स्वस्थ भारत मीडिया
समाचार / News

Health: स्वास्थ्य अनुसंधान को मज़बूत करने के लिए ज्यादा बजट

Health: स्वास्थ्य अनुसंधान को मज़बूत करने के लिए ज्यादा बजट

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया।) केंद्र सरकार ने स्‍वास्‍थ्‍य (Health) अनुसंधान के लिए न केवल बजट बढ़ाया है बल्कि अनुसंधान अनुदानों को सुलभ बनाने के उद्देश्य से नई योजनाएँ एवं पहल भी शुरू की हैं। जैसे भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के लिए बजटीय आवंटन बजट अनुमान 2024-25 में 2,732.13 करोड़ से बढ़ाकर बजट अनुमान 2025-26 में 3,125.50 करोड़ तथा बजट अनुमान 2026-27 में 4,000.00 करोड़ कर दिया गया है। 2026-27 के लिए यह आवंटन 2025-26 के संशोधित अनुमान 3,150.00 करोड़ की तुलना में लगभग 21 प्रतिशत की वृद्धि है। यह जानकारी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी। उन्होंने बताया कि आईसीएमआर ने कई रणनीतिक अनुसंधान वित्तपोषण योजनाएँ प्रारंभ की हैं जिसमें टॉप-टियर ग्लोबल लीडरशिप फंडिंग स्कीम, ICMR–NMC संयुक्त आमंत्रण, दिल्ली के तीन केन्‍द्रीय सरकारी मेडिकल कॉलेजों में आंतरिक अनुसंधान को सुदृढ़ बनाने हेतु आईसीएमआर पहल, अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) ने आईसीएमआर (आईसीएमआर) तथा गेट्स फाउंडेशन के सहयोग से उच्च प्रभाव वाले क्षेत्रों में प्रगति हेतु मिशन (महा)-मेडिकल टेक्नोलॉजी, आईसीएमआर क्लिनिकल केयर एक्सीलेंस इनिशिएटिव आदि है।

आयुष्मान योजना ने खर्च घटाया

एक अन्य सवाल पर डनहोंने जानकारी दी कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के अंतर्गत आर्थिक रूप से कमजोर करोड़ों परिवारों को प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवरेज प्रदान किया जाता है। इस योजना ने लोगों के जेब से होने वाले स्वास्थ्य व्यय को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। 30 जून तक योजना के अंतर्गत 37,413 सरकारी एवं निजी अस्पतालों के नेटवर्क के माध्यम से 12.69 करोड़ लोगों को अस्पताल में भर्ती होकर उपचार कराने को अधिकृत किया गया, जिसकी कुल राशि 1.92 लाख करोड़ है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य लेखा अनुमान 2022-23 के अनुसार कुल स्वास्थ्य व्यय में जेब से होने वाले स्वास्थ्य व्यय का अनुपात 2014-15 के 62.6 प्रतिशत से घटकर 2022-23 में 43.4 प्रतिशत रह गया है। यह उल्लेखनीय कमी बताती है कि अब परिवारों को स्वास्थ्य सेवाओं पर अपनी जेब से अपेक्षाकृत काफी कम खर्च करना पड़ रहा है।

ड्रोन पहल से लाभ

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने जानकारी दी कि आईसीएमआर की आई-ड्रोन पहल के अंतर्गत किए गए नए अध्ययन के अनुसार ड्रोन की सहायता से टीबी से संबंधित बलगम के नमूने ले जाने से दूर-दराज और दुर्गम क्षेत्रों में क्षय रोग के निदान से जुड़ी प्रक्रिया में लगने वाले समय और खर्च में काफी कमी आई है। यह अध्ययन तेलंगाना के यदाद्री-भुवनगिरी जिले में एम्स बीबीनगर और राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) के साथ मिलकर किया गया। इससे पता चला कि क्षय रोग की नैदानिक प्रक्रिया का औसत समय 15 दिन से घटकर 5 दिन हो गया, जबकि रोगियों का अपनी जेब से होने वाला औसत खर्च लगभग 9,451 रुपये से घटकर 91 रुपये हो गया जिससे क्षय रोग की नैदानिक सेवाओं तक समय पर पहुंच बेहतर हुई।

Related posts

पटना Aiims को फिर मिला बॉम्बे ब्लड ग्रुप का रक्त

admin

Good news : जन औषधि की गुणवत्ता को सराहा दूसरे देश के मंत्री ने

admin

किडनी ट्रांसप्लांट के गोरखधंधे का पर्दाफाश

admin

Leave a Comment