नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। आयुष (Ayush) के लिए 2025 कई मायनों में बदलाव का साल साबित हुआ। आयुष मंत्रालय भी मानता है कि यह साल भारत की साक्ष्य-आधारित, जन-केंद्रित और वैश्विक स्तर पर एकीकृत पारंपरिक स्वास्थ्य सेवा की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंचाने का साक्षी रहा है। ऐतिहासिक नीतिगत पहलों और विश्व स्तरीय अवसंरचना विस्तार से लेकर ऐतिहासिक वैश्विक सहयोग और जन स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों तक, इस वर्ष आयुष प्रणालियों ने वंचित से मुख्यधारा की ओर निर्णायक रूप से अग्रसर होकर प्रगति की है। विकसित भारत@2047 की परिकल्पना के अनुरूप, मंत्रालय ने अनुसंधान, विनियमन, डिजिटल एकीकरण और अंतरराष्ट्रीय विश्वसनीयता को सुदृढ़ करते हुए पारंपरिक चिकित्सा में भारत के नेतृत्व को मजबूत किया, साथ ही यह सुनिश्चित किया कि समग्र स्वास्थ्य सेवा के लाभ देश भर में और उससे परे भी लाखों लोगों तक पहुंचें। पढ़ते हैं इसकी पहली किस्त…
आयुष: CARI की अत्याधुनिक अनुसंधान सुविधा
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिल्ली के रोहिणी में नए केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान (सीएआरआई) भवन की वर्चुअल रूप से आधारशिला रखी। 2.92 एकड़ में फैले इस अत्याधुनिक परिसर में 187 करोड़ की लागत से 100 बिस्तरों वाला अनुसंधान अस्पताल, विशेष क्लीनिक, उन्नत प्रयोगशालाएं और प्रशिक्षण सुविधाएं होंगी। दशकों तक किराए के परिसर से संचालित होने के बाद अब इस संस्थान का यह एक महत्वपूर्ण विस्तार है। प्रधानमंत्री ने पारंपरिक चिकित्सा में भारत के बढ़ते वैश्विक नेतृत्व, आयुष वीजा के बढ़ते चलन और राष्ट्र के वैश्विक स्वास्थ्य एवं कल्याण राजधानी बनने की क्षमता का उल्लेख किया। पंचकर्म, क्षार सूत्र और जलौकावचरण जैसे उपचारों के साथ-साथ आधुनिक निदान सुविधाओं से लैस आधुनिक बुनियादी ढांचे सहित नया सीएआरआई परिसर आयुर्वेद अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार है।
आयुष: अंतरराष्ट्रीय यूनानी सम्मेलन
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने यूनानी दिवस के अवसर पर केंद्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान परिषद (सीसीआरएम) द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। इसमें उन्होंने हकीम अजमल खान को श्रद्धांजलि अर्पित की और इस बात पर बल दिया कि सदियों पुराने ज्ञान पर आधारित यूनानी चिकित्सा को वैश्विक स्तर पर स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए नवाचार को अपनाना होगा। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भारत में यूनानी शिक्षा, अनुसंधान और स्वास्थ्य संस्थानों का विश्व का सबसे बड़ा नेटवर्क उपस्थित है। उन्होंने यूनानी चिकित्सा को मुख्यधारा की स्वास्थ्य सेवा में एकीकृत करने के लिए अनुसंधान, सहयोग और ज्ञान के आदान-प्रदान के महत्व को भी रेखांकित किया।
आयुष: महाकुंभ में श्रद्धालुओं की सेवा
प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान आयुष सबसे विश्वसनीय और व्यापक रूप से सुलभ स्वास्थ्य सेवा केंद्रों में से एक बनकर उभरा है। ओपीडी, मोबाइल स्वास्थ्य इकाइयों, स्वास्थ्य केंद्रों और योग सत्रों के माध्यम से 9 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों ने इसकी सेवाओं का लाभ उठाया है। 12.1 लाख लाभार्थियों की पिछली उपलब्धियों को पार करते हुए आयुष ने अपनी उपस्थिति को विशेष रूप से बढ़ाया है- मेले के मैदान में 24/7 20 ओपीडी, 90 से अधिक डॉक्टर, 150 स्वास्थ्यकर्मी और समर्पित मोबाइल इकाइयां तैनात की गई थी। जहां योग सत्रों ने श्रद्धालुओं को आकर्षित किया तो प्रमुख अखाड़ों में संतों की विशेष जांच की गई। 10 हजार आयुष रक्षा किट वितरित हुए तो हजारों तीर्थयात्रियों के लिए एक सप्ताह तक स्वास्थ्य शिविर चला। 25 हजार औषधीय पौधों का वितरण किया गया जिससे औषधीय पौधों की खेती के प्रति जागरूकता को बढ़ावा मिले।
