न्यू (स्वस्थ भारत मीडिया)। महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) के आयुक्त तुकाराम मुंढे के बयान के बाद निजी निजी मित्र की लूट पर नई बहस तेज हो गई है। मुंघे ने अस्पताल में उपयोग होने वाली वस्तुओं की खरीद-फरोख्त और सुपरमार्केट स्टॉक स्टॉक (एमआरपी) के बीच व्यापक अंतर पाया है। चोरों के साथ हो रही लूट को रोकने के लिए उन्होंने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की अपील की है। मेरे इस कदम को चिकित्सा उपकरण उद्योग ने भी समर्थन दिया है।
क्या पाया मुंडे ने
महाराष्ट्र एंड लैबोरेट्री एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के तहत काम करने वाली ‘प्राइज़ मॉनिटरिंग रिज़र्स यूनिट’ (MSPMRU) ने एक व्यापक सर्वेक्षण किया है, जिसमें समुद्र तट पर स्थित समुद्र तट पर समुद्र तट और मेडिकल बाज़ार की असलियत सामने आई है। इसे देखकर मुंढे ने पाया कि IV इन्फ्यूजन सेट (ग्लूकोज चढ़ाने वाली नली) को अस्पताल वाले 11 रुपये में खरीदकर मरीज से 325 रुपये बसूलते हैं। इसी तरह कैथेटर (पेशाब या फ़्लोरल ट्यूब) की खरीद मूल्य ₹29 तो रोगी से शुल्क ₹310 यानी लगभग 954 प्रतिशत। सामान्य सिरिंज की खरीद कीमत ₹6.75, मरीज़ से आवास ₹57 और लाभ लगभग 748 प्रतिशत। हाल यह है कि जब रोगी अस्पताल में भर्ती होकर जीवन और मृत्यु का शिकार हो जाता है तब बाहरी परिवार को जो पर्ची मिलती है, उस पर कोई विवाद नहीं होता और न ही खरीदकर ले आता है। अस्पताल में भर्ती मरीज़ों के लिए बाहरी दवा या बिक्री का सामान ख़रीदना नहीं होता। यह बनाया गया नियम है कि सामान केवल अस्पताल के इन-हाउस मेडिकल स्टोर से ही लिया जाएगा। वहां पर कंपनी से जुड़कर डिब्बों पर 10 से 20 गुना ज्यादा एमआरपी छपाई दी जाती है। अस्पताल में उसे काउडियों के भाव की खरीद होती है और लाचार तीमारदार से पूरी एमआरपी की छूट मिलती है। स्टूडियो के दाम पर तो फिर भी कुछ सरकारी नियंत्रण है, लेकिन सिरिंज, ग्लव्स, ड्रिप सेट और स्टूडियो के नाम पर बनने वाले इन भारी-भरकम बिलों पर आज तक सख्ती नहीं लगी।
उद्योग जगत भी मुंडे के साथ
इस बीच वैल्यूएक्ट सुपरमार्केट की समीक्षा करने के लिए मेडिकल उपकरण उद्योग ने समर्थन किया है क्योंकि एक राज्य सर्वेक्षण में उनके खरीद शेयर और स्टॉक स्टॉक शेयर (एमआरपी) के बीच व्यापक अंतर पाया गया है। एसोसिएशन ऑफ इंडियन मेडिकल इंजीनियरिंग एसोसिएशन (एआईएमईडी), जो विभिन्न क्षेत्रों में 1,200 से अधिक वैज्ञानिकों का प्रतिनिधित्व करने वाला एक एम्ब्रेला लैबोरेटरी है, जिसमें शामिल वैज्ञानिक उपकरण, उपकरण, डायग्नोस्टिक्स और इम्प्लांट शामिल हैं, ने कहा कि निष्कर्षों ने मेडिकल उपकरण के लिए एक अलग मूल्य की आवश्यकता पर प्रकाश डाला है। एमआईएम मेड के समन्वयक राजीव नाथ ने कहा कि किसी भी व्यवसाय के लिए लाभ लाभ समझ में आता है, लेकिन अतार्किक अन्वेषणखोरी अनुचित है।
सख्त कदम प्रशासन
‘स्वस्थ भारत’ के सुपरस्टार आशुतोष कुमार सिंह ने कहा है कि उनके संगठन ने क्लासिकल फर्स्ट कंट्रोल मेडिसिन मैक्सिमम ग्रेडियंट क्वालिटी कंपनी को मंजूरी देकर इसका विरोध किया था। लेकिन देर हो चुकी है, अँधेरा नहीं। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय से साधुवाद की पेशकश करते हुए अपील की है कि इस मामले को चुनने से लेते हुए कड़े कदम उठाएं। एक संसदीय समिति ने 20 साल पहले से अधिक आरक्षण लेने पर भी जुर्माना लगाया।
