नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के राष्ट्रीय संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा आयोग (NCAHP) ने देश में संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा शिक्षा की गुणवत्ता, एकरूपता और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता सुदृढ़ बनाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए डिप्लोमा इन मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलॉजी (DMLT) के लिए योग्यता आधारित पाठ्यक्रम पेश किया है। अभी डीएमएलटी संचालित कर रहे या आगे इसे चलाने वाले सभी संस्थानों को शैक्षणिक वर्ष 2026-27 से नए घोषित पाठ्यक्रम लागू करने की सलाह दी गई है, जबकि शैक्षणिक वर्ष 2027-28 से इसे अनिवार्य रूप से लागू करना होगा।
योग्यता आधारित शिक्षण
मिली जानकारी के मुताबिक दो वर्षीय डिप्लोमा इन मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलॉजी कार्यक्रम उन विद्यार्थियों के लिए तैयार किया गया है जिन्होंने किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से भौतिकी, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान विषयों के साथ विज्ञान संवर्ग में बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण की हुई है। यह पाठ्यक्रम पारंपरिक ज्ञान-आधारित शिक्षण से विस्तारित होकर योग्यता-आधारित शिक्षा प्रदान करने के अहम बदलाव को दर्शाता है। इसमें उन्नत नैदानिक प्रयोगशाला सेवा प्रदान करने के लिए आवश्यक ज्ञान, कौशल, मूल्य और दृष्टिकोण विकसित करने पर जोर दिया गया है। पाठ्यक्रम को कुशल मेडिकल लेबोरेटरी एसोसिएट्स तैयार करने हेतु संरचित किया गया है, जो प्रयोगशाला परीक्षण के पूर्व-विश्लेषणात्मक, विश्लेषणात्मक और इसके पश्चात-विश्लेषणात्मक चरणों का दायित्व सक्षमता से निभा सकें। साथ ही वे गुणवत्ता आश्वासन नियमों, रोगी सुरक्षा मानकों और नैतिक व्यावसायिक प्रथाओं का पालन सुनिश्चित करें।
सिलेबस का ब्योरा
राष्ट्रीय संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा आयोग ने इससे पहले 15 अक्टूबर 2025 को बैचलर ऑफ मेडिकल लेबोरेटरी साइंस (BMLS) और मास्टर ऑफ मेडिकल लेबोरेटरी साइंस (MMLS) की योग्यता संबंधी पाठ्यक्रम जारी किए थे, जिन्हें शैक्षणिक वर्ष 2026-27 से लागू किया जाना है। एनसीएएचपी ने विभिन्न संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा विषयों में 16 योग्यता-आधारित पाठ्यक्रम अधिसूचित किए हैं, जिन्हें शैक्षणिक वर्ष 2026-27 से अनिवार्य रूप से लागू किया जाएगा। ये पाठ्यक्रम निम्नलिखित हैः
अनुप्रयुक्त मनोविज्ञान और व्यवहारिक स्वास्थ्य
भौतिक चिकित्सा
ओप्टामीटर
पोषण और डायटेटिक्स
मेडिकल रेडियोलॉजी और इमेजिंग टेक्नोलॉजी
रेडियोथेरेपी
डायलिसिस थेरेपी प्रौद्योगिकी और डायलिसिस थेरेपी
स्वास्थ्य सूचना प्रबंधन
एनेस्थीसिया और ऑपरेशन थिएटर प्रौद्योगिकी
चिकित्सक सहयोगी
व्यावसायिक चिकित्सा
आपातकालीन चिकित्सा प्रौद्योगिकीविद् (पैरामेडिक), बर्न केयर प्रौद्योगिकीविद् और एडवांस्ड केयर पैरामेडिक
श्वसन प्रौद्योगिकी
चिकित्सा एवं मनोचिकित्सीय सामाजिक कार्य
चिकित्सा भौतिकी
परमाणु चिकित्सा प्रौद्योगिकी
पेशेवर होंगे तैयार
राष्ट्रीय संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा आयोग, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत स्थापित वैधानिक निकाय है, जिसका उद्देश्य देश भर में संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में शिक्षा एवं व्यावसायिक सेवाओं के मानकों को विनियमित और संचालित करना है। यह पहल अगले पांच वर्षों में एक लाख अतिरिक्त संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा पेशेवर तैयार करने की केंद्रीय बजट 2026-27 की घोषणा के अनुरूप है। इसके लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के मार्गदर्शन में, आयोग – राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राथमिकताओं और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप योग्यता-आधारित पाठ्यक्रम द्वारा संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा प्रशिक्षण को आधुनिक बनाने हेतु व्यापक उपाय कर रहा है। इस पाठ्यक्रम से ऐसे कुशल पेशेवरों तैयार होंगे, जिन्हें उन्नत नैदानिक अनुभव, मानकीकृत दक्षता और व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त होगा। इससे वे देश के भीतर संबद्ध स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों की बढ़ती मांग पूरी कर सकेंगे, साथ ही वैश्विक स्तर पर उन्हें रोजगार मिलने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