आयुष: इंडोनेशिया से साथ करार
25 जनवरी 2025 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की उपस्थिति में दोनों देशों ने भारत और इंडोनेशिया ने पारंपरिक चिकित्सा गुणवत्ता आश्वासन पर एक समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान हुआ। समझौता ज्ञापन में तकनीकी आदान-प्रदान, प्रशिक्षण कार्यक्रम, अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भागीदारी और पारस्परिक रूप से सहमत क्षेत्रों में विस्तारित सहयोग सहित संयुक्त पहलों की रूपरेखा दी गई है। यह आधुनिक, साक्ष्य-आधारित प्रारूप के भीतर पारंपरिक चिकित्सा को आगे बढ़ाने की साझा प्रतिबद्धता का उदाहरण है।
आयुष: WHO के साथ ICD-11 अपडेट
WHO द्वारा आईसीडी-11 के अपडेट ने आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी चिकित्सा के लिए एक समर्पित मॉड्यूल को आधिकारिक रूप से शामिल करके पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। इससे पारंपरिक चिकित्सा स्थितियों के साथ-साथ इनकी व्यवस्थित वैश्विक रिपोर्टिंग संभव हो सकेगी। यह नया मॉड्यूल दोहरी कोडिंग को सक्षम बनाता है, डेटा संग्रह को बढ़ाता है और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को मजबूत करता है। यह विकास विश्व स्तर पर पारंपरिक चिकित्सा की दृश्यता, विश्वसनीयता और नैदानिक प्रासंगिकता को बढ़ाता है, जिससे देशों को समग्र और साक्ष्य-आधारित पद्धतियों को आधुनिक स्वास्थ्य देखभाल प्रारूप में एकीकृत करने में सहायता मिलती है।
आयुष: भारत के हिस्से पांच गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड
‘देश का प्रकृति परीक्षण अभियान’ का पहला चरण पांच गिनीज विश्व रिकॉर्ड के साथ एक ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ संपन्न हुआ। इस अभियान ने एक करोड़ के लक्ष्य से कहीं अधिक 1.29 करोड़ प्रकृति आकलन दर्ज किए और किसी स्वास्थ्य पहल से संबंधित प्रतिज्ञाओं की सबसे अधिक संख्या और सबसे बड़े ऑनलाइन फोटो और वीडियो एल्बम के लिए वैश्विक रिकॉर्ड बनाया। इस पहल ने साक्ष्य-आधारित आयुर्वेद और व्यक्तिगत स्वास्थ्य में भारत के नेतृत्व को मजबूत किया है, जिससे पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक स्वास्थ्य प्रणालियों के साथ गहराई से एकीकृत करने का मार्ग प्रशस्त हुआ।
आयुष: योग महोत्सव 2025 का उद्घाटन
आयुष राज्य मंत्री प्रताप राव जाधव ने दिल्ली में योग महोत्सव 2025 का उद्घाटन किया। यह 11वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (आईडीवाई) के लिए आधिकारिक 100 दिनों के काउंटडाउन का प्रतीक है। इस कार्यक्रम में योग संगम और योग उद्यानों से लेकर हरित योग और योग अनप्लग्ड तक 10 अनूठी पहलों का अनावरण किया गया। इसका उद्देश्य आईडीवाई 2025 को अब तक का सबसे व्यापक और समावेशी उत्सव बनाना था। अंतराष्ट्रीय योग दिवस हैंडबुक 2025 का विमोचन भी हुआ। आयुष मंत्री ने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में योग की महत्वपूर्ण भूमिका और पिछले दशक में इसके वैश्विक प्रभाव का उल्लेख किया।
