नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। असम (Assam) के 14 सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में स्वीकृत पदों में से 28 प्रतिशत से अधिक पद खाली हैं। इन संस्थानों में कुल 14,754 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से 4,232 पद अभी भी रिक्त पड़े हुए हैं। यह जानकारी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री अशोक सिंघल ने पिछले दिनों दी थी। उन्होंने बताया कि रिक्त पदों की संख्या कुल स्वीकृत पदों का बड़ा हिस्सा है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ रहा है। उनके मुताबिक इन संस्थानों में कुल 14,754 पद स्वीकृत हैं जिनमें 4,232 पद फिलहाल खाली हैं। यह कुल स्वीकृत पदों का 28 प्रतिशत से अधिक है।
हजारों मरीज पहुंचते अस्पताल
इसके अलावा मंत्री ने बताया कि मेडिकल शिक्षा से जुड़े कई अहम पद भी खाली पड़े हैं। शिक्षकों की कमी का असर मेडिकल शिक्षा और प्रशिक्षण दोनों पर पड़ सकता है। प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के कुल 297 पद रिक्त हैं। ये पद मेडिकल कॉलेजों में शिक्षण और प्रशिक्षण से जुड़े हैं। एक ओर जहां हजारों पद खाली हैं, वहीं दूसरी तरफ राज्य के मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में मरीजों का दबाव लगातार बना हुआ है। मंत्री के मुताबिक राज्य के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल मिलकर हर दिन 15,205 मरीजों का इलाज कर रहे हैं। सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में रोजाना 15,205 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (GMCH) में प्रतिदिन 3,246 मरीज, डिब्रूगढ़ स्थित असम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में रोज करीब 1,800, सिलचर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में प्रतिदिन लगभग 1,500, जोरहाट, बारपेटा और धुबरी मेडिकल कॉलेजों में रोजाना 1,000 से अधिक मरीज आते हैं। जहां ते मेडिकल शिक्षा की बात है, असम के 14 मेडिकल कॉलेजों में कुल 1,825 छात्रों के वार्षिक प्रवेश की क्षमता है। गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में हर साल 250 छात्रों को प्रवेश मिलता है। डिब्रूगढ़ स्थित असम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भी 250 सीटें हैं। ये दोनों राज्य के सबसे पुराने मेडिकल संस्थान हैं।
