स्वस्थ भारत मीडिया
समाचार / News

कब तक बनेगा दरभंगा में AIIMS, पूछता है बिहार

कब तक बनेगा दरभंगा में AIIMS, पूछता है बिहार

पटना (स्वस्थ भारत मीडिया)। दरभंगा में बिहार के दूसरे एम्स का निर्माण जिस मंथर गति से हो रहा है, उससे अगले कुछ सालों में भी इसके चालू होने की उम्मीद कम है। वास्तविकता यह है कि अभी टेंडर की प्रक्रिया भी विभाग में विचाराधीन ही है। सहरसा के एक आरटीआई एक्टिविस्ट विनोद कुमार झा ने HSCC यानी हॉस्पीटल सर्विस कंसल्टेंसी कॉरपोरेशन लिमिटेड से दरभंगा एम्स के निर्माण के बारे में सवाल पूछा था। इस पर उनको ऐसा ही जवाब मिला। पिछले महीने ही यह जवाब मिला है। दिक्कत यह है कि 2015 से ही इसकी चर्चा चल रही है, 2024 में इसका शिलान्यास भी हो गया जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन साल में तैयार हो जाने की घोषणा की थी। फिर भी मामला लटका हुआ है। कमाल की बात यह है कि इस एम्स के बाद घोषित सात एम्स या तो बन गये हैं, यह निर्माण पूरा होने वाला है। सभी जगह पढ़ाई भी शुरू हो चुकी है। विनोद कुमार झा सहरसा में एम्स बनवाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय और एचएससीसी दोनों से सवाल पूछे थे। स्वास्थ्य मंत्रालय ने तो यह कहते हुए जवाब नहीं दिया कि आरटीआई एक्ट के तहत सूचना नहीं दी जा सकती मगर एचएससीसी ने सूचना दे दी।

एम्स: 2015 से मामला लटका

याद रहे कि 2015 में आम बजट के दौरान बिहार में एम्स जैसे एक अन्य संस्थान खोले जाने की घोषणा हुई थी। उसके बाद दरभंगा, सहरसा और कई औऱ शहरों में एम्स खोले जाने की मांग उठी। तत्कालीन सीएम नीतीश कुमार दरभंगा के लिए सहमत थे। 2020 में आखिरकार दरभंगा के नाम पर सहमति बन गई। केंद्रीय कैबिनेट ने सहमति भी दे दी। दरभंगा एम्स के काम में रुकावट की वजह जमीन का चयन रहा है। कभी डीएमसीएच तो कभी अशोक पेपर मिल का नाम सामने आया। आखिरकार शोभन बायपास में एक गड्ढ़े वाली जमीन को चुना गया, जहां पानी लगता था। बिहार सरकार ने इस गड्ढ़े को भरने के लिए 309 करोड़ खर्च करने की स्वीकृति भी दे दी जबकि दरभंगा एम्स का अनुमानित बजट ही 1264 करोड़ कहा जा रहा है। इसके बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने 2024 में इसका शिलान्यास कर दिया। सभी सरकारी विज्ञापनों में दरभंगा में एम्स के निर्माण को बिहार और केंद्र दोनों सरकार की उपलब्धि बताया जाता है मगर हकीकत यह है कि वहां सिर्फ गेट बना है।

एम्स: 1954 करोड़ का बजट

रिपोर्ट के अनुसार AIIMS दरभंगा एक प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल है। इसकी स्थापना प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (PMSSY) के तहत की जाएगी। इसमें 100 MBBS सीटें, 60 बीएससी (नर्सिंग) सीटें, 15-20 सुपर स्पेशलिटी विभाग और 750 बेड आदि होंगे। उम्मीद है कि बन जाने के बाद रोज लगभग 2000 ओपीडी मरीजों और प्रति माह लगभग 1000 आईपीडी मरीजों को सेवाएं प्रदान करेगा। इसके निर्माण के लिए पहले 1264 करोड़ और बाद में 700 करोड़ केंद्र सरकार की ओर से आवंटन मिला जिससे कुल बजट 1,964 करोड़ हो गया है। इस निधि का उद्देश्य कार्यान्वयन संबंधी बाधाओं को दूर करना है।

एम्स: आंदोलन भी हुए

केंद्र और राज्य सरकार के बीच राजनीतिक मतभेदों के कारण यह भारत में अब तक का सबसे विलंबित AIIMS है। दरभंगा AIIMS की नींव रखने में कई वर्षों की भारी देरी के कारण मिथिला छात्र संघ ने अगस्त 2021 में ” घर-घर से ईंटें लाएंगे, दरभंगा AIIMS बनाएंगे” नामक एक आंदोलन शुरू किया। इस आंदोलन के तहत दरभंगा, समस्तीपुर, मधुबनी और सीतामढ़ी आदि जिलों के लोगों ने मिथिला क्षेत्र में घर-घर जाकर ईंटें एकत्र करना शुरू कर दिया ताकि 8 सितंबर 2021 को दरभंगा में प्रस्तावित AIIMS की नींव रखी जा सके। 11 सितंबर 2023 को मिथिला छात्र संघ ने दरभंगा AIIMS के निर्माण की मांग को लेकर भूख हड़ताल की। भूख हड़ताल पर बैठे प्रदर्शनकारियों ने कहा, “दरभंगा के बाद जहाँ-जहाँ AIIMS के निर्माण की घोषणा हुई, वहाँ इलाज और कक्षाएँ चलाई गईं, लेकिन दरभंगा AIIMS की घोषणा को आठ साल बीत गए, एक भी ईंट नहीं गिरी।” प्रदर्शनकारियों ने फिर से “घर-घर से ईंटा लेंगे, दरभंगा AIIMS बनाएंगे” जैसे नारे लगाए। 2023 में दरभंगा के भाजपा सांसद गोपालजी ठाकुर ने तीन दिनों की भूख हड़ताल की। इन दिनों भी दरभंगा में एम्स निर्माण को लेकर धरना चल रहा है।

Related posts

जामनगर में बनेगा WHO ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन

admin

कोरोना पर तैयारियों का ब्योरा मांगा दिल्ली हाईकोर्ट ने

admin

सस्ती होगी कैंसर की दवा, GST दर में कटौती

admin

Leave a Comment