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Lok Sabha: केंद्र ने किया आयुष बुनियादी ढांचे का विस्तार

Lok Sabha: केंद्र ने किया आयुष बुनियादी ढांचे का विस्तार

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। भारत सरकार ने 2014-15 में राष्ट्रीय आयुष मिशन (NAM) की केंद्र प्रायोजित योजना आरम्भ की, जिसका कार्यान्वयन राज्य सरकारों के माध्यम से किया जाना है। इसका उद्देश्य आयुष (Ayush) प्रणालियों के समग्र विकास और संवर्धन के लिए उनके प्रयासों में सहायता करना है। इसमें राज्य वार्षिक कार्य योजनाओं (SAAP) के माध्यम से प्राप्त प्रस्तावों के अनुसार देश के विभिन्न भागों में 50, 30, 10 बिस्तरों वाले एकीकृत आयुष अस्पतालों (IAH) और आयुष औषधालयों की स्थापना के लिए सहायता प्रदान करना शामिल है। इसके तहत कुल 203 आईएएच और 383 आयुष औषधालयों की स्थापना को स्वीकृति दी गई है। यह जानकारी आयुष राज्य मंत्री प्रताप राव जाधव ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

आयुष: आयुर्वेद अनुसंधान को बढ़ावा

श्री जाधव ने बताया कि आयुष मंत्रालय 2021-2022 से आयुर्ज्ञान योजना नाम से एक केंद्रीय क्षेत्र योजना लागू कर रहा है। इस योजना के तीन घटक हैं (i) आयुष में क्षमता निर्माण और सतत चिकित्सा शिक्षा (CME), (ii) आयुष में अनुसंधान और नवाचार और (iii) आयुर्वेद जीवविज्ञान एकीकृत स्वास्थ्य अनुसंधान। (एबीआईएचआर) को भी 2023-2024 से तीसरे घटक के रूप में इस योजना में शामिल किया गया है। केंद्रीय क्षेत्र योजना होने के कारण, यह योजना किसी विशेष राज्य के लिए नहीं है। इस योजना के आयुष और एबीआईएचआर में अनुसंधान एवं नवाचार (आर एंड आई) घटक के तहत, इस योजना के दिशानिर्देशों में निहित प्रावधानों के अनुसार अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों के संचालन के लिए पात्र संगठनों को वित्तीय सहायता दी जाती है। अनुसंधान एवं नवाचार और एबीआईएचआर घटकों के तहत, पिछले तीन वर्षों (2022-2023 से 2024-2025) के दौरान आयुर्वेद में कुल 16 (आर एंड डी) परियोजनाओं को सहायता प्रदान की गई है। इसके अतिरिक्त, आयुष मंत्रालय के अधीन केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS) देश भर में स्थित अपने 30 केंद्रों के माध्यम से और विभिन्न विश्वविद्यालयों, अस्पतालों और संस्थानों के साथ सहयोगात्मक अध्ययनों के माध्यम से भी अनुसंधान गतिविधियां संचालित करती है। सीसीआरएएस ने पिछले तीन वर्षों में 189 परियोजनाएं पूरी की हैं। परिषद ने 31 जनवरी 2026 तक 53 परियोजनाएं पूरी कर ली हैं और 232 परियोजनाएं अब भी जारी हैं।

आयुष दवाओं के बारे में जागरूकता

एक अन्य प्रश्न पर श्री जाधव ने जानकारी दी कि आयुष मंत्रालय ने आयुष ग्रिड के तहत आयुष अस्पताल प्रबंधन सूचना प्रणाली (AHMIS) जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं, ताकि चिकित्सकों और फार्मासिस्टों द्वारा आयुष केंद्रों में दवाओं की उपलब्धता का डिजिटलीकरण और निगरानी की जा सके। श्री जाधव ने जानकारी दी कि एनएएम के तहत, राज्य सरकारों को आयुष पद्धति के सामर्थ्य के बारे में समाज को जागरूक करने के लिए सहायता प्रदान की जा रही है। इन पहलों में आयुष आधारित निवारक स्वास्थ्य देखभाल पद्धतियों को बढ़ावा देने और समुदायों को स्वस्थ जीवन शैली अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु जनसंचार माध्यमों का उपयोग किया जाता है। इसके अतिरिक्त, व्यवस्थित आयुष जन स्वास्थ्य कार्यक्रमों के माध्यम से विभिन्न जनसंपर्क गतिविधियों को भी समर्थन दिया जा रहा है, जिनका उद्देश्य शिविरों का आयोजन करके समाज को जागरूक करना और अन्य आयुष स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ उचित रेफरल लिंकेज के माध्यम से आयुष पद्धतियों की सामर्थ्य का उपयोग करते हुए सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का समाधान करना है। इसके द्वारा एकल उपचारों के रूप में अथवा पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के पूरक के रूप में निवारक, प्रोत्साहक, उपचारात्मक और पुनर्वास स्वास्थ्य देखभाल सेवाएं प्रदान की जाती हैं।

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