नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्था भारतीय फार्माकोपिया आयोग (IPC) ने देश में दवा सुरक्षा, गुणवत्ता आश्वासन और क्षमता निर्माण संबंधी पहलों को मजबूत करने के लिए गोवा राज्य फार्मेसी परिषद (GSPC), भारतीय गुणवत्ता परिषद (QCI) और एचएलएल इंफ्रा टेक सर्विसेज लिमिटेड (HITES) के साथ समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।
दवा: GSPC से निगरानी मजबूत
आईपीसी और जीएसपीसी के बीच हुए समझौता ज्ञापन के तहत गोवा राज्य में फार्माकोविजिलेंस, दवाओं के तर्कसंगत उपयोग और फार्मासिस्टों के व्यावसायिक विकास के क्षेत्रों में सहयोग के लिए एक संरचित ढांचा तैयार किया गया है। इस सहयोग के अंतर्गत पंजीकृत फार्मासिस्टों के बीच भारत की राष्ट्रीय फ़ार्मुलेरी को बढ़ावा देना, भारत के फार्माकोविजिलेंस कार्यक्रम (पीवीपी) के तहत प्रतिकूल दवा प्रतिक्रिया (एडीआर) रिपोर्टिंग तंत्र को मजबूत करना, प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएं और सतत शिक्षा गतिविधियां आयोजित करना तथा दवा सुरक्षा, फार्माकोपियल मानकों और टिकाऊ फार्माकोपिया से संबंधित जागरूकता पहलों को सुगम बनाना शामिल है। समझौता ज्ञापन का उद्देश्य एडीआर निगरानी केंद्रों की स्थापना और उन्हें मजबूत करने में सहयोग देना तथा राज्य भर के स्वास्थ्य केंद्रों में व्यवस्थित रिपोर्टिंग और दस्तावेज़ीकरण प्रथाओं को बेहतर बनाना भी है।
दवा: QCI से गुणवत्ता
आईपीसी और क्यूसीआई के बीच हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन के तहत, दोनों संस्थानों ने गुणवत्ता संवर्धन, जन स्वास्थ्य जागरूकता और क्षमता निर्माण से संबंधित पारस्परिक हित के क्षेत्रों में सहयोग करने पर सहमति व्यक्त की है। इस सहयोग में प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों की संयुक्त योजना और कार्यान्वयन शामिल है, विशेष रूप से फार्माकोविजिलेंस और संबंधित विषयों के संबंध में, संस्थागत विशेषज्ञता और तकनीकी संसाधनों का उपयोग, और राष्ट्रीय गुणवत्ता और सुरक्षा उद्देश्यों के अनुरूप सहयोगी पहलों का विकास। समझौता ज्ञापन का उद्देश्य परियोजना-आधारित सहयोग को सुगम बनाने के लिए एक लचीला, गैर-बाध्यकारी ढांचा प्रदान करना है, जिसमें पारस्परिक रूप से सहमत कार्य आदेशों के माध्यम से विशिष्ट गतिविधियां की जाएंगी, साथ ही स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में गुणवत्ता आश्वासन और मानकीकरण के व्यापक जनादेश का समर्थन करना है। आईपीसी, फार्माकोविजिलेंस प्रणालियों को मजबूत करने, पेशेवर दक्षताओं को बढ़ाने और देश भर में दवा की गुणवत्ता और रोगी सुरक्षा के लिए समान मानकों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नियामक निकायों, पेशेवर परिषदों, गुणवत्ता संगठनों और सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के साथ संस्थागत साझेदारी को बढ़ावा देने के प्रयासों को जारी रखे हुए है।
दवा: MOU प्रासंगिक कदम
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) के संयुक्त सचिव श्री हर्ष मंगला ने देश भर में प्राथमिक और द्वितीयक स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावी कार्यान्वयन में नियामक क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। श्री मंगला ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए सचिव-सह-वैज्ञानिक निदेशक (आईपीसी) डॉ. वी. कलैसेल्वन और गोवा राज्य फार्मेसी परिषद तथा एनएबीटी, क्यूसीआई के प्रतिनिधियों को बधाई दी। उन्होंने समझौता ज्ञापन को संस्थागत साझेदारी की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक कदम बताया और साथ ही इस बात पर बल दिया कि दीर्घकालिक जन स्वास्थ्य लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता होगी। श्री मंगला ने आगे इस बात पर जोर दिया कि समझौता ज्ञापन केवल प्रतीकात्मक नहीं रहने चाहिए, बल्कि उनका वास्तविक अर्थों में उद्देश्यों की प्राप्ति में परिणत होना चाहिए। उन्होंने बताया कि आईपीसी ने अतीत में चार समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं, जो नियामक और व्यावसायिक सहयोग को मजबूत करने के प्रति उसकी निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
दवा: दवाओं पर ध्यान जरूरी
श्री मंगला ने आगे इस बात पर जोर दिया कि दवाओं और फार्मास्यूटिकल्स पर सर्वोच्च ध्यान देने की आवश्यकता है और रोगी सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने के लिए फार्मासिस्टों में जागरूकता बढ़ाना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने नीतिगत समर्थन, नियामक सुधारों और क्षमता निर्माण पहलों के माध्यम से फार्मास्यूटिकल और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र को मजबूत और विकसित करने के लिए भारत सरकार के निरंतर प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि समझौता ज्ञापन फार्मासिस्टों के प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और सतत व्यावसायिक शिक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणामों में समग्र सुधार में योगदान मिलेगा।
