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कोरोना योद्धाः पुणे की हेमलता मांग-मांग कर भर रही हैं गरीबों का पेट   

कोरोना योद्धाओं ने आज देश को इस आपातकाल से उबारने में बहुत मदद की है। इन्हीं योद्धाओं में से एक हेमलता की कहानी लेकर आए हैं वरिष्ठ पत्रकार प्रसून लतांत

 

प्रसून लतांत, वरिष्ठ पत्रकार

नई दिल्ली/ एसबीएम

कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए देशभर में लॉकडाउन है। ऐसे में सभी लोग घरों में बंद है। इस बीच जिन लोगों का गुजारा ही रोज की कमाई से होता था उन्हें सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे ही भूखे प्यासे लोगों को महाराष्ट्र के पुणे जिले के वडगांव शेरी इलाके की एक चालीस वर्षीय सामान्य महिला हेमलता म्हस्के खोज-खोज कर चावल, दाल, तेल और मसाले की थैली दे रही हैं। पशु प्रेम और जन सरोकार के मुद्दे पर लेखन करने वाली हेमलता ने यह काम करने का सोचा तो उनके पास दूसरों को देने लायक अनाज नहीं था और लॉक डाउन की वजह से उनका भी रोजगार ठप है।

इस बावत उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने मित्रो को मदद के लिए अपील की। इसका सकारात्मक असर हुआ। मदद मिलनी शुरू हुई। परिणास्वरूप 100 से अधिक परिवारों को सप्ताह भर के लिए चावल, दाल, तेल और मसाले की देने में वह सफल हो सकीं।

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इस बावत हेमलता ने बताया कि गरीबों दशा उनसे नहीं देखी जा रही थी। इसलिए उन्होंने इस काम को करने का संकल्प लिया। सबसे पहले उन्होंने अपने आसपास के इलाकों में जोखिम मोल लेकर और परिवार के ताने सुन कर भी उन लोगों को खोजने निकली जो वास्तव में लॉकडाउन में परेशान हैं। उन्होंने उनकी सूची बनाई और अपने कुछ मित्रों को भेज दिया। एक मित्र ने उनको एक संस्था का संपर्क सूत्र दिया। दिल्ली की इस संस्था से हेमलता ने संपर्क किया तो उनकी सच्चाई पर भरोसा करते हुए हेमलता को एक संस्था ने सहयोग किया।

सहयोग मिलने से हेमलता और परिवारों को मुफ्त राशन देने में सफल हुईं। हेमलता ने इनकी मदद के लिए स्थानीय प्रशासन और विभिन्न संगठनों से संपर्क किया पर उन्हें निराशा ही हाथ लगी। बावजूद वह प्रयास कर रही हैं क्योंकि वह मानती हैं कि यह वैश्विक विपदा है, इसमें हरेक लोगों को असहाय लोगों की मदद के लिए प्रयास करने में पीछे नहीं रहना चाहिए।

कोरोना त्रासदी के दौरान हेमलता के प्रयासों को देखते हुए छत्तीसगढ़ के नवीन कदम नेटवर्क ने नारी शक्ति सम्मान से सम्मान से सम्मानित किया है। रचनात्मक लेखन के लिए हेमलता को तिलका मांझी राष्ट्रीय सम्मान और आचार्य लक्ष्मीकांत मिश्र राष्ट्रीय सम्मान भी मिल चुका है।

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