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होम्योपैथी की ही शाखा है Electro-Homeopathy: हाईकोर्ट

होम्योपैथी की ही शाखा है Electro-Homeopathy: हाईकोर्ट

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। खबर पिछले दिनों की है लेकिन जरूरी है। केरलम हाई कोर्ट ने मेडिकल प्रैक्टिस और जनहित को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि इलेक्ट्रो-होम्योपैथी (Electro-homeopathy) स्वतंत्र चिकित्सा पद्धति नहीं बल्कि होम्योपैथी की ही एक शाखा है। इसलिए बिना कानूनी रजिस्ट्रेशन के इसके प्रैक्टिस की अनुमति नहीं दी जा सकती। इस क्षेत्र में प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सकों पर त्रावणकोर-कोचीन मेडिकल प्रैक्टिशनर्स एक्ट, 1953 तथा केरल स्टेट मेडिकल प्रैक्टिशनर्स एक्ट, 2021 के प्रावधान लागू होंगे।

कानूनी प्रक्रिया जरूरी

रिपोर्ट के अनुसार इसी माह अपने फैसले में न्यायमूर्ति ए. के. जयशंकरन नांबियार और न्यायमूर्ति प्रीता ए. के. की पीठ ने कहा कि मामले के पहले याचिकाकर्ता ने जो योग्यता प्राप्त की है, वह यदि मान्यता प्राप्त भी मानी जाए, तब भी वह होम्योपैथी की एक शाखा से संबंधित है। ऐसे में यदि वह इलेक्ट्रो-होम्योपैथी का अभ्यास करता है, तो उसे इन दोनों कानूनों के तहत ही विनियमित किया जाएगा। यदि कोई डॉक्टर इस पद्धति के तहत पंजीकृत नहीं है, तो राज्य और पुलिस प्रशासन को उसकी अवैध प्रैक्टिस को रोकने का पूरा अधिकार है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “ऐसा निष्कर्ष इस देश के लोगों के लिए खतरनाक होगा, क्योंकि यहां लोगों की जान दांव पर लगी है।” हाईकोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि चिकित्सा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में बिना उचित कानूनी निगरानी के किसी भी प्रकार की प्रैक्टिस की अनुमति देना आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

जानें इलेक्ट्रो-होम्योपैथी को

मालूम हो कि इलेक्ट्रो-होम्योपैथी 19वीं सदी की एक वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति है जिसे इतालवी रईस काउंट सीज़र मैटेई ने विकसित किया था। इसमें हर्बल औषधियों को समस्थिति के सिद्धांतों के साथ मिलाया जाता है। आधुनिक चिकित्सा इसे छद्म विज्ञान मानती है, फिर भी भारत, जर्मनी और फ्रांस जैसे देशों में इसका व्यापक रूप से प्रचलन है। नैदानिक ​​साक्ष्यों की कमी के कारण इलेक्ट्रो-होम्योपैथी को एक वैध चिकित्सा विज्ञान के रूप में मान्यता नहीं देते हैं। भारत में, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय इसे एक अनियमित, गैर-मान्यता प्राप्त प्रणाली के रूप में मान्यता देता है। हालांकि, सरकार इस प्रणाली के अभ्यास और शिक्षा की अनुमति देती है, और कई राज्य स्तरीय बोर्ड इसके पाठ्यक्रम को नियंत्रित करते हैं। NEHM जैसे संगठन इलेक्ट्रोपैथी चिकित्सकों को प्रशिक्षित करने के लिए डिप्लोमा पाठ्यक्रम और डिग्री (जैसे BEMS) प्रदान करते हैं।

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