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महिला स्वास्थ्य के लिए महाराष्ट्र में Menopause Clinic चालू

महिला स्वास्थ्य के लिए महाराष्ट्र में मीनोपॉज क्लीनिक चालू

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। वर्षों से लाखों महिलाएं शारीरिक लक्षणों, भावनात्मक तनाव, हार्मोनल बदलाव और मासिक धर्म स्वास्थ्य से जुड़े अनकहे सवालों को अकेले ही झेलती रही हैं। अब आखिरकार उन्हें अपनी बात कहने का मौका मिल गया है। महाराष्ट्र ने 22 नगर निगमों और 33 जिलों के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में 510 विशेष रजोनिवृत्ति क्लीनिक (Menopause Clinic) शुरू किए हैं। अब तक 10 हजार से अधिक महिलाएं आ चुकी हैं और उनकी जांच, उपचार के बाद उचित मार्गदर्शन मिला, जबकि कुछ को विशेषज्ञों के पास भेजा गया। हर बुधवार को खुलने वाले ये क्लीनिक हार्मोनल स्वास्थ्य जांच, हड्डियों और हृदय स्वास्थ्य की जांच, मानसिक स्वास्थ्य सहायता, जीवनशैली संबंधी सलाह और जरूरत पड़ने पर दवाइयां उपलब्ध कराते हैं।

Menopause: होने वाली दिक्कतें

महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी अस्पतालों और शहरी स्वास्थ्य केंद्रों में देश के पहले विशेष मेनोपॉज क्लीनिक स्थापित किए हैं, ताकि जीवन के इस महत्वपूर्ण चरण में महिलाओं की शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा किया जा सके। अधिकारियों ने बताया कि इन क्लीनिकों में विशेषज्ञ चिकित्सा परामर्श, मानसिक स्वास्थ्य परामर्श, हड्डियों, हृदय और हार्मोनल स्वास्थ्य की जांच के साथ-साथ दवाएं और मार्गदर्शन एक ही स्थान पर उपलब्ध हैं। मेनोपॉज को एक संवेदनशील और अक्सर उपेक्षित अवस्था माना जाता है, जिसमें महिलाओं को शारीरिक परिवर्तन, मानसिक तनाव, हार्मोनल असंतुलन, हड्डियों से संबंधित समस्याएं, नींद संबंधी विकार और अवसाद का सामना करना पड़ता है। इस लंबे समय से महसूस की जा रही आवश्यकता को पहचानते हुए, राज्य सरकार ने विशेष रूप से महिलाओं के लिए मेनोपॉज क्लीनिक शुरू करने का निर्णय लिया है। स्वास्थ्य राज्य मंत्री मेघना बोरदिकर के मार्गदर्शन में मकर संक्रांति के अवसर पर 14 जनवरी को इस पहल का शुभारंभ किया गया। बोरदिकर ने कहा कि रजोनिवृत्ति कोई बीमारी नहीं बल्कि एक महिला के जीवन का एक प्राकृतिक चरण है। हालांकि इस दौरान महिलाओं को मजबूत शारीरिक और भावनात्मक सहारे की जरूरत होती है और इन क्लीनिकों की शुरुआत यह सुनिश्चित करने के लिए की गई है कि उन्हें उचित सलाह, उपचार और सम्मान मिले।

Menopause क्लिनिक का इतिहास

मालूम हो कि भारत में पहला रजोनिवृत्ति क्लिनिक 2001 में कोलकाता में स्थापित किया गया था-हेल्थ प्वाइंट नर्सिंग होम के तत्वावधान में अपूर्वा रजोनिवृत्ति क्लिनिक। हैदराबाद में कई प्रतिष्ठित अस्पताल और क्लीनिक रजोनिवृत्ति के लिए विशेष सेवाएं प्रदान करते हैं, जहाँ हिंदी भाषी स्त्री रोग विशेषज्ञ हॉट फ्लैशेस, मूड स्विंग और अन्य समस्याओं का इलाज करते हैं। प्रमुख विकल्पों में Rainbow Hospitals (सिकंदराबाद) और CARE Hospitals (हाईटेक सिटी) शामिल हैं, जो हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी और परामर्श देते हैं। Rainbow Children’s Hospital & BirthRight में डॉ. शशिकला कोला और डॉ. भावना के जैसे विशेषज्ञ उपलब्ध हैं, जो हिंदी में परामर्श प्रदान करते हैं। CARE Hospitals में डॉ. अभिनया अल्लूरी रजोनिवृत्ति के विभिन्न चरणों के लिए उपचार प्रदान करती हैं। Dr. Shilpa Women’s Clinic में डॉ. निकिता सांगोई मेनोपॉजल लक्षणों के लिए परामर्श देती हैं। इसके अलावा हैदराबाद के प्रमुख मल्टी-स्पेशलिटी अस्पतालों में भी रजोनिवृत्ति के लिए समर्पित गाइनक टीम होती है जो हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी, शारीरिक और मनोवैज्ञानिक परामर्श और पोषण तथा जीवनशैली में बदलाव की सलाह दी जाती है। याद रहे कि 44-45 वर्ष की आयु के आसपास रजोनिवृत्ति के लक्षण शुरू होने पर विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित माना गया है।

