अनीश रावत
नयी दिल्ली। भारत में मलेरिया को रोकने के प्रयास लगातार हो रहे हैं और हाल ही में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने काफी बड़ी कामयाबी हासिल की है। ICMR के वैज्ञानिकों ने देश की पहली स्वदेशी मल्टी-स्टेज मलेरिया वैक्सीन AdFalciVax तैयार की है और अब जल्द से जल्द लोगों तक पहुंचाने के लिए इस वैक्सीन का लाइसेंस पांच कंपनियों को दिया है। इसकी घोषणा ICMR ने हाल ही में इंडिया मेडटेक एक्सपो 2025 में की है।
इनको मिला लाइसेंस
ICMR ने जिन कंपनियों को लाइसेंस दिया है, वे हैं–इंडियन इम्यूनोलॉजिकल्स लिमिटेड, टेकइन्वेंशन लाइफकेयर प्राइवेट लिमिटेड, पैनासिया बायोटेक लिमिटेड, बायोलॉजिकल ई लिमिटेड और जायडस लाइफसाइंसेज। मालूम हो कि AdFalciVax वैक्सीन को ICMR और भुवनेश्वर के क्षेत्रीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान केंद्र (RMRC) ने मिलकर बनाया है। विशेषज्ञों के अनुसार इस स्वदेशी वैक्सीन को खासतौर पर प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम परजीवी के दो महत्वपूर्ण स्टेज को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इस परजीवी से होने वाले इंफेक्शन के चलते ही मरीज की स्थिति गंभीर हो जाती है और समय पर इलाज न होने से मरीज की जान तक जा सकती है। AdFalciVax वैक्सीन ब्लड में जाकर ट्रांसमिशन को रोकने में मदद करेगा ताकि परजीवी से मरीजों को बचाया जा सके। इसकी सबसे बड़ी खासयित यह है कि इसे 9 महीने तक कमरे के तापमान में रखा जा सकता है। इसलिए माना जा रहा है कि ये किफायती वैक्सीन होगा।
देश में मलेरिया के बढ़ते मामले
भारत में मलेरिया के मामलों में लगातार इफाजा हो रहा है। आंकड़ों को देखें तो स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार भारत में साल 2022 में एक लाख 76 हजार से ज्यादा मामले थे, जो साल 2023 में बढ़कर दो लाख पार हो गए और साल 2024 में ये आंकड़ा ढाई लाख से ज्यादा चला गया। इस साल भी देशभर में मलेरिया के मामले बढ़ रहे हैं। भारत में मलेरिया की इस स्थिति को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि AdFalciVax वैक्सीन न सिर्फ व्यक्ति को इंफेक्शन से बचाएगा, बल्कि कम्युनिटी स्तर पर भी संक्रमण को रोकने में मदद मिलेगी।
मलेरिया: ऐसे फैलता है रोग
मलेरिया प्लास्मोडियम परजीवी की वजह से होता है, जो कि संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से इंसानों में फैलता है। यह परजीवी इंसान के खून में जाकर लिवर को प्रभावित करता है, और फिर रेड ब्लड सेल्स में फैल जाता है। अगर इसके संक्रमण को न रोका जाए, तो यह मरीज के लिए जानलेवा हो सकता है। शुरुआत में मरीज को बुखार, ठंड लगना, खांसी, जुकाम, उल्टी, दस्त की परेशानियां होती हैं, लेकिन अगर बीमारी गंभीर हो जाए, तो मरीज को पीलिया, सांस लेने दिक्कत, पेशाब में खून आने जैसी दिक्कते भी होने लगती हैं। इस रोग के भारत में खत्म न होने की वजह बीमारी की जल्दी पहचान न हो पाना है। खासकर दूर-दराज के इलाकों में लोग जांच नहीं करा पाते या बीमारी का गलत पता चलता है। इसके अलावा देश के हर इलाके में जांच के तरीके एक जैसे नहीं है, लैब्स आसानी से उपलब्ध नहीं है और कुछ लोगों को बिना लक्षण के भी मलेरिया होता है।
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