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सख्ती: कम समय में एक्सपायर होने वाली दवाओं पर रोक

सख्ती: कम समय में एक्सपायर होने वाली दवाओं पर रोक

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। फार्मा सेक्टर की मनमानी पर सख्ती करते हुए केंद्र सरकार ने आयात की जाने वाली दवाओं के लिए न्यूनतम शेष शेल्फ-लाइफ (दवा के इस्तेमाल की बची हुई अवधि) की शर्त लागू कर दी है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश में आने वाली दवाओं के पास आयात के बाद भी पर्याप्त उपयोगी समय बचा रहे। स्वास्थ्य मंत्रालय ने हाल ही एक अधिसूचना जारी कर ड्रग्स रूल्स, 1945 में संशोधन किया है। इसके तहत अब लाइसेंसिंग अथॉरिटी ऐसी किसी भी दवा के आयात की अनुमति नहीं देगी जिसकी बची हुई शेल्फ-लाइफ आयात की तारीख को एक वर्ष से कम होगी। हालांकि इस संशोधन में जैविक दवाओं और रेडियोफार्मास्यूटिकल्स के लिए एक अलग प्रावधान रखा गया है। इसके तहत उन दवाओं के आयात की अनुमति दी जा सकती है जिनकी लेबल पर लिखी कुल शेल्फ-लाइफ का कम से कम 60 प्रतिशत हिस्सा बचा हुआ हो।

जनता तक समय से पहुंच सके

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यह संशोधित प्रावधान ड्रग्स रूल्स, 1945 के नियम 31 के दूसरे प्रावधान की जगह लेगा। इस नई आवश्यकता के तहत किसी आयातित दवा की बची हुई शेल्फ-लाइफ लाइसेंसिंग अथॉरिटी के लिए यह तय करने का एक मुख्य आधार होगी कि उसे भारत में प्रवेश की अनुमति दी जाए या नहीं। यह निर्णय दवा आपूर्ति श्रृंखला के लिए काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि बहुत कम बची हुई शेल्फ-लाइफ वाली दवाओं के वितरण, भंडारण और समय पर उपयोग में कई तरह की चुनौतियां आती हैं। एक अनिवार्य न्यूनतम अवधि लागू होने से इस जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है कि आयातित दवाएं एक्सपायरी से ठीक थोड़े समय पहले वितरकों, स्वास्थ्य केंद्रों या मरीजों तक पहुंचें। बताते हैं कि इस ड्राफ्ट अधिसूचना वाला राजपत्र 25 जून, 2026 को आम जनता के लिए उपलब्ध कराया गया था। प्राप्त आपत्तियों और सुझावों पर विचार करने के बाद सरकार ने ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (DTAB) के साथ परामर्श करके इस संशोधन को अंतिम रूप दिया। यह अधिसूचना ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 की धारा 12 और 33 के तहत जारी की गई है, जो सरकार को दवाओं से जुड़े नियम बनाने का अधिकार देती हैं।

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