नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। केंद्र सरकार ने देश में खाद्य परीक्षण प्रणाली को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। यह काम भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के माध्यम से किया जाता है। लोकसभा (Loksabha) में यह जानकारी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने लिखित उत्तर में दी। उन्होंने इसमें बताया कि परीक्षण व्यवस्था के अंतर्गत एफएसएसएआई ने खाद्य नमूनों के विश्लेषण हेतु राष्ट्रीय परीक्षण एवं अंशांकन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड से मान्यता प्राप्त 259 प्रयोगशालाओं तथा अपील संबंधी नमूनों के विश्लेषण के लिए 24 रेफरल खाद्य प्रयोगशालाओं का उपयोग करती है। खाद्य परीक्षण प्रणाली को सुदृढ़ बनाने वाली एसओएफटीईएल योजना, जिसमें मोबाइल खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला (MFTL) की व्यवस्था भी शामिल है, एफएसएसएआई की एक प्रमुख पहल है। इसका उद्देश्य राज्य खाद्य प्रयोगशालाओं को उन्नयन करना, सूक्ष्मजीव विज्ञान सुविधाओं की स्थापना करना तथा मोबाइल खाद्य परीक्षण वैनों की तैनाती करना है।
सुरक्षित मातृत्व का हुआ प्रयास
एक अन्य प्रश्न पर स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान की नवीनतम जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 2016 में इसकी शुरुआत से लेकर अब तक 7.91 करोड़ से अधिक गर्भवती महिलाओं को प्रसवपूर्व देखभाल सेवाएं प्राप्त हुईं और 1.24 करोड़ से अधिक उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान की गई। नमूना पंजीकरण प्रणाली (SRS) के अनुसार भारत का मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) 2014-16 में प्रति एक लाख जीवित जन्मों पर 130 से घटकर 2022-24 में 87 हो गया, अर्थात 43 अंकों की कमी दर्ज की गई। NFHS-4 (2015-16) के 58.6 प्रतिशत की तुलना में NHFS-6 (2023-24 ) प्रथम तिमाही के दौरान प्रसवपूर्व पंजीकरण बढ़कर 76.2 प्रतिशत हो गया। भारत में संस्थागत प्रसव NFHS-4 के 78.9 प्रतिशत से बढ़कर NFHS-6 में 90.6 प्रतिशत हो गया।
नि:शुल्क दवाओं की आपूर्ति
एक अन्य प्रश्न पर श्रीमती पटेल ने जानकारी दी कि भारत का फार्मास्युटिकल्स एंड मेडिकल डिवाइसेस ब्यूरो (PMBI), जो प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (PMBJP) की कार्यान्वयन एजेंसी है, आईटी-सक्षम आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन प्रणाली, स्टॉक की स्थिति की नियमित समीक्षा, मांग पूर्वानुमान और समय पर पुनःपूर्ति के माध्यम से जन औषधि केंद्रों में आवश्यक दवाओं सहित दवाओं की उपलब्धता की लगातार निगरानी करता है, जिसमें मुंबई में संचालित केंद्र भी शामिल हैं। मंत्रालय आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों में आने वाले रोगियों के जेब खर्च को कम करने के लिए निःशुल्क औषधि सेवा पहल (FDSI) शुरू की है। इसके अंतर्गत उप स्वास्थ्य केंद्र (SHC) में 113, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में 179, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में 301, उप-जिला अस्पताल में 318 और जिला अस्पताल में 381 दवाएं उपलब्ध कराती है।
सिकल सेल उन्मूलन मिशन
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने लोकसभा में बताया कि मंत्रालय देश से सिकल सेल रोग को समाप्त करने के लिए राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन (NSCAEM) चला रहा है। इस मिशन के तहत 17 जनजातीय बहुल राज्यों में 0 से 40 वर्ष आयु वर्ग के लोगों की जांच की जा रही है। यह जांच जिला अस्पताल से लेकर आयुष्मान आरोग्य मंदिर तक सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में की जा रही है। सरकार का उद्देश्य रोग की समय पर पहचान करना और उचित उपचार उपलब्ध कराना है। नड्डा ने कहा कि 26 जुलाई 2026 तक देश के जनजातीय क्षेत्रों में 7.25 करोड़ से अधिक लोगों की जांच की जा चुकी है। केवल महाराष्ट्र में ही 1.11 करोड़ से अधिक लोगों की जांच हुई है। यह मिशन जनजातीय समाज के स्वास्थ्य में सुधार लाने की दिशा में एक अहम कदम है।
स्वास्थ्य बजट 1 लाख करोड़
स्वास्थ्य क्षेत्र में बजट को लेकर सदन में उठाए गए एक सवाल के जवाब में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने लोकसभा में कहा कि भारत सरकार लगातार स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य पर खर्च बढ़ा रही है। मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2017-18 में विभाग का बजट 47,353 करोड़ था। यह बढ़कर 2026-27 के बजट अनुमान में 1,01,709 करोड़ हो गया है। इस अवधि में बजट में 114.79 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। जाधव ने बताया कि सरकार का उद्देश्य देश के हर नागरिक तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना है। बढ़ा हुआ बजट अस्पतालों, स्वास्थ्य सेवाओं, दवाओं, चिकित्सा सुविधाओं और जनकल्याणकारी योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायता करेगा। इससे देश की स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत होगी और लोगों को बेहतर उपचार तथा स्वास्थ्य सेवाएं हासिल होंगी।
बच्चों के लिए पौष्टिक आहार
एक और सवाल का जवाब देते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने बताया कि मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 के तहत बच्चों और महिलाओं को अतिरिक्त पोषण उपलब्ध कराया जाता है। इस योजना के अंतर्गत टेक होम राशन (टीएचआर), सुबह का नाश्ता और गर्म पका हुआ भोजन दिया जाता है। छह से तेईस महीने तक के बच्चों के लिए टेक होम राशन आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से दिया जाता है। इसके वितरण में फेसियल रिकग्निशन सिस्टम का उपयोग किया जाता है। मंत्री ने कहा कि योजना के मुताबिक, छह से बारह महीने के बच्चों को 200 कैलोरी ऊर्जा और 8 से 10 ग्राम प्रोटीन दिया जाता है। एक से तीन वर्ष तथा तीन से छह वर्ष के बच्चों को 400 कैलोरी ऊर्जा और 15 से 20 ग्राम प्रोटीन उपलब्ध कराया जाता है। इसके साथ सात आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व भी दिए जाते हैं। ठाकुर ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य बच्चों में कुपोषण को कम करना और उनके स्वस्थ विकास को सुनिश्चित करना है।
राजस्थान में 72% महिलाओं में अनीमिया
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने लोकसभा में कहा कि महिलाओं में अनीमिया आज भी एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (एनएफएच-5, 2019-21) के अनुसार राजस्थान में गर्भवती महिलाओं में अनीमिया की दर 46.3 प्रतिशत है। वहीं 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की अनुसूचित जनजाति की महिलाओं में यह दर 61.6 प्रतिशत है। पटेल ने बताया कि राजस्थान के डूंगरपुर जिले में 15 से 49 वर्ष की सभी महिलाओं में अनीमिया की दर 72.6 प्रतिशत दर्ज की गई है, जबकि पूरे राज्य में यह दर 54.4 प्रतिशत है। सरकार अनीमिया की रोकथाम के लिए पोषण, आयरन की गोलियां और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर लगातार काम कर रही है।
