नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। लैब में काम के दौरान संक्रमण होना या किसी रोगजनक का प्रयोगशाला से बाहर निकल जाना असामान्य जरूर है, लेकिन अभूतपूर्व भी नहीं। हाल ही रूस के साइबेरिया स्थित प्लेगरोधी लैब फले मामूली संक्रमण से एक् रिसर्चर की मौत हुई है। द लैंसेट माइक्रोब में प्रकाशित एक शोध पत्र, जिसका शीर्ष लैबरोटरी एक्वायर्ड इन्फेक्शंस एंड पैथोजंस इस्केप वर्लडवाइड बेटवीन 2000 एंड 2021: ए स्कोपिंग रीव्यू ने सार्वजनिक रूप से उपलब्ध वैज्ञानिक और मीडिया रिपोर्टों का विश्लेषण किया है। इसमें शोधकर्ताओं ने 51 अलग-अलग रोगजनकों से जुड़े 309 लैबरोटरी से फेले संक्रमण की 94 रिपोर्टें दर्ज कीं। इनमें आठ मौतें हुई थीं जिसमें दो मामलों में यरसनिया पेस्टिस यानी प्लेग पैदा करने वाले बैक्टीरिया से संक्रमण जुड़ा था।
21 साल में 16 मामले
रिपोर्ट के मुताबिक 2000 से 2021 के बीच प्रयोगशालाओं से रोगजनकों के 16 आकस्मिक रूप से बाहर निकलने की घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें एंथ्रेक्स पैदा करने वाले बैसिलस एंथ्रेसिस, सार्स कोव और पोलियो वायरस से जुड़ी तीन-तीन घटनाएं शामिल थीं। वहीं ब्रूसेला और फुट-एंड-माउथ डिजीज वायरस से जुड़ी दो-दो घटनाएं दर्ज की गईं। इसके अलावा चेचक का वायरस और एट5एनवन बर्ड फ्लू वायरस से जुड़ी एक-एक आकस्मिक घटना भी रिपोर्ट की गई। अध्ययन में दर्ज ये मामले इस बात की ओर ध्यान ले जाते हैं कि प्रयोगशालाओं में कड़े जैव-सुरक्षा उपायों के बावजूद रोगजनकों के आकस्मिक रूप से बाहर निकलने की घटनाएं इतिहास में दर्ज रही हैं। शोधकर्ताओं ने हालांकि महत्वपूर्ण सावधानी भी दर्ज की है। अध्ययन केवल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रिपोर्टों पर आधारित था, इसलिए वास्तविक घटनाओं की संख्या इससे अधिक हो सकती है। इसी कारण अध्ययन ने दुनिया भर में लैब से फैले और एक्सीडेंटल पैथोजेंस के बाहर निकलने की व्यवस्थित रिपोर्टिंग की जरूरत पर जोर दिया है। यह अध्ययन स्टुअर्ट डी ब्लैकसेल और उनके सह-लेखकों ने किया था। इसे 12 दिसंबर 2023 को ऑनलाइन प्रकाशित किया गया और बाद में द लैंसेट माइक्रोब में प्रकाशित किया गया था। बहरहाल जांच जारी है और एक बार फिर से रोगजनकों को रखने वाली प्रयोगशाला कठघरे में है।
टेस्ट ट्यूब टूटने की पुष्टि नहीं
WHO के प्रवक्ता क्रिश्टियन लिंडमियर ने 6 अक्टूबर को कुरसिव उजबेकिस्तान से बातचीत में कहा कि उपलब्ध अनौपचारिक जानकारी के आधार पर आम आबादी के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम कम दिखाई देता है। WHO के मुताबिक वह रूसी स्वास्थ्य अधिकारियों से घटना की परिस्थितियों, चल रहे प्रयोगशाला परीक्षणों और उनके परिणामों, संपर्कों की निगरानी और संभावित अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रभावों के बारे में जानकारी सत्यापित कर रहा है। हालांकि डबल्यूएचओ ने लैब-लीक की संभावना को प्रमाणित या खारिज नहीं किया है। संगठन का मौजूदा आकलन उपलब्ध सूचना पर आधारित प्रारंभिक आकलन है। रूस की घटना के बाद स्थानीय मीडिया और अन्य स्रोतों में दावा सामने आया कि महिला ने काम के दौरान न्यूमोनिक प्लेग बैक्टीरिया वाली टेस्ट ट्यूब तोड़ दी थी। रेडियो फ्री यूरोप-रेडियो लिबर्टी ने 5 अक्टूबर की अपनी रिपोर्ट में स्थानीय स्रोतों और साइबेरियाई स्वतंत्र मीडिया संस्थान लय्टी बैकला (पीपुल ऑफ बैकल) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए इस दावे का उल्लेख किया। रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट है कि इस दावे की रूसी अधिकारियों ने पुष्टि नहीं की है। रॉयटर्स ने भी लैब दुर्घटना की अफवाहों का उल्लेख किया है, लेकिन उसके मुताबिक रोस्पोत्रेबनादजोर ने ऐसी किसी दुर्घटना का प्रमाण नहीं पाया है।
निगरानी बढ़ाई गई
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक साइबेरिया की घटना के बाद कुछ अस्पतालों में नए मरीजों की भर्ती रोक दी गई है और कुछ सार्वजनिक कार्यक्रम रद्द किए गए हैं। कुछ जगहों पर मास्क पहनना भी जरूरी किया गया है। लॉकडाउन की चर्चा के बीच क्षेत्रीय गवर्नर इगोर कोब्जेव ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान ने भी अपनी सीमाओं पर स्वास्थ्य जांच और निगरानी बढ़ाने की बात कही है। न्यूमोनिक प्लेग ‘यर्सेनिया पेस्टिस’ नाम के बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है। यह फेफड़ों को प्रभावित करती है और संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से निकलने वाली बूंदों के जरिए फैल सकती है। इसके लक्षणों में अचानक तेज बुखार, सिरदर्द, कमजोरी, सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी और बलगम आना शामिल हो सकता है।
