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 अक्षय कुमार ने ‘स्वच्छ भारत’ के लिए विज्ञापन अभियान लांच किया

दोहरे गड्ढों वाली शौचालय प्रौद्योगिकी का आविष्कार भारत में किया गया था और यह ग्रामीण भारत के लिए सबसे उपयुक्त शौचालय तकनीक है 
नई दिल्ली/27.5.2018

जाने-माने फि‍ल्‍म अभिनेता  अक्षय कुमार ने आज राजधानी में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के लिए एक विज्ञापन अभियान लांच किया। राजधानी में आयोजित ‘शौचालय प्रौद्योगिकी के लिए कलक्टर्स कन्वेंशन’ में यह अभियान शुरू किया गया। यह अभियान  ग्रामीण भारत में दोहरे गड्ढों वाली शौचालय प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने पर केंद्रित है और इस विज्ञापन में श्री कुमार के साथ-साथ अभिनेत्री सुश्री भूमि पेडनेकर भी शामिल हैं।
गांवों में दिखाई जायेगी ट्वालेट एक प्रेम कथा 
अपने स्वागत भाषण में पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय में सचिव श्री परमेश्‍वरन अय्यर ने श्री अक्षय कुमार द्वारा स्वच्छ भारत मिशन में किए गए उल्‍लेखनीय योगदान का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अपनी फिल्म  ‘टॉयलेट एक प्रेम कथा’, जो पूरे देश में ग्रामीण एवं शहरी लोगों द्वारा देखी और खूब सराही गई, से लेकर स्वच्छ भारत मिशन के लिए दोहरे गड्ढों वाले शौचालय के विज्ञापन अभियान में अपनी भागीदारी तक के जरिए श्री कुमार देश में काफी जोर पकड़ रहे स्वच्छता आंदोलन के एक मजबूत समर्थक रहे हैं।
इस अवसर पर श्री अक्षय कुमार ने स्वच्छ भारत मिशन से जुड़े पदाधिकारियों, जिला कलक्टरों, संचार विशेषज्ञों और मीडियाकर्मियों से बातचीत की। अपनी बातचीत के दौरान उन्होंने समाज के प्रभावशाली लोगों से शौचालयों के साथ-साथ देश भर में खाली शौचालय गड्ढे के बारे में खुलकर बात करने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया, ताकि परिवार के सदस्यों द्वारा स्वयं ही शौचालय की सफाई करने का उपहास उड़ाने की प्रवृत्ति को खत्‍म किया जा सके।
इस अवसर पर पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय ने यह भी घोषणा की कि ‘टॉयलेट एक प्रेम कथा’ फि‍ल्‍म के निर्माता ने स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की सभी राज्य और जिला टीमों को यह अधिकार दे दिया है कि वे गैर-वाणिज्यिक आधार पर इस फि‍ल्‍म को गांवों में दिखा सकते हैं।
दोहरे गड्ढों वाले शौचालय मॉडल भारत के लिए है उपयुक्त
गौरतलब है कि दोहरे गड्ढों वाली शौचालय प्रौद्योगिकी का आविष्कार भारत में किया गया था और यह ग्रामीण भारत के लिए सबसे उपयुक्त शौचालय तकनीक है। भारत सरकार और विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा इसकी सिफारिश की जाती रही है। यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध हो चुका है कि:
1.     मानक दोहरे गड्ढों वाले शौचालय मॉडल में एक गड्ढा 6 सदस्‍यों वाले परिवार द्वारा उपयोग करने पर मोटे तौर पर 5 वर्षों में भर जाता है
2.     अपशिष्ट को इसके बाद दूसरे गड्ढे में आसानी से डाला जा सकता है
3.     6 माह से लेकर 1 वर्ष में भरे हुए गड्ढे में अपशिष्ट पूरी तरह से नष्ट हो जाता है
4.         यह विघटित अपशिष्ट संचालन की दृष्टि से सुरक्षित रहता है और इसमें एनपीके (नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटेशियम) पोषक तत्व बड़ी मात्रा में रहते हैं जो इसे कृषि में उपयोग के लिए अत्‍यंत उपयुक्‍त बना देता है।
आज लांच किया गया यह विज्ञापन अभियान मास मीडिया के उपयोग के जरिए इस तकनीक को प्रोत्साहित करने का एक ठोस प्रयास है जिसे विश्व बैंक का समर्थन प्राप्‍त है। यह फिल्म स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के यूट्यूब चैनल (लिंक: tinyurl.com/sbmgramin) पर उपलब्‍ध है। इसका अनुवाद कई क्षेत्रीय भाषाओं में किया जाएगा, और हिंदी संस्करण का प्रसारण तत्काल प्रभाव से टेलीविजन चैनलों पर शुरू हो जाएगा।
सोर्सः #पीआईबी
 

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