नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। ICMR-शाइन (अगली पीढ़ी के अन्वेषकों के लिए विज्ञान और स्वास्थ्य नवाचार) का दूसरा संस्करण शुरू हो गया है। स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (DHR) और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने देशव्यापी ओपन-डे के तहत स्कूली छात्रों का अपनी प्रयोगशालाओं में स्वागत किया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के छात्रों से “एक दिन वैज्ञानिक बनकर जियो” के आह्वान से प्रेरित यह दो दिवसीय कार्यक्रम 11-12 अगस्त 2026 को आईसीएमआर संस्थानों, मॉडल ग्रामीण स्वास्थ्य अनुसंधान इकाइयों (MRHRU) और संबद्ध फील्ड इकाइयों सहित देश भर के 83 स्थानों पर आयोजित किया जा रहा है। हिमाचल प्रदेश में लगभग 10 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित केलॉन्ग से लेकर दक्षिण में केरल तक और पश्चिम में दीव से लेकर पूर्व में नगालैंड तक यह कार्यक्रम देश भर के बच्चों को उपलब्ध है। यह कार्यक्रम बच्चों को विज्ञान के करीब लाएगा और वैज्ञानिक खोज में उनकी जिज्ञासा और रुचि को प्रोत्साहित करेगा।
जिज्ञासु बनें छात्र
इस अवसर पर स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (डीएचआर) के सचिव और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने कहा कि आज हमारे साथ जुड़ रहे सभी युवा छात्रों से मैं आग्रह करता हूं कि वे जिज्ञासु बनें, सवाल पूछें और यह जानने से कभी न डरें कि ऐसा क्यों होता है। हर खोज एक प्रश्न से शुरू होती है और हर नवाचार एक नई संभावना को तलाशने के साहस से शुरू होता है। मुझे आशा है कि शाइन में आपका अनुभव आपको स्वास्थ्य अनुसंधान की रोमांचक दुनिया की एक झलक देगा और आपको विज्ञान को महज एक अध्ययन के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे करियर के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित करेगा जिसके माध्यम से आप लोगों के जीवन में सार्थक बदलाव ला सकते हैं। डॉ. बहल ने सहभागी छात्रों के साथ बातचीत के दौरान विज्ञान, स्वास्थ्य और अनुसंधान से संबंधित उनके प्रश्नों का उत्तर दिया, उन्हें सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाया और उन्हें जिज्ञासु बने रहने तथा पाठ्यपुस्तकों से परे सोचने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने आईसीएमआर के अनुसंधान कार्यों और नवाचारों को प्रदर्शित करने वाली प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया। इस प्रदर्शनी से छात्रों को यह जानने का अवसर मिला कि वैज्ञानिक खोजें असल दुनिया की स्वास्थ्य चुनौतियों का कैसे समाधान करती हैं।
अनुसंधान में सीधा प्रवेश
दो दिनों के इस कार्यक्रम के दौरान सरकारी और निजी विद्यालयों के कक्षा 9 से 12 तक के छात्र स्वास्थ्य अनुसंधान की दुनिया में सीधे प्रवेश कर रहे हैं। सहभागी छात्र निर्देशित प्रयोगशाला भ्रमण, अनुसंधान प्रदर्शनियों, पोस्टर वॉक, वीडियो प्रस्तुतियों और चल रहे वैज्ञानिक कार्यों के प्रत्यक्ष प्रदर्शन में भाग ले रहे हैं और आईसीएमआर के वैज्ञानिकों के साथ बातचीत करके उनकी अनुसंधान यात्राओं, विशेषज्ञता के क्षेत्रों और सार्वजनिक स्वास्थ्य में उनके दैनिक कार्यों के बारे में जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। युवा प्रतिभागियों के लिए वैज्ञानिक जिज्ञासा की भावना को जीवंत करने का काम डॉ. क्यूरियो कर रहे हैं, जो शाइन के आधिकारिक शुभंकर हैं और इस पहल की प्रचार सामग्री, पोस्टर और सोशल मीडिया पर दिखाई देते हैं। ये शुभंकर आईसीएमआर के काम पर आधारित संवादात्मक वीडियो की एक श्रृंखला के कथावाचक के रूप में भी दिख रहे हैं।
वेबसाइट भी लॉन्च
इस अवसर पर आईसीएमआर ने आधिकारिक शाइन वेबसाइट (shine.icmr.org.in) भी लॉन्च की जो स्वास्थ्य अनुसंधान में रुचि रखने वाले छात्रों के लिए संसाधन, अपडेट और अवसर उपलब्ध कराने वाला एक विशेष मंच है। इसके लॉन्च के साथ ही आईसीएमआर ने एक राष्ट्रव्यापी स्कूली प्रतियोगिता की घोषणा की जिसमें छात्रों को अपने स्वयं के शोध प्रश्न तैयार करने और असल दुनिया की सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों के संभावित समाधान प्रस्तावित करने के लिए आमंत्रित किया गया है। आईसीएमआर की देश भर की प्रयोगशालाओं द्वारा भेजे गए आमंत्रणों के माध्यम से इस पहल के अगले चरण में लगभग 30 हजार छात्रों के भाग लेने की उम्मीद है। अपने संस्थानों और अनुसंधान इकाइयों के द्वार खोलकर यह कार्यक्रम विज्ञान को मूर्त और सुलभ बनाने का प्रयास करता है, युवा शिक्षार्थियों को यह दर्शाता है कि अनुसंधान किस प्रकार समुदायों के सामने आने वाली स्वास्थ्य चुनौतियों का समाधान करता है और उन्हें वैज्ञानिक अनुसंधान में अपना भविष्य देखने के लिए प्रोत्साहित करता है। विकसित भारत 2047 विजन के अनुरूप, यह पहल देश के युवाओं में वैज्ञानिक सोच को बढ़ाने और शोधकर्ताओं की अगली पीढ़ी को प्रेरित करने के लिए आईसीएमआर की प्रतिबद्धता की पुष्टि करती है, जो भारत के स्वास्थ्य और विकास लक्ष्यों में योगदान देंगे।