आयुष: पारंपरिक चिकित्सा के लिए उत्कृष्टता केंद्र
बैंकॉक में आयोजित बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने पारंपरिक चिकित्सा के अनुसंधान और प्रसार को बढ़ावा देने के लिए एक उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना की घोषणा की। उन्होंने बिम्सटेक देशों में कैंसर देखभाल के क्षेत्र में प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के लिए भारत के समर्थन की भी घोषणा की, जिससे क्षेत्रीय सहयोग के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में जन स्वास्थ्य को सुदृढ़ किया जा सके। यह पहल वर्तमान शैक्षणिक साझेदारियों और आयुष छात्रवृत्ति योजना के आधार पर पारंपरिक चिकित्सा में भारत-थाईलैंड सहयोग को मजबूत करने के लिए तैयार है, जिससे पिछले पांच वर्षों में बिम्सटेक देशों के 175 छात्रों को लाभ मिला है। नए उत्कृष्टता केंद्र से आयुर्वेद, थाई पारंपरिक चिकित्सा और अन्य पारंपरिक प्रणालियों में संयुक्त अनुसंधान, विकास और ज्ञान के आदान-प्रदान में तेजी आने की आशा है।
आयुष: गांधीनगर में विश्व होम्योपैथी दिवस
आयुष मंत्रालय ने विश्व होम्योपैथी दिवस को गांधीनगर में एक भव्य दो दिवसीय सम्मेलन के साथ मनाया, जिसमें भारत और विदेश से 8 हजार से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘होम्योपैथी में शिक्षा, अभ्यास और अनुसंधान’ था और इसमें पैनल चर्चा, प्रदर्शनियां, वैज्ञानिक सत्र और देश का सबसे बड़ा उद्योग प्रदर्शन शामिल था। इस सम्मेलन ने साक्ष्य-आधारित अनुसंधान, शिक्षा और जन जागरूकता के माध्यम से होम्योपैथी के विस्तार के प्रति भारत ने अपनी प्रतिबद्धता दोहरायी। सम्मेलन के प्रमुख प्रकाशनों में सम्मेलन स्मारिका, आठ प्रकाशन, नए सीसीआरएच ई-पोर्टल और औषधि परीक्षण पर एक वृत्तचित्र शामिल थे।
आयुष: दिल्ली में WHS क्षेत्रीय बैठक का आयोजन
दिल्ली में विश्व स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन की क्षेत्रीय बैठक में वैश्विक स्वास्थ्य समानता के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में पारंपरिक चिकित्सा का उल्लेख किया गया जिसमें समग्र और साक्ष्य-आधारित पारंपरिक पद्धतियों तक पहुंच बढ़ाने पर एक महत्वपूर्ण सत्र हुआ। यह आयोजन दिसंबर 2025 में संपन्न दूसरे डब्ल्यूएचओ पारंपरिक चिकित्सा वैश्विक शिखर सम्मेलन से पहले किया गया था। वैश्विक स्वास्थ्य नेताओं के आने से इस बैठक से अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूती मिलने और विश्व स्तर पर सतत, जन-केंद्रित स्वास्थ्य सेवा को बढ़ावा देने में भारत की केंद्रीय भूमिका को सुदृढ़ करने की उम्मीद बंधी थी।
आयुष: जिनेवा में GFTM की बैठक
पारंपरिक चिकित्सा मित्रों के समूह (जीएफटीएम) की छठी बैठक जिनेवा में आयोजित की गई जिसमें वैश्विक स्वास्थ्य प्रणालियों में पारंपरिक चिकित्सा के एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए कई देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सभा को संबोधित करते हुए, आयुष सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने राष्ट्रीय आयुष मिशन, आयुष आरोग्य मंदिरों, विस्तारित बीमा कवरेज और अनुसंधान सहयोग जैसी पहलों के माध्यम से साक्ष्य-आधारित पारंपरिक चिकित्सा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और जीनोमिक्स जैसे उभरते क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए, उन्होंने सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज और सतत विकास प्राप्त करने में पारंपरिक चिकित्सा की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया।
