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Cipla की पुणे यूनिट का बिक्री लाइसेंस रद्द

Cipla की पुणे यूनिट का बिक्री लाइसेंस रद्द

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने सिप्ला (Cipla) फार्मा के पुणे स्थित यूनिट का दवा बिक्री लाइसेंस रद्द कर दिया है। यह कार्रवाई दवाओं की पैकेजिंग, भंडारण और बाजार से वापस मंगाने की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं मिलने के बाद की गई। पुणे के वाडकी स्थित कंपनी के मुख्य गोदाम का निरीक्षण किया गया था और लाइसेंस रद्द करने का फैसला 27 अगस्त से प्रभावी हो गया।

गोदाम में कई तरह की गड़बड़ियां

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एफडीए को कई दवाएं सीधे फर्श पर रखी मिलीं। दवाओं को सुरक्षित तरीके से रखने के लिए पर्याप्त पैलेट और रैक की व्यवस्था नहीं थी। इसके अलावा कंपनी के कंप्यूटर में दर्ज स्टॉक और गोदाम में मौजूद वास्तविक स्टॉक के बीच भी अंतर मिला। खरीद और बिक्री के रिकॉर्ड में भी गड़बड़ी पाई गई। एक्सपायर्ड दवाओं को संभालने से जुड़े रिकॉर्ड और तय प्रक्रिया में भी कमियां सामने आईं। निरीक्षण की प्रक्रिया जून में हुई थी। इस दौरान अधिकारियों को रिएक्टिन प्लस टैबलेट की पैकेजिंग पर ऐसा दावा मिला, जिसे अनधिकृत बताया गया। यह शेड्यूल एच की प्रिस्क्रिप्शन दवा है। पैकेजिंग पर इसे ‘दर्द निवारक और बुखार कम करने वाली’ दवा बताया गया था। एफडीए ने इस दावे को दवा से जुड़े नियमों के खिलाफ माना और करीब 11.19 लाख रुपये का स्टॉक जब्त किया। एफडीए ने इसके बाद कंपनी को गलत दावे वाली रिएक्टिन प्लस टैबलेट को बाजार से वापस मंगाने का निर्देश दिया। विभाग के मुताबिक, कंपनी ने इस निर्देश और जरूरी कार्रवाई का पूरी तरह पालन नहीं किया। बाद की जांच में भी दवा वापस मंगाने के निर्देशों का पालन नहीं होने की बात सामने आई। इसके साथ ही भंडारण व्यवस्था और स्टॉक रिकॉर्ड में भी कमियां पाई गईं।

निर्देशों का भी पालन नहीं

विभाग ने लाइसेंस धारक को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। कंपनी की ओर से दिए गए जवाब की जांच के बाद FDA ने पाया कि कमियों को दूर करने और रिएक्टिन प्लस टैबलेट वापस मंगाने से जुड़े निर्देशों का पर्याप्त पालन नहीं किया गया। इसके बाद दवा बिक्री लाइसेंस रद्द करने का फैसला लिया गया। एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंडे ने कहा कि दवा सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में विभाग कोई नरमी नहीं बरतेगा। उन्होंने कहा कि दवाओं के निर्माण और वितरण से जुड़े किसी भी संस्थान द्वारा नियम तोड़ने पर कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई होगी।

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