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विदेशी दवाएं आ सकेंगी भारत, ड्राफ्ट पर रायशुमारी

विदेशी दवाएं आ सकेंगी, ड्राफ्ट पर रायशुमारी

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। विदेश से भारत आने वाली दवा ( Foreign medicines) को लेकर केंद्र सरकार ने नियमों में बदलाव का नया मसौदा जारी किया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने ड्रग्स रूल्स, 1945 के नियम 31 में संशोधन का मसौदा जारी करते हुए आम लोगों सुझाव मांगे हैं। नए नियम के मुताबिक भारत पहुंचने के समय उसकी एक्सपायरी 12 महीने बची होी चाहिए। अभी तक भारत में आयात की जाने वाली दवा की कुल शेल्फ लाइफ का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बचा होना जरूरी था। हालांकि बायोलॉजिकल दवाओं और रेडियो फार्मास्यूटिकल्स जैसी विशेष श्रेणी की दवाओं के लिए पुराना 60 प्रतिशत वाला नियम ही लागू रहेगा।

ड्राफ्ट: मरीजों तक आसान पहुंच

मंत्रालय की सूचना के मुताबिक इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि विदेश से आने वाली कई जरूरी दवाएं अब आसानी से भारत पहुंच सकेंगी। कई बार सिर्फ 60 प्रतिशत शेल्फ लाइफ की शर्त पूरी न होने के कारण अच्छी गुणवत्ता वाली दवाएं भी आयात नहीं हो पाती थीं। नयी व्यवस्था लागू होने पर मरीजों को जरूरी दवाएं समय पर मिलने की संभावना बढ़ेगी, दवाओं की कमी दूर होगी, सप्लाई बेहतर होगी, जिससे लागत भी कम हो सकती है। सरकार का कहना है कि इस बदलाव से ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा मिलेगा, दवा आपूर्ति श्रृंखला अधिक प्रभावी बनेगी, दवाओं की बर्बादी कम होगी और देश में आवश्यक दवाओं की उपलब्धता बेहतर होगी। मरीजों को भी पर्याप्त शेल्फ लाइफ वाली दवाएं मिलती रहेंगी।

ड्राफ्ट: शोध में सहायक

उल्लेखनीय है कि स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने जनवरी 2026 में ‘नई दवाएं और क्लिनिकल ट्रायल नियम, 2019’ में संशोधन करके घरेलू टेस्ट लाइसेंस के लिए इसी तरह की अधिसूचना प्रणाली शुरू की थी। अभी प्रस्तावित संशोधन इसे आयात के मामले में भी लागू करता है। उम्मीद है कि यह संशोधन टेस्टिंग या अनुसंधान एवं विकास के मकसद से कम मात्रा में दवाओं के आयात के लिए लाइसेंसिंग की ज़रूरतों को खत्म करके आवेदकों पर अनुपालन का बोझ काफी कम कर देगा। यह फार्मास्युटिकल्स में अनुसंधान एवं विकास क्षेत्र को नियंत्रण मुक्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और स्टार्ट-अप व उद्योगों को तेज़ी से टेस्टिंग या एनालिसिस शुरू करने में मदद करेगा। ऑनलाइन सूचना प्रणाली (ऑनलाइन इंटिमेशन सिस्टम) हितधारकों के लिए आसान और तुरंत काम करने वाला माध्यम (गेटवे) प्रदान करेगी। इस पहल से देश में अनुसंधान और नवाचार को बड़ा बढ़ावा मिलने की आशा है, इसके साथ ही नियामक प्रक्रिया भी ज़्यादा कुशल और सुव्यवस्थित होगी।

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