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आयुष व्यापार और नवाचार में ब्रिक्स सहयोग मज़बूत हो : जाधव

आयुष व्यापार और नवाचार में ब्रिक्स सहयोग मज़बूत हो : जाधव

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने यहां परम्‍परागत प्रथाओं और नवाचार को जोड़ना विषय पर आयोजित ब्रिक्स सीसीआई हेल्थकेयर शिखर सम्मेलन 2025 की अध्यक्षता की। मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि दुनिया की लगभग आधी आबादी, वैश्विक जीडीपी के एक-तिहाई और विश्व व्यापार के पांचवें हिस्से का प्रतिनिधित्व करने वाले ब्रिक्स को समावेशी और स्‍थायी विकास में तेजी लाने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।

ब्रिक्स: आयुष को ग्लोबल स्वीकृति

श्री जाधव ने इस बात पर प्रकाश डाला कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने अनुसंधान, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, औषधि उत्पादन और मज़बूत नियामक तंत्र पर केन्‍द्रित एक व्यापक आयुष इकोसिस्‍टम विकसित किया है। आज भारत में एक हजार से ज़्यादा आयुष कॉलेज हैं, जिनमें 500 से ज़्यादा आयुर्वेद संस्थान शामिल हैं, जिन्हें एक व्यापक अनुसंधान नेटवर्क का सहयोग प्राप्त है। उन्होंने आयुष प्रणालियों की बढ़ती वैश्विक स्वीकृति का उल्लेख किया जिसमें ब्राजील में आयुर्वेदिक चिकित्सकों के समुदाय से लेकर रूस के स्वास्थ्य देखभाल ढांचे में आयुर्वेद का समावेश और चीन में पारंपरिक चिकित्सा की समानांतर उन्नति शामिल है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि आयुर्वेद और योग का वैश्विक बाज़ार तेज़ी से बढ़ रहा है, लेकिन समावेशी, नैतिक और टिकाऊ विकास सुनिश्चित करना ज़रूरी है। उन्होंने सार्वजनिक-निजी भागीदारी, डिजिटल स्वास्थ्य नवाचार, न्यूट्रास्युटिकल अनुसंधान और उद्यमियों, नवप्रवर्तकों और किसानों को मान्यता देने पर ज़्यादा ध्यान देने का आह्वान किया।

ब्रिक्स : बाजार विस्तार की संभावना

श्री जाधव ने इस बात पर जोर दिया कि आयुष उत्पादों के लिए मजबूत अंतर-ब्रिक्स सहयोग और सामंजस्यपूर्ण ढांचे से बाजारों का विस्तार हो सकता है, आर्थिक कमजोरियों को कम किया जा सकता है और भारत को स्वास्थ्य और कल्याण के क्षेत्र में वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करने में मदद मिल सकती है। मंत्री ने बताया कि आयुष मंत्रालय ने 25 देशों के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के लिए एक मज़बूत आधार तैयार हुआ है। उन्होंने ब्रिक्स देशों से आग्रह किया कि वे इस शिखर सम्मेलन का लाभ उठाकर नए गठबंधन बनाएँ और ऐसे स्वास्थ्य सेवा मॉडल विकसित करें जो परंपरा और नवाचार का मिश्रण हों।

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