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Dengue की स्वदेशी वैक्सीन बनाने की तैयारी

Denhue की स्वदेशी वैक्सीन बनाने की तैयारी

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। डेंगू (Dengue) की जल्द जांच और रोकथाम के लिए वैक्सीन निर्माण, दोनों की प्रकिया साथ—साथ चल रही है। पटना के अगमकुआं स्थित RMRI में डेंगू की स्वदेशी वैक्सीन का परीक्षण जारी है। यहां 18-60 वर्ष आयु वर्ग के 400 स्वस्थ स्वयंसेवकों पर ट्रायल चल रहा है। दो साल के क्लीनिकल ट्रायल के बाद वैक्सीन मरीजों के लिए उपलब्ध हो सकेगी। यह जानकारी संस्थान के निदेशक डॉ. कृष्णा पांडेय ने दी है।

Dengue : सस्ते जांच किट की तैयारी

उधर डेंगू की जांच किट तैयार करने का भी काम चल रहा है। इस किट की खासियत होगी कि अब जांच न सिर्फ तेजी से बल्कि बेहद सस्ते में हो सकेगी। ICMR के क्षेत्रीय चिकित्सा अनुसंधान केंद्र (RMRC) गोरखपुर ने एक नई माइक्रोफ्लूडिक डिवाइस विकसित करने की तैयारी शुरू कर दी है, जो मात्र ₹250–₹300 में डेंगू की रिपोर्ट 2 से 2.5 घंटे में दे देगी। यह डिवाइस पोर्टेबल होगी और दूर-दराज़ इलाकों में भी आसानी से इस्तेमाल की जा सकेगी यानी भविष्य में डेंगू टेस्टिंग और निगरानी को जबरदस्त ताकत मिलेगी। इस प्रोजेक्ट को देश भर से आए 27 प्रस्तावों में दूसरा स्थान मिला, तब चुना गया है। RMRC को इस डिवाइस के निर्माण के लिए ₹4 करोड़ की मंज़ूरी मिल चुकी है। अभी RT-PCR आधारित डेंगू की जांच में करीब ₹2000 का खर्च आता है। इसके अलावा हाई-टेक लैब की जरूरत होती है जबकि नई तकनीक में समय और पैसे, दोनों की बचत होगी—खासकर उन क्षेत्रों में जहां मेडिकल सुविधाएं सीमित हैं।

Dengue : मिलेगा त्वरित उपचार

मालूम हो कि डेंगू के केस हर साल अचानक बढ़ते हैं और कई लोग देर से जांच कराने के कारण गंभीर स्टेज तक पहुंच जाते हैं। जल्दी, सस्ता और सटीक टेस्ट मिलने से कई काम आसान हो जाएंगे। मसलन समय पर इलाज शुरू हो पाएगा, अस्पतालों की भीड़ कम होगी और गंभीर मरीजों की पहचान जल्दी हो सकेगी। साथ ही ग्रामीण और संसाधन-विहीन क्षेत्रों में भी तुरंत सहायता मिलेगी। यह डिवाइस एक ही टेस्ट में डेंगू वायरस के सभी सीरो-टाइप भी बता देगी, जिससे उपचार और सर्विलांस दोनों और मजबूत होंगे। डेंगू एक मच्छर जनित वायरल संक्रमण है जो एडीज मच्छर के काटने से फैलता है। इसके लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द शामिल हैं। गंभीर मामलों में आंतरिक रक्तस्राव (डेंगू हेमरेजिक फीवर) हो सकता है, जो जानलेवा हो सकता है। इसका उपचार लक्षणों को कम करने और गंभीर मामलों में तरल पदार्थ और रक्त उत्पादों को नस के माध्यम से देने पर केंद्रित होता है। डेंगू में सबसे ज्यादा लिवर (यकृत) और अस्थि मज्जा (बोन मैरो) प्रभावित होते हैं, जो लिवर को नुकसान पहुंचाते हैं और अस्थि मज्जा को नई प्लेटलेट्स बनाने से रोकते हैं। गंभीर मामलों में फेफड़े, हृदय और मस्तिष्क जैसे अन्य अंग भी प्रभावित हो सकते हैं।

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