स्वस्थ भारत मीडिया
नीचे की कहानी / BOTTOM STORY

The Thermometer—बुजुर्गों के केयर में प्रशिक्षण जरूरी: डॉ. गोयल

The Thermometer—बुजुर्गों के केयर में प्रशिक्षण जरूरी: डॉ. गोयल

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। The Thermometer कार्यक्रम में स्वस्थ भारत मीडिया के समूह संपादक आशुतोष कुमार सिंह ने डॉ. रमेश गोयल से लंबी बात की थी। इसके दो हिस्सों में अब तक आप बुजुर्गों के रखरखाव पर कई पहलुओं को जाना। प्रस्तुत है बातचीत की तीसरी कड़ी…

आशुतोष: बुजुर्गों के केयर के लिए आपने ‘वट वृक्ष’ लगाया है। इसे देखकर संतोष भी है। एल्डर्ली केयर के काम को अन्य संस्थाएं कैसे व्यवस्थित करे या जरूरत पड़े तो आपसे संपर्क करें?
डॉ. गोयल: इसके लिए हमने प्रोग्राम बनाया है जिसके तहत उनके स्टाफ यहां ट्रेनिंग कर सकते हैं। हम फ्री ऑफ कॉस्ट ट्रेनिंग देंगे। हम उनको बताएंगे कि किस टाइप के पेशेंट की क्या केयर करनी चाहिए। हम उसकी कोई चार्ज नहीं लेते ताकि कम्युनिटी के अंदर हम लोगों को इस चीज के लिए ट्रेंड कर सकें कि वो कैसे इस हेल्प उनकी कर सकते हैं।

#Thethermometer

आशुतोष: अगर सामान्य आदमी के पास फंड है, जमीप है और वो कुछ समाज सेवा करना चाहता है। ऐसा सेटअप बनाना चाहता है तो कम से कम कितनी जमीन चाहिए, कितनी लागत पड़ेगी कि चलाए रख सके?
डॉ. गोयल: यह निर्भर करता कि किस लेवल की सुविधा दे रहे हैं। एक साधारण मकान से लेकर यह 100 बेड तक की भी हो सकती है, 200 रूम की भी हो सकती है। हालांकि बड़ी फैसिलिटी हमारे यहां अब इंडिया में शुरू नहीं हुई है क्योंकि उसमें खर्च बहुत ज्यादा है और उसकी मेंटेनेंस कॉस्ट और भी अधिक। अभी कुछ 100 बेड, 50 बेड के भी चल रहे हैं। निजी तौर पर चलाने के लिए कम से कम 50 लोग चाहिए क्योंकि प्रशासनिक खर्च बहुत है। स्टाफ रखना पड़ता है। बिजली, बिल्डिंग के खर्चे हैं।

आशुतोष: पूरे सेटअप पर महीने में आपका खर्च कितना आ जाता होगा?
डॉ. गोयल: सच पूछें तो मैं अभी कमा नहीं रहा हूं इसमें। मैं खर्चे की बात कर रहा हूं। खर्च में बहुत सारे फैक्टर काम करते हैं। जमीन किस शहर, किस एरिया में है और क्वालिटी ऑफ़ कंस्ट्रक्शन क्या है? क्वालिटी ऑफ़ मैनेजमेंट, क्वालिटी ऑफ़ फैसिलिटी क्या है? तो यह बहुत ज्यादा वेरी करती है। सरकार ने भी फ्री बना रखे हैं। वो खाना भी फ्री देते हैं। पर यदि आप इसे बिजनेस मॉडल की तरह देखें तो क्वालिटी के हिसाब से वेरिएशन है। मतलब ये एक तरह से सेवा भी है और रोजगार भी। अब एक बुजुर्ग पर दो स्टाफ काम कर रहे हैं। एक स्टाफ की एवरेज तनख्वाह मैं ₹35,000 दे रहा हूं। उसके अलावा बिजली, पानी, रेंटल, फूड, केयर, सफाई, कपड़े हैं। सबको जोड़ें तो लाख ₹1वा लाख बैठ जाता है। घर में भी इतना ही खर्च करते हैं। मैं बुजुर्गों से ये कहूंगा कि जिनके पास अगर कोई साधन नहीं है तो अपनी पूंजी एफडी में डालें और उससे अच्छी क्वालिटी की लाइफ जिएं क्योंकि उनके जाने के बाद उसे कोई और ही इस्तेमाल करेगा।

#Thethermometer

आशुतोष: वो दो-तीन बात कौन सी है जो एल्डर्ली केयर के लिहाज से बहुत जरूरी है?
डॉ. गोयल: सबसे पहले तो हमें समझना पड़ेगा कि उनकी आवश्यकताएं बिल्कुल अलग हैं और हमें इस सोशल टैबू से अलग निकलना पड़ेगा कि जो आधुनिक एल्डरली केयर खुल रहे हैं वो बहुत अच्छे सेंटर हैं। उनमें केयर बहुत अच्छी होती है और उनमें वही पेरेंट्स आ रहे हैं जिनके बच्चे उनकी वाकई ही केयर करना चाहते हैं। तो यह सोसाइटी का जो टैबू है, उसे बाहर निकलना पड़ेगा क्योंकि हमें उनको स्पेशलाइज केयर देनी है। दूसरी बुजुर्गों ने सारी उम्र अपने बच्चों को, देश को दी है तो हमें वो जिंदगी उनको वापस रीपे करनी है। उनको वो डिग्निटी, वो प्यार, वो सम्मान वापस देना है। यह हमारी जिम्मेवारी बनती है कि हम उनको कैसे दे पाएं ताकि वह शांति से अपनी जिंदगी के अंतिम पड़ाव को खुशी, शांति और प्यार से बिताएं। एक भाषा ही सभी को समझ में आती है—प्यार की भाषा। आदमी, पशु, पौधों—सबको प्यार की भाषाएं समझ में आती है। हम उनको कितना प्यार दे सकते हैं। वो व्यवहार पे आपका वो आपके व्यवहार पर है। वो चीज हम जिस दिन दे पाएंगे, उस दिन बुजुर्गों की सेवा सफल हो जाएगी।

(जारी)

प्रस्तुति: अजय वर्मा

पहली कड़ी पढ़ें—https://www.swasthbharat.in/the-thermometer-attention-must-be-paid-to-the-problems-of-the-elderly-dr-ramesh-goyal/
दूसरी कड़ी पढ़ें—https://www.swasthbharat.in/the-thermometer-how-to-care-for-the-elderly-at-home-dr-goyal/

Related posts

कोविड-19 प्रभावित इन 11 राज्यों में अभी तक कोई मौत नहीं

Ashutosh Kumar Singh

मीडिया के दरकते भरोसे को बचाएं कैसे

admin

आओ शुरू करें, स्वास्थ्य की बात गांधी के साथ

Ashutosh Kumar Singh

Leave a Comment