आयुष: अंतरराष्ट्रीय योग दिवस
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विशाखापत्तनम में 11वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर विश्व के सबसे बड़े योग सम्मेलन का नेतृत्व किया, जिसमें तीन लाख लोगों ने भाग लिया। इस योग दिवस पर योगान्ध्र अभियान जैसी पहल में दो करोड़ से अधिक नागरिकों ने भाग लिया और कई विश्व रिकॉर्ड बनाए। इनमें जनजातीय छात्रों द्वारा किया गया सामूहिक सूर्य नमस्कार प्रदर्शन भी शामिल है। आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने श्विक जन स्वास्थ्य आंदोलन के रूप में योग के विकास पर बल दिया और 10 राष्ट्रीय प्रमुख कार्यक्रमों की घोषणा की।
आयुष: आयुष नवाचारों को वैश्विक मानक के रूप में मान्यता
डब्ल्यूएचओ की “पारंपरिक चिकित्सा में एआई” पर ऐतिहासिक तकनीकी रिपोर्ट आयुष प्रणालियों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को एकीकृत करने में भारत की अग्रणी भूमिका को दिखाया जिसमें आयुष ग्रिड, आयुर्जेनोमिक्स, भविष्यसूचक निदान उपकरण और साही, नमस्ते और आयुष अनुसंधान पोर्टल जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसी उपलब्धियों को मान्यता दी गई है। भारत को पारंपरिक ज्ञान डिजिटल पुस्तकालय (टीकेडीएल) शुरू करने वाला पहला देश बताते हुए रिपोर्ट इस बात पर बल देती है कि प्रकृति-आधारित निदान से लेकर हर्बल फॉर्मूलेशन के जीनोमिक डिकोडिंग तक, एआई-संचालित अनुप्रयोग किस प्रकार पारंपरिक चिकित्सा का आधुनिकीकरण कर रहे हैं और इसकी वैश्विक प्रासंगिकता का विस्तार कर रहे हैं। जान लें कि भारत के आयुष बाजार का मूल्य 43.4 अरब डॉलर है।
आयुष: होम्योपैथी अनुसंधान के लिए मणिपाल से समझौता
केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद ने मणिपाल स्थित मणिपाल वायरोलॉजी संस्थान (एमआईवी) के सहयोग से अक्टूबर में “जैव सुरक्षा और प्रकोप सिमुलेशन प्रशिक्षण” शीर्षक से पांच दिवसीय आवासीय कार्यशाला का आयोजन किया। इसका उद्देश्य अनुसंधान वैज्ञानिकों में जैव सुरक्षा जागरूकता, प्रकोप से निपटने की तैयारी और प्रतिक्रिया क्षमताओं को बढ़ाना था। कार्यशाला में 30 वैज्ञानिकों ने भाग लिया। सीसीआरएच के महानिदेशक डॉ. सुभाष कौशिक अंतर-संस्थागत सहयोग और महामारियों के प्रबंधन में होम्योपैथी की भूमिका पर बल दिया। सीसीआरएच और एमएएचई के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुआ।
आयुष: राष्ट्रीय होम्योपैथी सम्मेलन का आयोजन
राष्ट्रीय होम्योपैथी मानसिक स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान (एनएचआरआईएमएच), कोट्टायम ने विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के उपलक्ष्य में अक्टूबर में राष्ट्रीय होम्योपैथी सम्मेलन का आयोजन किया। “सेवाओं तक पहुंच- आपदाओं और आपात स्थितियों में मानसिक स्वास्थ्य” विषय पर आधारित इस सम्मेलन में होम्योपैथी विशेषज्ञ, मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर और शोधकर्ता एकत्रित हुए। वैज्ञानिक चर्चाओं में आपदा मानसिक स्वास्थ्य, मनोरोग आपात स्थितियां, सरल, अनुसंधान ढांचे और विभिन्न मानसिक विकारों के केस-आधारित होम्योपैथिक प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित किया गया। स्नातकोत्तर शोध प्रस्तुतियों ने अकादमिक चर्चाओं को समृद्ध किया। सम्मेलन में आपदा और आपातकालीन मानसिक स्वास्थ्य देखभाल में एक पूरक घटक के रूप में होम्योपैथी पर प्रकाश डाला।
