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दिल्ली होम्योपैथिक बोर्ड में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप

दिल्ली होम्योपैथिक बोर्ड में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप

पूर्व चेयरमैन डॉ. के. के. जुनेजा के खिलाफ गंभीर शिकायतें
जांच समिति ने भी आरोपों की पुष्टि की

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। इन दिनों दिल्ली होम्योपैथिक बोर्ड में हुई वित्तीय अनियमितताओं समेत प्रशासनिक लापरवाही से हुई हानि का मामला गरम है। मामला तब उजागर हुआ जब इस बारे में कुछ होम्योपैथिक चिकित्सकों ने तत्कालीन अरविंद केजरीवाल सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज से लिखित शिकायत 5 जून 2023 को की। आरोप था कि बोर्ड के चेयरमैन डॉ. के. के. जुनेजा और उनकी टीम वित्तीय अनियमितताओं को अंजाम दे रही है। डॉ. जुनेजा खुद करीब 35 सालों से इस पद पर काबिज रहे हैं।

आरोपों के मुताबिक डॉ. जुनेजा बोर्ड द्वारा संचालित एक फार्मेसी कॉलेज के छात्रों को पैसा लेकर पास करवा दिया। बोर्ड सदस्यों में भी डॉ. जुनेजा के ही लोग रहे हैं जिनके वोट का समर्थन उन्हें आसानी से मिल जाता था। बोर्ड की गतिविविधियों के नाम पर सरकारी अनुदान तो बटोरते ही रहे, विभिन्न संस्थाओं को स्टॉल लगाने की अनुमति देकर भी धन उगाही करते रहे। इन सब आरोपों का ज्ञापन सौंपने के सालभर बाद सुस्त सरकार की नींद टूटती है और जांच की बात सामने आती है।

सूत्रों के मुताबिक इस शिकायत के सन्दर्भ में दिल्ली सरकार के आयुष निदेशालय ने कार्रवाई करते हुए तत्काल प्रभाव से गैर क़ानूनी रूप से नियुक्त रजिस्ट्रार डॉ. सिम्मी गुलाटी को 14 जून 2024 को टर्मिनेट कर दिया और 10 सितम्बर 2024 को नए रजिस्ट्रार का प्रभार दिल्ली सरकार के संयुक्त सचिव विजेंद्र कुमार को दिया गया। डॉ. गुलाटी की नियुक्ति का किस्सा भी अजीब है। उन्हें नवंबर 2019 में एड हॉक तौर पर एक साल के लिए रजिस्ट्रार नियुक्त किया गया था जबकि यह काम बिना चयन प्रक्रिया के हुआ था। इस पद की वैकेंसी 2020 में हुई थी। पुन: एक साल का सेवा विस्तार मिला। इसकी अवधि भी नवंबर 2023 में समाप्त हो गई फिर भी बिना उचित विभागीय काररवाई हुए आगे भी काम करती रहीं।

दिल्ली होम्योपैथिक एक्ट 1956 के तहत चेयरमैन के पद का दुरुपयोग को देखते हुए आयुष निदेशालय द्वारा एक तीन सदस्यीय जाँच समिति २१ जून २०२४ को बनाई गई जिसमें डॉ.मनोज शामकुवर, डॉ. शगुफ्ता नसरीन और पंकज नरूला थे। समिति ने जांच शुरू की और उसने अपनी जांच में पाया है कि दिल्ली होम्योपैथिक बोर्ड के पूर्व चेयरमैन डॉ.के.के.जुनेजा ने कुल 91 लाख 24 हजार 41 रुपये अवैध तरीके से खर्च किए। जाँच समिति के अनुसार यह राशि 08 जुलाई 2022 से 14 जून 2024 के दौरान दिल्ली होम्योपैथिक बोर्ड के खाते से निकाले और खर्च किए गए हैं। उल्लेखनीय है कि दिल्ली सरकार के आयुष निदेशालय में तात्कालीन निदेशक डॉ. राजकुमार मनचंदा एवं उपनिदेशक डॉ. वीरेंद्र शर्मा की अनदेखी से सरकारी प्रक्रिया और दिल्ली होम्योपैथिक एक्ट 1956 के प्रावधानों को नज़रंदाज़ कर मनमाने तरीक़े से बोर्ड के रजिस्ट्रार डॉ. सिम्मी गुलाटी की नियुक्ति की गई और चेयरमैन और रजिस्ट्रार द्वारा कोष का गलत इस्तेमाल होता रहा। जाँच दल ने पाया कि डॉ. जुनेजा ने रजिस्ट्रार डॉ. सिम्मी गुलाटी के साथ मिलकर महज दो वर्षों में ही बोर्ड के 91 लाख से ज्यादा रुपए उड़ा दिए।
बताते चलें कि डॉ. जुनेजा विगत दो दशकों से बोर्ड में लगातार चेयरमैन बने हुए थे और दिल्ली होम्योपैथिक बोर्ड के बैंक खाते का दुरुपयोग करते रहे। बताया जाता है कि दिल्ली होम्योपैथिक बोर्ड के चुनाव में धांधली के कारण वे इतने वर्षों से बोर्ड में चेयरमैन की कुर्सी पर क़ाबिज़ थे और निरंकुश तरीक़े से कार्य करते आ रहे थे।

सूत्र बताते हैं कि यदि इनके पूरे कार्य अवधि की जाँच हो तो वित्तीय घोटाला करोड़ों में निकल सकता है। जाँच समिति ने इस मामले में दिल्ली सरकार के तत्कालीन आयुष निदेशक डॉ.राजकुमार मनचंदा तथा उपनिदेशक डॉ.वीरेंद्र शर्मा की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। जाँच समिति ने पाया है कि दिल्ली बोर्ड का कार्यकाल पूरा हो जाने के बाद और सरकार के मुख्य सचिव नरेश कुमार के कार्यकाल बढ़ाने से इनकार करने बाद भी डॉ. जुनेजा बतौर चेयरमैन कार्य करते रहे और बोर्ड का पैसा मनमाने तरीके से खर्च करते रहे।

फिलहाल स्थिति यह है कि दिल्ली सरकार ने बोर्ड के पूर्व चेयरमैन डॉ. जुनेजा, तत्कालीन आयुष निदेशक डॉ. राजकुमार मनचंदा तथा उप निदेशक डॉ. वीरेंद्र शर्मा पर शिकंजा कस दिया है। इधर होम्योपैथिक चिकित्सकों ने बोर्ड के शीघ्र पुनर्गठन की मांग की है ताकि होम्योपैथिक के विकास में कोई बाधा न आए। जांच समिति ने अपने सात सूत्री निष्कर्ष में भी आरोपों को सही पाया। इसी आधार पर दिल्ली सरकार के एंटी करप्शन विभाग ने बोर्ड का भी इस साल नोटिस दिया था।

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