Menopause: लक्षण और इलाज

जब किसी महिला को एक वर्ष तक पीरियड्स नहीं आते हैं तो यह की समस्या पैदा होती है। इससे पहले और मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के स्तर में उतार चढ़ाव होते रहते हैं, क्योंकि महिला के अंडाशय हार्मोन उत्पादन के स्तर को सामान्य बनाने की लगातार कोशिश में लगे रहते हैं। इसके लक्षण किसी भी महिला के लिए दर्द और परेशानियों से भरे हो सकते हैं।
हॉट फ्लैशेस: अचानक से शरीर में गर्माहट महसूस करना इसके सबसे शुरुआती लक्षणों में से एक हैं। फाइटोएस्ट्रोजेन पौधे से उत्पन्न हार्मोन हैं जो मेनोपॉज के कारण होने वाले हार्मोनल परिवर्तनों को आंशिक रूप से वापस सामान्य बना सकते हैं। सोया-आधारित खाद्य पदार्थों में भरपूर मात्रा में फाइटोएस्ट्रोजेन पाए जाते हैं। इसलिए टोफू जैसे दूसरे सोया-आधारित खाद्य पदार्थों का सेवन करने से हॉट फ्लैश से निपटने में मदद मिल सकती है। हॉट फ्लैश को दूसरे भी ढेरों सप्लीमेंट्स की मदद से दूर किया जा सकता है। इसके अलावा सप्ताह में तीन बार कम से कम 20 मिनट तक व्यायाम करने से भी हॉट फ्लैश को कम किया जा सकता है। लगातार व्यायाम करने से शरीर में कूप-उत्तेजक हार्मोन और ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन की मात्रा में कमी आती है। साथ ही तैलीय, मसालेदार, फास्ट फूड्स और शराब के सेवन आदि से भी बचना चाहिए।
स्तनों का कोमल होना: स्तनों में कोमलता और सूजन होना मेनोपॉज के दूसरे सबसे सामान्य लक्षण हैं। स्तनों के सूजन और दर्द को कम करने के लिए आपके डॉक्टर कुछ प्रभावशाली दवाओं का सेवन करने की सलाह दे सकते हैं। कुछ जड़ी बूटियां जैसे ब्लैक करेंट तेल और इवनिंग प्रिमरोज तेल इन लक्षणों से राहत दिलाने में मददगार साबित हो सकते हैं।
योनि में बदलाव: एस्ट्रोजन का स्तर कम होने से योनि के स्तर पतले होने लगते हैं और योनि स्राव कम हो जाते हैं। योनि का सूखापन और जलन सेक्सुअल इंटरकोर्स के दौरान दर्द का कारण बन सकते हैं और सेक्स को अप्रिय भी बना बना सकते हैं। नियमित यौन उत्तेजना योनि लोच में मदद कर सकता है।
अनियमित रक्तस्राव: जैसे ही कोई महिला पेरिमेनोपॉज (Perimenopause) से गुजरती है, उसका गर्भाशय थोड़ा-थोड़ा सिकुड़ने लगता है। इस स्थिति में एंडोमेट्रियम पूर्वानुमानित मासिक धर्म के लिए शेड बनाना बंद कर देता है। मेनोपॉज के बाद काफी महिलाएं स्पॉटिंग या अनियमित रक्तस्राव कि शिकायत करती हैं जो कुछ दिनों तक हल्का या भारी मात्रा में रहता है। मेनोपॉज के बाद रक्तस्राव या स्पॉटिंग कैंसर या किसी दूसरी गंभीर स्वास्थ्य समस्या के कारण भी हो सकता है।
यूरिनरी लीकेज: 50-65 वर्ष की लगभग 30 फीसद से अधिक महिलाओं को यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस होता है। एस्ट्रोजन का स्तर कम होने से यूरिनरी लीकेज की समस्या पैदा हो सकती है। लेजर वेजाइनल टाइटनिंग प्रक्रिया यूरिनरी लीकेज को ठीक करने का सबसे बेहतरीन इलाज है। यह एक न्यूनतम इनवेसिव प्रक्रिया है जो योनि की मांसपेशियों को मजबूत कर सकती है और सेक्स के दौरान होने वाले दर्द या यूरिनरी लीकेज जैसे लक्षणों से छुटकारा दिला सकती है।
वजन बढ़ना: मेनोपॉज के बाद मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है जिसके कारण महिलाओं का वजन बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है। मेनोपॉज के दौरान वजन को कम करने के लिए उन्हीं उपायों को अपनाना चाहिए जिन्हे सामान्य जीवन में वजन को कम करने के लिए अपनाया जाता है। वर्कआउट शेड्यूल सेट करें और सप्ताह में 3 से 5 दिन इसका सटीक पालन करें। साथ ही साथ अपनी जरूरत मुताबिक डाइट में कैलोरी और पोषक तत्वों को शामिल करें।
नींद नहीं आना: मेनोपॉज के बाद पसीना आने और हॉट फ्लैश होने के कारण नींद नहीं आती है। लेकिन कभी-कभी हार्मोन शिफ्ट होने के कारण भी हर रात एक ही समय पर जगा हुआ महसूस करती हैं या नींद नहीं आती है। नींद नहीं आने के कारण थकावट और निराशा हो सकती है। इससे राहत पाने के लिए रोजाना रात में सोने से पहले कुछ देर के लिए मेडिटेशन कर सकती हैं। इससे मन बिलकुल शांत हो जाएगा जिससे बहुत आसानी से नींद आ जाएगी। ठंडे या गर्म पानी से स्नान करने से शरीर के तापमान में बदलाव आता है जिससे सुकून भरी नींद आती है।

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