राष्ट्रपति ने एम्स बिलासपुर के पहले दीक्षांत समारोह को संबोधित किया
10,000 अतिरिक्त MBBS और PG सीटों के लिए 15,000 करोड़ रुपये: नड्डा
नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने बिलासपुर स्थित एम्स के पहले स्नातक बैच को संस्थान के पहले दीक्षांत समारोह में उपाधियां प्रदान कीं। यह संस्थान के विकास और देश में चिकित्सा शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवा में इसके योगदान के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने छात्रों से अपने आचरण, प्रतिबद्धता और सेवा के माध्यम से संस्थान की प्रतिष्ठा को बनाए रखने का आग्रह किया और उन्हें याद दिलाया कि चिकित्सा पेशे का मानवता के प्रति एक दायित्व है।
जरूरतमंदों को दें प्राथमिकता
राष्ट्रपति ने कहा कि छात्र अपने कार्य में लोगों की जरूरतों को प्राथमिकता दें, विशेषकर दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले उन लोगों को जिनकी विशेष स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच है। एम्स बिलासपुर की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए उन्होंने संस्थान और उसके स्नातकों से दुरस्थ चिकित्सा, विशेषज्ञ परामर्श, चिकित्सा कर्मियों के प्रशिक्षण और आधुनिक प्रौद्योगिकी के उपयोग सहित विभिन्न माध्यमों से इस क्षेत्र में तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में कार्य करने का आग्रह किया। राष्ट्रपति ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना की भूमिका पर भी प्रकाश डाला, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर स्वास्थ्य देखभाल का वित्तीय बोझ कम हुआ है। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत उपचार पर 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं।
नवाचार में बदलें अनुसंधान
राष्ट्रपति ने उनसे चिकित्सा पद्धतियों और स्वास्थ्य सेवाओं में हो रहे बदलावों के साथ तालमेल बनाए रखने और अनुसंधान को ऐसे नवाचारों में परिवर्तित करने का आग्रह किया जो लोगों के जीवन को बेहतर बनाते हैं। उन्होंने कहा, “चिकित्सा का क्षेत्र केवल विज्ञान और प्रौद्योगिकी का क्षेत्र नहीं है। यह वास्तव में करुणा और विश्वास का क्षेत्र भी है।” हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने स्नातकों की उपलब्धि पर उन्हें बधाई दी और हिमाचल प्रदेश तथा इसके पड़ोसी राज्यों, विशेष रूप से दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों के लोगों तक विशेष स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में एम्स बिलासपुर की निभाई जा रही महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।
12 साल में 16 एम्स बने: नड्डा
इस अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने एम्स बिलासपुर के पहले बैच के शैक्षणिक सफर के सफल समापन पर खुशी और गर्व व्यक्त किया। देश में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेजों की संख्या 384 से बढ़कर 800 से अधिक हो गई है, जबकि स्नातक चिकित्सा सीटों की संख्या 51,348 से बढ़कर 1.42 लाख हो गई है। उन्होंने बताया कि सरकार का लक्ष्य 2029 तक 75,000 स्नातक और स्नातकोत्तर चिकित्सा सीटें जोड़ना है, जिसमें 10,000 अतिरिक्त एमबीबीएस और स्नातकोत्तर सीटों के सृजन के लिए 15,000 करोड़ रुपये का आवंटन भी शामिल है। उन्होंने कहा कि जहां कई दशकों तक देश में केवल एक ही एम्स था, वहीं पिछले 12 वर्षों में 16 नए एम्स स्थापित किए गए हैं। श्री नड्डा ने एम्स बिलासपुर के बारे में बात करते हुए बताया कि संस्थान ने अपने प्रारंभिक लक्ष्य 750 बिस्तरों से आगे बढ़कर अब 776 बिस्तरों की क्षमता हासिल कर ली है, जिसमें 26 विशिष्टताएं और 15 सुपर विशिष्टताएं पूरी तरह से कार्यरत हैं। उन्होंने जटिल शल्य चिकित्सा प्रक्रियाओं, कार्डियक कैथेटराइजेशन, न्यूरोसर्जरी, व्यापक देखभाल, कैंसर देखभाल और रेडियोथेरेपी सेवाओं की उपलब्धता पर प्रकाश डाला और कहा कि यह प्रगति पिछले पांच वर्षों में हासिल की गई है।
एम्स बिलासपुर के बारे में
एम्स बिलासपुर ने जनवरी 2021 में एमबीबीएस के पहले बैच के प्रवेश के साथ अपने शैक्षणिक सफर की शुरुआत की, जिसके बाद 2022 में एलाइड हेल्थकेयर साइंसेज और नर्सिंग साइंसेज के पहले बैचों का प्रवेश हुआ। संस्थान का औपचारिक उद्घाटन अक्टूबर 2022 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में हुआ। 2024 से 2025 के दौरान संस्थान में 3 लाख से अधिक ओपीडी परामर्श दर्ज किए गए और 17,000 से अधिक लोगों को आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं प्रदान की गईं। यह दीक्षांत समारोह एम्स बिलासपुर की संस्थागत यात्रा में एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि इसका पहला बैच अकादमिक प्रशिक्षण से पेशेवर सेवा में कदम रख रहा है।
