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Study: समय से पहले बूढ़ी हो रही युवा पीढ़ी

Study: समय से पहले बूढ़ी हो रही युवा पीढ़ी

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। आज की युवा पीढ़ी अपने माता-पिता और दादा-दादी की तुलना में कहीं तेजी से गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है कि कम उम्र में ही गंभीर रोगों के शिकार होकर उनका वक्त अस्पतालों के चक्कर काटने में बीत रहा है? इस बारे में वाशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के वैज्ञानिकों ने एक नया अध्ययन (Study) किया है, जिसके नतीजे चौंकाने वाले हैं। प्रतिष्ठित जर्नल नेचर मेडिसिन में छपी स्टडी रिपोर्ट के मुताबिक आज की युवा पीढ़ी समय से पहले बूढ़ी हो रही है। उनकी उम्र कैलेंडर पर भले ही कम हो, लेकिन उनके शरीर के अंदर के अंग और कोशिकाएं अपनी वास्तविक उम्र से कहीं ज्यादा बूढ़ी हो चुकी हैं। विज्ञान की भाषा में इसे ‘बायोलॉजिकल एजिंग’ यानी जैविक बुढ़ापा कहते हैं। बता दें कि जैविक उम्र यह बताती है कि उसके शरीर के अंग और कोशिकाएं वास्तव में कितनी बूढ़ी हो चुकी हैं।

स्टडी: तेजी से बूढ़े हो रहे अंग

इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने यूके बायोबैंक से 1.54 लाख से अधिक लोगों और अमेरिका के ऑल ऑफ अस रिसर्च प्रोग्राम से 10,000 से ज्यादा प्रतिभागियों के स्वास्थ्य, जीवनशैली और जैविक आंकड़ों का विश्लेषण किया है। इस अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों ने खून में मौजूद जैव-रासायनिक संकेतकों, प्रोटीन और मेटाबॉलिज्म से जुड़े संकेतकों की मदद से यह आंका कि शरीर और उसके अलग-अलग अंग कितनी तेजी से बूढ़े हो रहे हैं। इस अध्ययन के मुताबिक नई पीढ़ी में जैविक उम्र उनकी वास्तविक आयु की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ रही है और यही बदलाव कम उम्र में कैंसर के बढ़ते मामलों की एक अहम वजह हो सकता है। वैज्ञानिकों ने पाया कि हमारे जीने के साल (क्रोनोलॉजिकल एज) और हमारे शरीर की असली अंदरूनी उम्र (बायोलॉजिकल एज) के बीच का फासला जितना ज्यादा होगा, कैंसर का खतरा उतना ही बढ़ जाएगा। उदाहरण के लिए, अमेरिका में 1990 के दशक में पैदा हुए युवाओं का शरीर, 1960 के दशक में पैदा हुए लोगों की तुलना में बहुत तेजी से बूढ़ा हो रहा है। यही वजह है कि आज 55 साल या उससे कम उम्र के युवाओं में फेफड़ों, पेट और गर्भाशय के कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

स्टडी: लैंसेट ने भी की पुष्टि

WHO के मुताबिक कैंसर एक न होकर बीमारियों का एक समूह है, जो शरीर के करीब-करीब किसी भी अंग या ऊतक में शुरू हो सकती है। इस बीमारी के दौरान असामान्य कोशिकाएं शरीर के विभिन्न हिस्सों में अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं। जब यह अनियंत्रित तरीके से बढ़ती कोशिकाएं अपनी सामान्य सीमाओं से परे चली जाती हैं और अन्य अंगों में फैल जाती हैं, तो इस फैलाव को मेटास्टेसिस कहा जाता है। जो कैंसर से होने वाली मौतों का प्रमुख कारण है। कैंसर के अन्य नामों में नियोप्लाज्म और घातक ट्यूमर शामिल हैं। लैंसेट में प्रकाशित एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक 2050 तक कैंसर के मामले तीन करोड़ तक पहुंच सकते हैं और 1.86 करोड़ मौतों का खतरा है। इसका मतलब है कि अगले 25 वर्षों में 2050 तक कैंसर के नए मामलों में 60.7 फीसद जबकि मौतों में 74.5 फीसद की वृद्धि होने का अंदेशा है।

स्टडी: जीवनशैली का योगदान

यह अध्ययन सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि यह हमारे बदलते पर्यावरण और जीवनशैली की एक दर्दनाक दास्तां बयां करता है। जब शोधकर्ताओं ने शरीर के अलग-अलग अंगों की जांच की, तो बेहद परेशान कर देने वाले तथ्य सामने आए। हमारा इम्यून सिस्टम यानी रोगों से लड़ने की ताकत, जो हमारे शरीर की सुरक्षा कवच होती है, अगर वह समय से पहले बूढ़ी हो जाए, तो युवाओं में फेफड़ों का कैंसर पनपने लगता है। वहीं, अगर हमारे शरीर के फैट टिश्यू यानी वसा कोशिकाएं समय से पहले बूढ़ी हो जाएं, तो यह युवाओं को बड़ी आंत (कोलन) या मलाशय के कैंसर (कोलोरेक्टल कैंसर) की ओर धकेल देती हैं। वैज्ञानिकों ने चेताया है कि मोटापा, खराब खान-पान, शराब का सेवन, प्रदूषण, देर तक बैठे रहना और तनावपूर्ण आधुनिक माहौल, ये सब मिलकर युवाओं के शरीर को अंदर ही अंदर खोखला कर रहे हैं।

स्टडी: जैविक उम्र कैंसर का कारण

शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि अध्ययन यह साबित नहीं करता कि तेजी से बढ़ती जैविक उम्र ही कैंसर का सीधा कारण है। लेकिन दोनों के बीच एक मजबूत संबंध जरूर सामने आया है। अध्ययन की खास बात यह है कि इसमें केवल कैंसर कोशिकाओं पर नहीं, बल्कि पूरे शरीर में समय के साथ होने वाले जैविक बदलावों को समझने की कोशिश की गई है। गौरतलब है कि ब्रिटिश मेडिकल जर्नल की एक रिपोर्ट में सामने आया है कि 1990 के बाद से दुनिया भर में 50 वर्ष से कम उम्र के लोगों में कैंसर के नए मामलों में करीब 79 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। चिंता की बात है कि इस दौरान 50 से कम उम्र के लोगों में कैंसर से होने वाली मौतों में भी 27.7 फीसद की वृद्धि हुई है। इस नए अध्ययन का नेतृत्व करने वाली डॉक्टर यिन काओ का कहना है कि अगर हम समय रहते खून के कुछ सामान्य टेस्ट के जरिए यह पहचान लें कि किस युवा का शरीर अंदर से तेजी से बूढ़ा हो रहा है, तो हम कैंसर होने से पहले ही उसे बचा सकते हैं।

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