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एम्स ने तन्वी की मौत की जांच शुरू की

एम्स ने तन्वी की मौत की जांच शुरू की

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। हाल में ही तन्वी ना की 15 वर्षीय लड़की की मौत को लेकर दिल्ली स्थित एम्स पर लापरवाही के आरोप लगे थे। लापरवाही इस बात की कि करीब 14 साल तक एम्स ने सर्जरी के लिए समय नहीं दिया। अब संस्थान ने एक बयान में जानकारी दी कि एम्स, नई दिल्ली के निदेशक ने मामले का विस्तार से जांच करने, घटनाओं के पूरे क्रम की समीक्षा करने और तथ्यों को सामने लाने के लिए एक समिति बनाई है। बयान में कहा गया है कि समिति घटनाओं के पूरे क्रम, नैदानिक ​​​​रिकॉर्ड, जांच, दिए गए उपचार, विशेषज्ञ की राय और रोगी की मृत्यु से जुड़ी हुई बीमारी की जांच करेगी।

2012 से ही एम्स का चक्कर

मालूम हो कि जब तन्वी दो साल की थीं, तब उनके पिता पहली बार जन्म से दिल में छिद्र की बीमारी के इलाज के लिए एम्स, दिल्ली लेकर गए थे। इसके बाद एक दशक से ज्यादा समय तक अस्पताल के चक्कर, टेस्ट और सर्जरी को लेकर बातचीत चलती रही। परिवार का आरोप है कि होने वाली सर्जरी को बार-बार टाला गया जबकि एम्स का कहना है कि तन्वी का इलाज कर रही टीम ने 2017 में यह निष्कर्ष निकाला था कि उनके दिल में सुधार के लिए बहुत जटिल सर्जरी संभव नहीं थी। परिवार का कहना है कि वे पहली बार 10 अक्टूबर, 2012 को एम्स गए थे और अलग-अलग टेस्ट के लिए उन्हें अलग-अलग जांच के लिए भेजा था। उन्होंने आरोप लगाया कि सर्जरी पर चर्चा हुई और बाद में तारीखें भी बताई गईं, लेकिन सर्जरी कभी नहीं हुई।

जटिलता के कारण सर्जरी मुश्किल

जबकि एम्स ने कहा है कि 2013 में तन्वी के दिल से जुड़ी कई जांचें की गईं, जिनमें सीटी एंजियोग्राफी, जनरल एंजियोग्राफी और कार्डियक कथेटर शामिल थे। इलाज कर रही टीम ने 2017 में यह निष्कर्ष निकाला कि उसके दिल की मजबूती बहुत जटिल होने के कारण सर्जरी संभव नहीं थी। उसे मेडिकल इम्यूनिटी बिना सर्जरी के इलाज की सलाह दी गई थी। 31 जनवरी, 2014 को एम्स के एक अध्ययन में उनकी बीमारी का नाम “वीएसडी+ पल्मोनरी एट्रेसिया” (पल्मोनरी एट्रेसिया) दर्ज किया गया और  यूनिफोकलाइजेशन एंड कंड्यूट की प्रस्तावित सर्जरी बताई गई। इसकी लागत करीब 1.2 लाख रुपये बताई गई थी। इसमें चार ब्लड डोनर की जरूरत का भी जिक्र था। तन्वी जिस बीमारी से जूझ रही थी, वह जटिल और दुर्लभ है। वीएसडी यानी वेंट्रिकल सेप्टल डिवाइसेक्ट, दिल के सिद्धांत दो आकृतियाँ, जिसमें वेंट्रिकल कहा जाता है, के बीच की दीवार में एक छेद होता है। पल्मोनरी धमनी वह मुख्य रक्त वाहिका है, जो हृदय के हिस्सों से फेफड़े तक खून ले जाती है। पल्मोनरी एट्रेसिया में रक्त के प्रवाहित वेंट्रिकल से फेफड़े तक जाने का सामान्य मार्ग बंद हो जाता है या ठीक से विकसित नहीं होता है। जब पल्मोनरी एट्रेसिया के साथ वीएसडी भी हो, तो मामला अधिक जटिल हो जाता है। ऐसे में एक से ज्यादा ऑपरेशन की जरूरत भी हो सकती थी।

अंत में हुआ कार्डियक अरेस्ट

इस बारे में रिपोर्ट कहती है कि 24 अगस्त को तन्वी को एम्स में भर्ती कराया गया और हार्ट-लैंग ट्रांसप्लांट के लिए उनकी जांच की जा रही थी। एम्स के मुताबिक 1 सितंबर को दोपहर 2.50 बजे उनकी हालत गंभीर सायनोकोसिस हो गई। उसके खून में ऑक्सीजन का स्तर बहुत गिर गया जिससे उसकी त्वचा और दिमाग खराब हो गए। ऑक्सीजन सैचुरेशन करीब 48 प्रतिशत तक गिर गया। इसके बाद उसे हाईपॉक्सिक स्पेल हुआ, यानी उसके शरीर तक पहुंचने वाली ऑक्सीजन की मात्रा अचानक और बहुत कम हो गई। इसके बाद उसे कार्डियक अरेस्ट हुआ। करीब 3.30 बजे ऑक्सीजन सपोर्ट शुरू हुआ। इलाज कर रही मेडिकल टीम की ओर से तुरंत और लगातार राहत की कोशिशों के बावजूद बच्चा नहीं जा सका और सुबह 5.06 बजे उसे मृत घोषित कर दिया गया।

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