कात्यायनी तिवारी
नयी दिल्ली। सुबह स्कूल, कॉलेज या ऑफिस जाने के लिए अलार्म की आवाज सुनने के बाद भी पांच मिनट की ओर नींद लेने का मन होना और इसके बाद भी उठने की हिम्मत नहीं होना। रात को अच्छी नींद आने के बाद भी सुबह सुस्ती महसूस होना, पूरा दिन थका-थका महसूस करना। शरीर की सुस्ती दूर करने के लिए चाय या कॉफी का सहारा लेना, लेकिन इसके थोड़ी देर बाद ही दोबारा सुस्ती छा जाना। ऑफिस की टेबल पर बैठे-बैठे सो जाना या काम में बिल्कुल मन न लगना भारत के नौजवानों में काफी आम समस्या हो गई है। फुर्ती दिखाने की उम्र में हर दूसरा व्यक्ति थका हुआ और तनाव में ही नजर आ रहे हैं। हाल ही में ICMR ने अपनी एक रिपोर्ट में इसका एक बड़े कारण का खुलासा किया है।
सुस्ती और तनाव की समस्या
ICMR की रिपोर्ट के अनुसार—ऊर्जा की कमी वाले परिवारों का अनुपात लगभग 70 फीसद था, जबकि प्रोटीन की कमी वाले परिवारों का अनुपात लगभग 27 फीसद। इस तरह, अनाज, बाजरा आधारित भारतीय आहार में मुख्य रुकावट ऊर्जा की कमी है, न कि प्रोटीन। ऐसे में गरीब लोग अपने खाए जाने वाले खाद्य पदार्थों की मात्रा बढ़ाकर इस आहार ऊर्जा अंतर को आसानी से कम कर सकते हैं। इसलिए, आज के अधिकतर युवाओं के शरीर में एनर्जी की कमी के कारण सुस्तपन और तनाव की समस्या बढ़ रही है।
एनर्जी की कमी के नुकसान
भारतीयों के खाने में प्रोटीन, कैलोरी और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर फूड्स का पर्याप्त मात्रा में न होने के कारण शरीर में एनर्जी की कमी होना आम समस्या हो गई है। ऐसे में शरीर में एनर्जी यानी ऊर्जा की कमी के कारण कई तरह की समस्याएं हो रही हैं, जो न सिर्फ उनके शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डाल रही है। जैसे-
लो प्रोडक्टिविटी—पढ़ाई, नौकरी या बिजनेस करने में तरक्की करने के लिए प्रोडक्टिविटी लेवल का ज्यादा होना जरूरी है। लेकिन, शरीर की एनर्जी कम होने के कारण लोगों में प्रोडक्टिविटी लेवल काफी कम हो रहा है। दरअसल, जब व्यक्ति के शरीर में पर्याप्त मात्रा में एनर्जी नहीं होती है, तो उसका ध्यान भटकने लगता है, काम में मन नहीं लगता है, जिसका असर सीधे लो प्रोडक्टिलिटी के रूप में दिखता है।
बढ़ता तनाव और मानसिक थकावट—शरीर में लगातार एनर्जी की कमी महसूस होने पर न सिर्फ आपका शरीर थकने लगता है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसका असर पड़ता है। एनर्जी की कमी के कारण दिमाग थका हुआ और बोझिल महसूस होने लगता है, जिससे तनाव, एंग्जाइटी और डिप्रेशन जैसी समस्याएं बढ़ने लगती है।
चिड़चिड़ापन और मूड स्विंग—शरीर में कम एनर्जी का लेवल सीधे आपके मूड को प्रभावित करता है। इस कारण आज के युवाओं में चिड़चिड़ापन, उदासी और छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आना आम बात हो गई है। लेकिन इसका असर उनके काम और परिवार दोनों पर नकारात्मक रूप से पड़ रहा है।
मांसपेशियों में दर्द और कमजोरी—शरीर को पर्याप्त मात्रा में पोषण न मिलने के कारण होने वाली एनर्जी की कमी का असर मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी और थकान के रूप में नजर आती है। इस कारण व्यक्ति को रोजमर्रा के कामकाज करने में भी समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
सिरदर्द—शरीर में एनर्जी की कमी का सीधा कनेक्शन आपके सिरदर्द से भी हो सकता है। एनर्जी कम होने के कारण नींद में कमी, थकान महसूस होना और मानसिक स्वास्थ्य पर दबाव बढ़ने के कारण सिरदर्द का कारण बनता है।
इम्यून सिस्टम कमजोर होना—जब शरीर में एनर्जी की कमी लगातार बनी रहती है, तो इसका असर इम्यून सिस्टम पर पड़ता है, जिससे इम्यूनिटी पावर कमजोर होने लगती है और व्यक्ति ज्यादा थका महसूस करता है। इतना ही नहीं इम्यून सिस्टम कमजोर होने के कारण व्यक्ति बार-बार बीमार पड़ता है।
एनर्जी की कमी के कारण
शरीर में एनर्जी की कमी होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे-
गलत खान-पान: जंक फूड, प्रोसेस्ड फूड और बहुत ज्यादा शुगर से भरपूर फूड्स का सेवन शरीर को फुर्तिला बनाने वाले एनर्जी लेवल को कम कर सकता है।
विटामिन और मिनरल्स की कमी: शरीर में जरूरी पोषक तत्वों, खासकर विटामिन B12, आयरन, मैग्नीशियम की कमी थकान और कमजोरी का बड़ा कारण बनती है।
नींद की कमी: कम नींद लेने या खराब गुणवत्ता वाली नींद के कारण शरीर की रिकवरी धीमी हो जाती है, जिससे एनर्जी की कमी होने लगती है।
एक्सरसाइज न करना: शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण शरीर का मेटाबॉलिज्म को धीमा हो जाता है, जो शरीर में ऊर्जी की कमी का कारण बनता है।
तनाव और चिंता: लगातार मानसिक तनाव लेने से भी शरीर में हार्मोनल असंतुलन होने लगता है, जो शरीर की एनर्जी को धीरे-धीरे खत्म या कम करने लगता है।
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