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राज्यसभा : मिलावटी दवाओं की बिक्री रोकने के लिए हुआ एक्शन

राज्यसभा : मिलावटी दवाओं की बिक्री रोकने के लिए हुआ एक्शन

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। मिलावटी दवाओं की बिक्री रोकने के लिए हुआ केंद्र सरकार ने कई कदम उठाए हैं। CDSCO और राज्य नियामकों द्वारा निरीक्षण और सख्त प्रवर्तन कार्रवाइयां की गई हैं, 905 दवा इकाइयों का निरीक्षण किया गया है और उत्पादन रोकने के आदेश और लाइसेंस रद्द करने सहित 694 कार्रवाइयां की गई हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि देश भर में लगातार निगरानी सुनिश्चित करने के लिए सार्वजनिक मासिक ड्रग अलर्ट, लैब एकीकरण के लिए सुगम लैब्स पोर्टल और मानकीकृत नमूनाकरण दिशानिर्देशों के माध्यम से दवा की गुणवत्ता की निगरानी और पारदर्शिता बढ़ाई गई है।

राज्यसभा : High BP और मधुमेह पर काबू के प्रयास

राज्यसभा में केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने उच्च रक्तचाप और मधुमेह पर काबू के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए कहा कि 30 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों की राष्ट्रव्यापी जाँच और उपचार लागू है। जनवरी से जून 2025 तक उच्च रक्तचाप के 1.11 करोड़ से अधिक और मधुमेह के 64 लाख से अधिक मामलों का पता चला जिनका उपचार चल रहा है। व्यापक बुनियादी ढाँचे में 770 जिला एनसीडी क्लीनिक, 233 हृदय देखभाल इकाइयाँ और 6410 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र-स्तर के एनसीडी क्लीनिक शामिल हैं, जिन्हें नियमित अनुवर्ती कार्रवाई, परामर्श और निःशुल्क दवा उपलब्ध कराने के लिए प्रशिक्षित सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों, आशा कार्यकर्ताओं और एएनएम द्वारा सहायता प्रदान की जाती है।

राज्यसभा : ABHA पर अपडेट

श्री जाधव ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी कि 79.9 करोड़ से अधिक आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाते बनाए गए हैं, जिससे लोग अपने स्वास्थ्य डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड सुरक्षित रूप से देख सकते हैं और सेवा प्रदाताओं के साथ साझा कर सकते हैं। 4.18 लाख से अधिक स्वास्थ्य सुविधाओं और 6.79 लाख स्वास्थ्य पेशेवरों को पंजीकृत कर व्‍यापक डिजिटल स्वास्थ्य बुनियादी ढांचा स्थापित किया गया है, जिससे सेवा प्रदान करने और स्‍वास्‍थ्‍य सेवा पहुंच में वृद्धि हुई है।

राज्यसभा : विकलांग व्यक्तियों के लिए कई उपाय

उन्होंने एक अन्य सवाल पर लिखित उत्तर में बताया कि निरामया स्वास्थ्य बीमा योजना दिव्यांगजनों के लिए एक लाख रुपये तक का कवरेज बिना पूर्व-बीमा चिकित्सा परीक्षण के प्रदान करती है, जिससे किफायती देखभाल तक पहुंच सुनिश्चित होती है। पीएम-जेएवाई 12 करोड़ से अधिक ऐसे गरीब और कमजोर परिवारों को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का कैशलेस स्वास्थ्य कवरेज प्रदान करता है, जिसमें दिव्यांग सदस्य हैं और कोई सक्षम वयस्क सदस्य नहीं हैं। इसके अलावा दुर्लभ रोगों के लिए राष्ट्रीय नीति के तहत 14 उत्कृष्टता केंद्रों पर 63 दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए 50 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान करती है, जिससे प्रभावित परिवारों पर वित्तीय बोझ कम होता है।

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