नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। आयुष राज्यमंत्री प्रतापराव जाधव के दिल्ली में ‘11वें आयुर्वेद दिवस 2026’ के उपलक्ष्य में आयोजित पूर्वावलोकन से आयुर्वेद दिवस से संबंधित देशव्यापी अभियान की शुरुआत हुई। आयुर्वेद दिवस का मुख्य कार्यक्रम 23 सितंबर को महाराष्ट्र के नागपुर में आयोजित किया जाएगा। इसका विषय “स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद” होगा, जो भारत की समृद्ध आयुर्वेदिक विरासत को भविष्य की बदलती स्वास्थ्य-सेवा संबंधी जरूरतों से जोड़ने के विजन को दर्शाता है।
विरासत में भविष्य के मौके
मंत्री जाधव ने इस तथ्य को रेखांकित किया कि दुनिया तेजी से बीमारी से बचाव वाली स्वास्थ्य सेवा (प्रिवेंटिव हेल्थकेयर), स्वस्थ जीवनशैली, पोषण, कल्याण और समग्र स्वास्थ्य की दिशा में बढ़ रही है। ये ऐसे क्षेत्र हैं, जिनमें भारत की परंपरा और अनुभव बेहद समृद्ध है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आयुर्वेद दिवस महज भारत की विरासत का उत्सव मनाने का मौका भर नहीं है, बल्कि इस विरासत को भविष्य की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों से जोड़ने का एक अवसर भी है। उन्होंने स्वास्थ्य सेवा से संबंधित एक ऐसे दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर दिया जिसमें स्वास्थ्य केवल बीमारियों के इलाज तक ही सीमित न हो, बल्कि इसमें स्वस्थ आदतें, सही खान-पान एवं दिनचर्या, मानसिक संतुलन और प्रकृति के साथ सामंजस्य भी शामिल हो।
तीन अहम क्षेत्र
उन्होंने इस वर्ष के आयुर्वेद दिवस अभियान को दिशा देने वाले तीन अहम क्षेत्रों के बारे में बताया: “बेहतर स्वास्थ्य संबंधी नतीजों के लिए एकीकृत स्वास्थ्य सेवा,” जिसमें बेहतर स्वास्थ्य संबंधी नतीजों के लिए इलाज की अलग-अलग पद्धतियों की विशेषज्ञता एवं खूबियों के सदुपयोग पर जोर दिया गया है, “आयुर्वेद में अनुसंधान, प्रमाण और नवाचार,” जिसमें आयुर्वेद को दुनिया भर में अधिक स्वीकार्यता दिलाने और भविष्य में उसके विकास हेतु अनुसंधान, प्रमाण और नवाचार को आवश्यक आधार के तौर पर अहमियत दी गई है और “समुदाय के कल्याण और टिकाऊ जीवनशैली के लिए आयुर्वेद,” जिसमें टिकाऊ जीवनशैली को बढ़ावा देने के साथ-साथ लोगों, परिवारों और समुदायों के कल्याण में आयुर्वेद की भूमिका पर जोर दिया गया है।
चहुंओर पहुंचे आयुर्वेद का संदेश
श्री जाधव ने आयुर्वेद के बारे में सही, प्रमाणों पर आधारित और आसान जानकारी लोगों तक पहुंचाने में मीडिया की अहम भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भले ही आयुर्वेद को बड़े पैमाने पर अपनाया गया है, लेकिन इससे जुड़ी गलतफहमियों को दूर करना और यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि लोगों को भरोसेमंद जानकारियां मिले। उन्होंने मीडिया से इस अभियान का समर्थन करने और आयुर्वेद का संदेश घरों, स्कूलों, कॉलेजों, जेन जी सहित सभी युवाओं तथा ग्रामीण व शहरी समुदायों तक पहुंचाने की अपील की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ‘11वां आयुर्वेद दिवस’ सरकारी कार्यक्रम से परे जाकर एक जन-आंदोलन और राष्ट्रीय स्वास्थ्य संचार अभियान का रूप ले। भारत के पारंपरिक ज्ञान और आज की स्वास्थ्य-सेवा संबंधी जरूरतों के बीच एक मजबूत संबंध बनाने पर जोर देते हुए श्री जाधव ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य परंपरा को ज्ञान से, ज्ञान को प्रमाण से, प्रमाण को नवाचार से और नवाचार को जन-कल्याण से जोड़ना होना चाहिए।
शोध—नवाचार पर फोकस
जयपुर स्थित राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (एनआईए) के कुलपति प्रोफेसर संजीव शर्मा ने ‘आयुर्वेद दिवस 2026’ की मुख्य विशेषताओं पर प्रकाश डाला। यह दिवस प्रमाणों पर आधारित आयुर्वेद, अनुसंधान एवं नवाचार, एकीकृत स्वास्थ्य-सेवा, सामुदायिक कल्याण और टिकाऊ जीवन शैली पर केन्द्रित होगा। उन्होंने इस अवसर के लिए योजनाबद्ध किए गए प्रमुख कार्यक्रमों की रूपरेखा भी बताई, जिसमें ‘राष्ट्रीय धन्वंतरि आयुर्वेद पुरस्कार 2026’ शामिल हैं। इसके अलावा एनआईए जयपुर में नए कार्यक्रम, औषधीय पौधों से संबंधित सुरक्षा डोजियर, त्वचा रोगों के लिए मानक उपचार दिशानिर्देश, आयुष सेवा क्षेत्र पर एक रिपोर्ट और आयुष विजन 2030 जैसी प्रमुख पहलों के साथ-साथ विभिन्न समझौता-ज्ञापनों (एमओयू) का आदान-प्रदान तथा अन्य गतिविधियां भी शामिल हैं।
