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स्वदेशी HPV वैक्सीन Cervavac को WHO से प्रीक्वालिफिकेशन

स्वदेशी HPV वैक्सीन Cervavac को WHO से प्रीक्वालिफिकेशन

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। भारत की पहली स्वदेशी HPV वैक्सीन, सर्वावैक को WHO से प्रीक्वालिफिकेशन मिल गया, जिससे यह UN एजेंसियों द्वारा खरीदने के लिए योग्य हो गई। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा बनाई गई सर्वावैक एक जेंडर-न्यूट्रल वैक्सीन है जिसे लड़के और लड़कियों दोनों को दिया जा सकता है। यह चार HPV टाइप—6, 11, 16 और 18 को लक्ष्य करती है और इसे नौ से 26 साल के लोगों को दिया जा सकता है।

चारो टाइप के लिए उपयोगी

HPV टाइप 6 और 11 को कम रिस्क वाला माना जाता है और ये मुख्य रूप से जेनिटल वार्ट्स से जुड़े होते हैं, जबकि टाइप 16 और 18 कई तरह के कैंसर से जुड़े हाई-रिस्क स्ट्रेन हैं। महिलाओं में यह वैक्सीन सर्वाइकल, वल्वर, वैजाइनल और एनल कैंसर को रोकने में मदद करती है, जबकि पुरुषों में यह HPV टाइप 16 और 18 से जुड़े एनल कैंसर को रोकने में मदद करती है। ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ़ इंडिया (DCGI) ने पहले सर्वावैक को भारत में इस्तेमाल के लिए मंज़ूरी दी थी। WHO से प्रीक्वालिफिकेशन मिलने के बाद, यह वैक्सीन अब UN एजेंसियों द्वारा खरीदने के लिए भी योग्य हो गई। सीरम इंस्टीट्यूट के अनुसार नौ से 14 साल के बच्चों को छह महीने के अंतर पर दो डोज़ लगनी चाहिए। 15 से 26 साल के बच्चों को तीन डोज़ लगनी चाहिए, पहली और दूसरी डोज़ के बीच दो महीने का गैप और दूसरी और तीसरी डोज़ के बीच छह महीने का गैप होना चाहिए। तीनों डोज़ एक साल के अंदर लग जानी चाहिए। वैक्सीन सीधे ब्लड वेसल में नहीं, बल्कि मसल में दी जाती है।

निर्माता सीरम ने दी जानकारी

सीरम इंस्टीट्यूट के CEO अदार पूनावाला ने एक प्रेस रिलीज़ में कहा कि HPV के लिए ग्लोबल स्वीकार्यता को मज़बूत करने में WHO का प्रीक्वालिफिकेशन एक ज़रूरी कदम था। उन्होंने कहा, “यह माइलस्टोन वैक्सीन के असर को दिखाता है और देशों को HPV से जुड़े खतरों को रोकने का मौका देता है।” रिलीज़ में कहा गया है कि Cervavac की हर 0.5ml डोज़ में प्रोटीन होते हैं जो चार टारगेटेड HPV टाइप के खिलाफ इम्यून रिस्पॉन्स बनाने में मदद करते हैं। यह वैक्सीन Hansenula polymorpha स्ट्रेन का इस्तेमाल करके बनाई गई है। सर्वावैक को सीरम इंस्टीट्यूट ने बायोटेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट, बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल (BIRAC), WHO की इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) और गेट्स फाउंडेशन के साथ मिलकर बनाया है।

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