नई दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। 11वां आयुर्वेद दिवस देश और दुनिया भर में उत्साह के साथ मनाया गया। महाराष्ट्र के नागपुर में भव्य राष्ट्रीय समारोह आयोजित किया गया। इस वर्ष का विषय “स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद” था। इस कार्यक्रम में आयुष सेवा क्षेत्र पर रिपोर्ट और “आयुष विजन 2030” सहित महत्वपूर्ण सूचनाओं और दस्तावेजों को जारी किया गया। इसके साथ ही सीसीआरएएस-एजीनी वेब पोर्टल का भी लॉन्च किया गया। कार्यक्रम में स्वास्थ्य सेवा और जन स्वास्थ्य में आयुर्वेद की भूमिका तथा 2047 तक की कार्य योजना पर वैज्ञानिक सत्र भी आयोजित किए गए। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश भी हितधारकों ने भेजा।
स्वास्थ्य का आधार जीवनशैली
इस समारोह का वर्चुअल उद्घाटन आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने किया। मंत्री ने आयुर्वेद को भारत के स्वास्थ्य विभाग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा, “स्वास्थ्य का पहला केंद्र अस्पताल नहीं, हमारा घर है। स्वास्थ्य का पहला आधार दवा नहीं, हमारी जीवनशैली है।” उन्होंने “स्वस्थस्य स्वास्थ्य रक्षणम्, आतुरस्य विकार प्रशमनम्” के सिद्धांत का उल्लेख करते कहा कि आयुर्वेद उपचार के साथ-साथ स्वास्थ्य के संरक्षण को प्राथमिकता देता है। आयुष सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने इस बात पर जोर दिया कि आयुर्वेद का भविष्य इसके ज्ञान की परंपरा को वैज्ञानिक साक्ष्य, नवाचार और जन स्वास्थ्य के परिणामों से जोड़ने में निहित है। उन्होंने आयुर्वेद और अन्य स्वास्थ्य देखभाल नागरिकों के बीच सहयोग को बढ़ावा देते हुए अनुसंधान, गुणवत्ता, सुरक्षा और मानकीकरण को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।
जामनगर में वैज्ञानिक गतिविधियां
गुजरात के जामनगर में आयुर्वेद शिक्षण और अनुसंधान संस्थान (RTRA) ने आयुर्वेद दिवस पर जन-जागरूकता, स्वास्थ्य देखभाल, अनुसंधान और वैज्ञानिक गतिविधियों की एक महीने की श्रृंखला आयोजित की है। इनमें आयुर्वेद, स्वस्थ जीवनशैली, पोषण, निवारक स्वास्थ्य देखभाल और वैज्ञानिक अनुसंधान पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। ये गतिविधियां आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव और आयुष सचिव पद्मश्री वैद्य राजेश कोटेचा के मार्गदर्शन तथा आईटीआरए की निदेशक प्रोफेसर डॉ. तनुजा नेसरी के अभियानों से आयोजित की जा रही है।
पटना में भी आयोजन
आयुर्वेद दिवस के अवसर पर पटना के अगमकुआं स्थित क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान (RARI) में प्रदर्शनी-सह-मिनी एक्सपो और पारंपरिक खाद्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य आयुर्वेद, पारंपरिक एवं संतुलित खाद्य पदार्थ, मोटे अनाज (श्री अन्न) और स्वस्थ जीवनशैली से जुड़ी आदत के बारे में जागरूकता बढ़ाना था। कार्यक्रम का उद्घाटन ICMR-RMNIHR के निदेशक डॉ. कृष्णा पांडे ने किया। RARI के प्रभारी डॉ. बनमाली दास ने आयुर्वेद में वर्णित पारंपरिक और संतुलित खाद्य पदार्थों के महत्व पर प्रकाश डाला और संतुलित आहार में स्थानीय, सरसों और विविधतापूर्ण खाद्यान्नों की भूमिका पर जोर दिया। मिनी एक्सपो में स्थानीय खाद्य सामग्री, श्री अन्न (बाजरा) और स्वास्थ्यवर्धक गतिशील से तैयार पारंपरिक व संतुलित सब्जियों का प्रदर्शन किया गया। इस दौरान शिशुओं, उनके अंगों और आम लोगों के लिए स्वास्थ्य जांच और चिकित्सकीय परीक्षण भी किए गए। आवश्यकता के अनुसार आयुर्वेदिक दवा वितरित की गई।
चेन्नई—जयपुर में भी कार्यक्रम
राष्ट्रीय सिद्ध संस्थान (NIS), चेन्नई आयुर्वेद दिवस पर 18 से 25 सितंबर, 2026 तक अकादमी और जागरूकता कार्यक्रमों की एक श्रृंखला आयोजित कर रहा है। सप्ताह भर चलने वाले इस आयोजन का उद्देश्य आयुर्वेद के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देना, अंतःविषय शिक्षा को प्रोत्साहित करना और छात्रों, शोध अध्येताओं, स्वास्थ्य पेशेवरों और संकाय सदस्यों के बीच शैक्षणिक ज्ञान को मजबूत करना है। उधर जयपुर स्थित डीम्ड विश्वविद्यालय राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (NIA) ने 11वें आयुर्वेद दिवस के उपलक्ष्य में कार्यक्रमों की एक श्रृंखला का आयोजन किया। समारोह में भगवान धन्वंतरि की पारंपरिक पूजा के साथ-साथ विभिन्न जन जागरूकता, शैक्षिक और स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियां शामिल थीं। इस अवसर पर राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के प्रोफेसर संजीव शर्मा ने कहा कि आयुर्वेद केवल एक चिकित्सा पद्धति नहीं है, बल्कि स्वस्थ और संतुलित जीवन पर केंद्रित एक समग्र जीवनशैली है। उन्होंने निवारक स्वास्थ्य देखभाल, उचित आहार और जीवनशैली तथा स्वस्थ दैनिक दिनचर्या के प्रति अधिक जागरूकता के महत्व पर बल दिया।
