पिरेटरी टेक्नोलॉजी, डायलिसिस थेरेपी टेक्नोलॉजी और हेल्थ इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट आदि विषय शामिल हैं। अधिसूचना में डिग्री का नामकरण, संक्षिप्त नाम, अवधि और प्रवेश योग्यता निर्दिष्ट की गई है, जबकि कुछ चयनित कार्यक्रमों के लिए पाठ्यक्रम की अवधि में भी संशोधन किया गया है। इस अधिसूचना में विशेषज्ञता-आधारित डिग्रियों का भी प्रावधान है, जिनमें मास्टर ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरेपी में नौ, मास्टर ऑफ फिजियोथेरेपी में आठ, मास्टर ऑफ मेडिकल लेबोरेटरी साइंसेज में चार, मास्टर ऑफ मेडिकल रेडियोलॉजी एंड इमेजिंग टेक्नोलॉजी में तीन और मास्टर ऑफ रेस्पिरेटरी टेक्नोलॉजी में दो विशेषज्ञताएं शामिल हैं। इससे छात्रों के लिए शैक्षणिक अवसर बढ़ेंगे और विश्वविद्यालय स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र की बदलती जरूरतों के अनुरूप विशेष कार्यक्रम पेश कर सकेंगे।
एकसमान राष्ट्रीय मानक
इस सुधार का उद्देश्य संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा शिक्षा में संस्थागत समानता और एकसमान राष्ट्रीय मानक स्थापित करना है। साथ ही, डिग्री के नामकरण को विश्व स्तर पर स्वीकृत डिग्री-स्तरीय योग्यताओं के अनुरूप बनाना है। इससे छात्रों को इन व्यवसायों को अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिलने, स्पष्ट शैक्षणिक और कैरियर मार्ग उपलब्ध होने और भारतीय संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों की गतिशीलता और अंतर्राष्ट्रीय मान्यता में वृद्धि होने की उम्मीद है। एनसीएएचपी ने देश भर में पाठ्यक्रम और डिग्री नामकरण को मानकीकृत करने के उद्देश्य से 28 व्यवसायों को कवर करने वाले 18 योग्यता-आधारित पाठ्यक्रम पहले ही जारी कर दिए हैं। योग्यता-आधारित पाठ्यक्रम अस्पतालों या संबद्ध चिकित्सा सुविधा केंद्रों में पर्याप्त अवधि की इंटर्नशिप के माध्यम से व्यावहारिक नैदानिक प्रशिक्षण पर विशेष बल देते हैं। इस दृष्टिकोण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्रों में प्रभावी स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए आवश्यक व्यावहारिक कौशल, व्यावसायिक योग्यताएं और नैदानिक अनुभव विकसित हों।
चालू सत्र से ही लागू
सुधारों को सुचारू रूप से लागू करने के लिए, एनसीएएचपी ने शैक्षणिक वर्ष शुरू होने से काफी पहले ही सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और अन्य संबंधित हितधारकों को निर्देश जारी कर दिया है कि वे 2026-27 शैक्षणिक वर्ष से जारी पाठ्यक्रम को अनिवार्य रूप से लागू करें, जिसमें डिप्लोमा इन मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलॉजी (डीएमएलटी) पाठ्यक्रम शुरू करने का विकल्प भी शामिल है। आयोग शेष योग्यता-आधारित पाठ्यक्रमों को अंतिम रूप देने की दिशा में भी काम कर रहा है ताकि उन्हें अगले शैक्षणिक वर्ष से लागू किया जा सके। इन उपायों से प्रशिक्षित और योग्य संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा कर्मचारियों की उपलब्धता मजबूत होने की उम्मीद है, जो बहुविषयक स्वास्थ्य सेवा वितरण का एक अनिवार्य घटक है। ये सुधार छात्रों, शैक्षणिक संस्थानों और स्वास्थ्य सेवा प्रतिष्ठानों के लिए अधिक स्पष्टता और एकरूपता प्रदान करेंगे, साथ ही व्यावसायिक विकास और गतिशीलता के बेहतर अवसर भी सृजित करेंगे।