आयुष: कोलकाता में 400 सीटों का छात्रावास
आयुष राज्य मंत्री ने कोलकाता स्थित राष्ट्रीय होम्योपैथी संस्थान में 400 सीटों वाले स्नातक छात्रों के छात्रावास का उद्घाटन किया। यह संस्थान की स्वर्ण जयंती के उपलक्ष्य में इसके बुनियादी ढांचे में एक महत्वपूर्ण वृद्धि है। इस अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने एनआईएच के उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकास की जानकारी देते हुए बढ़ती शैक्षणिक और रोगी देखभाल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए वर्तमान में जारी परियोजनाओं को समय पर पूरा करने पर बल दिया। उन्होंने संस्थान के साथ जुड़ाव को मजबूत करने के लिए एक पूर्व छात्र कक्ष के निर्माण को प्रोत्साहित किया और छात्रों और संकाय सदस्यों से स्वास्थ्य सेवा में नवाचार और करुणा के लिए प्रयास करने का आग्रह किया।
आयुष: हर्बल मेडिसिन कार्यशाला
आयुष मंत्रालय और पीसीआईएम एंड एच द्वारा गाजियाबाद में आयोजित तीन दिवसीय डब्ल्यूएचओ-आईआरसीएच कार्यशाला का समापन 17 देशों की सक्रिय भागीदारी के साथ हुआ। इस कार्यशाला में हर्बल औषधियों की सुरक्षा, विनियमन और प्रभावकारिता पर केंद्रित तकनीकी सत्र, व्यावहारिक प्रशिक्षण और सांस्कृतिक आदान-प्रदान शामिल थे। सचिव वैद्य राजेश कोटेचा और डब्ल्यूएचओ-आईआरसीएच के अध्यक्ष डॉ. किम सुंगचोल द्वारा उद्घाटित इस कार्यशाला में डब्ल्यूएचओ-आईआरसीएच कार्य समूहों में भारत के नेतृत्व को दर्शाया गया और आयुष सुरक्षा पोर्टल और ई-औषधि जैसे प्रमुख डिजिटल नियामक उपकरणों का प्रदर्शन किया गया।
आयुष: योग विशेषज्ञों—किसानों को सम्मान
आयुष मंत्रालय ने लाल किले में आयोजित होने वाले 79वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में भाग लेने वाले 200 विशिष्ट अतिथियों- 100 योग स्वयंसेवकों और 100 शीर्ष प्रदर्शन करने वाले औषधीय पौध उत्पादकों-के लिए एक विशेष स्वागत समारोह का आयोजन किया। केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव और सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने योग संवर्धन और औषधीय पौध की सतत खेती में उनके महत्वपूर्ण योगदान की सराहना करते हुए एक स्वस्थ, आत्मनिर्भर भारत को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका को रेखांकित किया। आयुष मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम में इन व्यक्तियों को राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक और पारंपरिक स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करने और समग्र विकास में आवश्यक भागीदार के रूप में सम्मानित किया गया।
आयुष: हर्बल औषधियों के लिए GMP मानक मजबूत
आयुष मंत्रालय और डब्ल्यूएचओ-एसईएआरओ ने संयुक्त रूप से मुंबई में हर्बल दवाओं के लिए अच्छी विनिर्माण कार्यप्रणाली (जीएमपी) पर चार दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला का शुभारंभ किया, जिसमें भूटान, थाईलैंड, श्रीलंका, नेपाल और भारत के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सीसीआरएएस द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में विशेषज्ञों के नेतृत्व में तकनीकी सत्र और डब्ल्यूएचओ-जीएमपी प्रमाणित सुविधाओं का दौरा शामिल है, जो उच्च गुणवत्ता वाली, सुरक्षित और प्रभावी हर्बल दवाओं के उत्पादन में भारत की मजबूत क्षमताओं को उजागर करता है। अधिकारियों ने गुणवत्ता मानकों को आगे बढ़ाने में भारत के नेतृत्व की सराहना की।
(जारी)
